उच्च जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग (सवर्ण आयोग) ने सक्रिय पहल शुरू कर दी है। आयोग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद आज आयोग के अध्यक्ष महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने पीसी कर बताया कि ईडब्ल्यूएस लाभ के क्रियान्वयन की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई जिलों से लंबित मामले और अब तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों के आंकड़ों की जानकारी मांगी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पात्र लाभार्थियों को योजना का पूरा लाभ मिल रहा है या नहीं। लापरवाही का तुरंत होगा समाधान अध्यक्ष ने बताया, आयोग को विभिन्न जिलों से मिल रही सूचनाओं के आधार पर यह देखा जाएगा कि कहीं आवेदन लंबित तो नहीं हैं और प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा तो नहीं आ रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर समाधान कराया जाएगा। बासगीत पर्चा देने का अनुरोध आयोग ने राज्य सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि उच्च जातियों के गरीब परिवारों को बासगीत का पर्चा उपलब्ध कराया जाए। आयोग का मानना है कि कई जरूरतमंद परिवार अब भी भूमि अधिकार से वंचित हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इस दिशा में ठोस पहल के लिए सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताई गई है। विभागों के साथ जल्द बैठक महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि जल्द ही राजस्व विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के साथ संयुक्त बैठक की जाएगी। इस बैठक में ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया, लंबित मामलों के निष्पादन और अन्य प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी। आयोग का उद्देश्य है कि पात्र लोगों को बिना विलंब के लाभ मिले। उम्र सीमा बढ़ाने का सुझाव पीसी में आयोग अध्यक्ष ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार को सुझाव दिया गया है कि उच्च जातियों के प्रतियोगी छात्र-छात्राओं के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की जाए। उनका कहना था कि आर्थिक व सामाजिक कारणों से कई अभ्यर्थी समय पर तैयारी पूरी नहीं कर पाते, ऐसे में उम्र सीमा में वृद्धि से उन्हें अवसर मिल सकेगा। बैठक में आयोग के सभी सदस्य उपस्थित रहे और विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य राज्य में उच्च जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हितों की रक्षा करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिलाना है। उच्च जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग (सवर्ण आयोग) ने सक्रिय पहल शुरू कर दी है। आयोग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद आज आयोग के अध्यक्ष महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने पीसी कर बताया कि ईडब्ल्यूएस लाभ के क्रियान्वयन की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई जिलों से लंबित मामले और अब तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों के आंकड़ों की जानकारी मांगी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पात्र लाभार्थियों को योजना का पूरा लाभ मिल रहा है या नहीं। लापरवाही का तुरंत होगा समाधान अध्यक्ष ने बताया, आयोग को विभिन्न जिलों से मिल रही सूचनाओं के आधार पर यह देखा जाएगा कि कहीं आवेदन लंबित तो नहीं हैं और प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा तो नहीं आ रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर समाधान कराया जाएगा। बासगीत पर्चा देने का अनुरोध आयोग ने राज्य सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि उच्च जातियों के गरीब परिवारों को बासगीत का पर्चा उपलब्ध कराया जाए। आयोग का मानना है कि कई जरूरतमंद परिवार अब भी भूमि अधिकार से वंचित हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इस दिशा में ठोस पहल के लिए सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताई गई है। विभागों के साथ जल्द बैठक महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि जल्द ही राजस्व विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के साथ संयुक्त बैठक की जाएगी। इस बैठक में ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया, लंबित मामलों के निष्पादन और अन्य प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी। आयोग का उद्देश्य है कि पात्र लोगों को बिना विलंब के लाभ मिले। उम्र सीमा बढ़ाने का सुझाव पीसी में आयोग अध्यक्ष ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार को सुझाव दिया गया है कि उच्च जातियों के प्रतियोगी छात्र-छात्राओं के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की जाए। उनका कहना था कि आर्थिक व सामाजिक कारणों से कई अभ्यर्थी समय पर तैयारी पूरी नहीं कर पाते, ऐसे में उम्र सीमा में वृद्धि से उन्हें अवसर मिल सकेगा। बैठक में आयोग के सभी सदस्य उपस्थित रहे और विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य राज्य में उच्च जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हितों की रक्षा करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिलाना है।


