बेंगलूरु
अग्रहारा दासरहल्ली स्थित रामदेव प्रार्थना मंदिर में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन अखिल भारतीय रामस्नेही संप्रदाय पीठ एवं जैयमलदास मंदिर के महंत त्रिलोकदास ने शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कथा में कहा कि जब शिव और पार्वती का विवाह होने वाला था तो एक बड़ी सुंदर घटना हुई। ऐसा विवाह इससे पहले कभी नहीं हुआ था। शिव दुनिया के सबसे तेजस्वी प्राणी थे। एक-दूसरे प्राणी को अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले थे। सभी देवता तो वहां मौजूद थे ही, असुर भी वहां पहुंचे। आमतौर पर जहां देवता जाते थे, वहां असुर जाने से मना कर देते थे और जहां कहीं भी असुर जाते थे, वहां देवता नहीं जाते थे, क्योंकि उनकी आपस में बिल्कुल नहीं बनती थी। यह शिव का विवाह था, जिसमें सभी लोगों ने अपने सारे झगड़े भुलाकर एक साथ आने का मन बनाया।
शिव पशुपति का मतलब बताते हुए कहा कि इसका मतलब सभी देशों के देवता भी हैं, इसलिए सभी जानवर, कीड़े, मकोड़े और सारे जीव उनके विवाह में शामिल हुए।


