जेल शिफ्ट होने पर चल पाएंगे कई दफ्तर, ट्रैफिक दबाव से भी मिलेगी निजात

जेल शिफ्ट होने पर चल पाएंगे कई दफ्तर, ट्रैफिक दबाव से भी मिलेगी निजात

– बजट घोषणा से बदलेगी शहर की तस्वीर

उदयपुर. राज्य बजट में उदयपुर के लिए की गई घोषणाओं में दो अहम घोषणाएं हैं, जो शहर को काफी प्रभावित करेगी। एक घोषणा सेंट्रल जेल को शिफ्ट करने से संबंधित है और दूसरी आयड़ पुलिस चौकी को थाने में क्रमोन्नत करने की है। जेल शिफ्ट होने की स्थिति में वर्तमान जेल परिसर को कई सरकारी दफ्तरों के संचालन में इस्तेमाल किया जा सकता है। जेल परिसर में जितनी जगह है, शहर में उतनी खाली जगह मिलना बड़ा फायदा देगा।

सेंट्रल जेल के नए निर्माण की घोषणा के बाद जमीन चयन की प्रक्रिया फिर से तेज हो गई है। इसकी जरूरत पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते जेल को शहर से बाहर शिफ्ट नहीं किया जा सका। जहां पिछले वर्षों में लकड़वास में भी जमीन देखी गई, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। अब अहमदाबाद हाईवे पर काया-बलीचा क्षेत्र में जमीन चिह्नित किया जाना संभव है। प्रस्तावित 100 एकड़ में बनने वाली जेल में कैदियों को रखने की क्षमता भी अभी से दोगुनी हो जाएगी। वर्तमान में एक हजार कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन इसकी तुलना में ज्यादा कैदियों को रखने की मजबूरी है।

यूडीए को मिल सकता है नया परिसर

अभी यूडीए सहेली मार्ग पर संचालित है। समय के साथ काम बढ़ा, लेकिन यहां परिसर छोटा महसूस होने लगा है। अब जेल के लिए यूडीए नई जमीन आवंटित करेगा। ऐसे में जेल का वर्तमान परिसर यूडीए की ओर से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह संभव होने पर बड़ी समस्या का समाधान संभव है। इसके अलावा भी कई तरह के ऑफिस यहां संचालित किए जा सकते हैं।

जेल शिफ्टिंग की वजह और कवायद

अमूमन जेल और कोर्ट का पास होना जरूरी माना जाता रहा है। ताकि कैदियों को पेशी पर बिना किसी व्यवधान के ले जाया जा सके और कोर्ट से सजा मुकर्रर होने पर जेल में भर्ती कराया जा सके। भविष्य में उदयपुर कोर्ट को भी दक्षिण विस्तार क्षेत्र में आवंटित जमीन पर शिफ्ट किया जाएगा। ऐसे में संभव है कि जेल के लिए भी उसी तरफ जमीन चिह्नित की जा सके।

जेल के लिए पहले भी हो चुकी कवायद

पिछले वर्षों में जेल के लिए शहर से 17 किमी दूर लकड़वास में 21.6 हेक्टेयर (करीब 86 बीघा) जमीन तय की जा चुकी थी। जेल प्रशासन ने तकनीकी रूप से इस जगह को सही नहीं माना गया। इसके बाद उमरड़ा क्षेत्र में जमीन देखी गई, लेकिन वहां पर पिछले सालों में यूरेनियम खनन का मसला शुरू होने से यहां की जमीन भी खटाई में पड़ गई।

यह जानें स्थिति

935 कैदियों की क्षमता सेट्रल जेल की

1250 कैदियों को वर्तमान में रखा है

2000 क्षमता वाली हो सकेगी नई जेल

आयड़ थाने से मजबूत होगी कानून व्यवस्था

आयड़ पुलिस चौकी को थाने में क्रमोन्नत करने की मांग शहर विधायक दो साल से कर रहे थे। उन्होंने दो साल के दरमियान कई बार सरकार के समक्ष यह मांग रखी थी। अब आयड़ के थाना बनने पर 5 थानों की सीमाएं लगेंगी। सूरजपोल और हिरणमगरी की सीमाएं प्रभावित होने की संभावना कम है, लेकिन भूपालपुरा, सुखेर और प्रतापनगर थानों का दायरा प्रभावित होगा।

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