Tarique Rahman: बांग्लादेश में तख्तापलट और सत्ता परिवर्तन के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक नाजुक मोड़ पर हैं। एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं, तो दूसरी तरफ बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) और अंतरिम सरकार का दबाव बढ़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चुनावों के बाद अब बनने वाली नई सरकार और भारत के बीच कोई बड़ी ‘डील’ होगी? क्या तारिक रहमान, शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Sheikh Hasina Extradition) के बदले भारत को घुसपैठ रोकने की गारंटी देंगे? सवाल यह भी है कि क्या भारत प्रत्यर्पण संधि के कारण अब शेख हसीना का प्रत्यर्पण करने के लिए राजी (India Bangladesh Border Deal) हो जाएगा? भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ है। गृह मंत्रालय (MHA) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 5 वर्षों में हजारों घुसपैठिए पकड़े गए हैं, लेकिन यह समस्या अभी भी विकराल है।

शेख हसीना के कार्यकाल से अब तक बांग्लादेशियों की भारत में घुसपैठ। ( फोटो: AI)
शेख हसीना और मोहम्मद यूनुस: समय का चक्र
बांग्लादेश की राजनीति में पिछले कुछ महीनों में भूचाल आया है। अवामी लीग की नेता शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस ने कमान संभाली।
शेख हसीना का प्रधानमंत्री कार्यकाल:
पहला कार्यकाल: 1996 से 2001
दूसरा लगातार कार्यकाल: जनवरी 2009 से 5 अगस्त 2024 तक।
भारत में शेख हसीना:
वे 5 अगस्त 2024 को प्रदर्शनों के बाद ढाका छोड़कर भारत आ गईं और तब से यहीं सुरक्षित स्थान पर रह रही हैं।
मोहम्मद यूनुस की एंट्री:
शेख हसीना के जाने के बाद, 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार (प्रधानमंत्री के समकक्ष) के रूप में शपथ ली।
चुनाव और सीटों का गणित
बांग्लादेश में पिछला आम चुनाव जनवरी 2024 में हुआ था। यह चुनाव बेहद विवादास्पद रहा क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी (BNP) ने इसका बहिष्कार किया था।
परिणाम: शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने लगभग 220+ सीटें जीतीं और सरकार बनाई।
वर्तमान स्थिति: छात्र आंदोलन के बाद वह संसद भंग हो चुकी है और अब देश नए चुनावों का इंतजार कर रहा है, जिसमें बीएनपी की वापसी तय मानी जा रही है।
तारिक रहमान: भारत के प्रति रुख और भविष्य की डील (Tarique Rahman BNP)
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान, जो लंबे समय से लंदन में निर्वासित थे, अब बांग्लादेश की राजनीति के केंद्र में हैं।
भारत के प्रति नजरिया
तारिक रहमान और बीएनपी का इतिहास पारंपरिक रूप से भारत-विरोधी माना जाता रहा है, जबकि अवामी लीग को भारत का मित्र माना जाता था। हालांकि, हाल ही में तारिक रहमान ने परिपक्वता दिखाते हुए कहा है कि वे भारत के साथ स्थिर संबंध चाहते हैं, लेकिन यह बराबरी के आधार पर होने चाहिए।
हसीना के प्रत्यर्पण पर रुख:
तारिक रहमान और उनकी पार्टी की स्पष्ट मांग है कि शेख हसीना को बांग्लादेश वापस लाया जाए ताकि उन पर मानवाधिकार हनन और हत्याओं के मुकदमे चलाए जा सकें। बीएनपी के लिए यह एक बड़ा चुनावी मुद्दा है।
क्या होगी ‘हसीना के बदले सुरक्षा’ की डील?
सबसे बड़ा कूटनीतिक सवाल यही है-क्या भारत और बांग्लादेश (संभावित बीएनपी सरकार) के बीच कोई समझौता होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान और नई सरकार भारत के सामने एक प्रस्ताव रख सकते हैं।
डील की शर्त: बांग्लादेश, भारत की सुरक्षा चिंताओं (विशेषकर पूर्वोत्तर में उग्रवाद और अवैध घुसपैठ) को गंभीरता से लेगा और इसे पूरी तरह रोकने का वादा करेगा।
बदले में मांग: इसके बदले में वे भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करेंगे।
क्या तारिक रहमान घुसपैठ रोक पाएंगे?
तारिक रहमान के लिए यह आसान नहीं होगा, लेकिन अगर उन्हें भारत का साथ चाहिए, तो उन्हें सीमा सुरक्षा पर कड़े कदम उठाने होंगे। भारत साफ कर चुका है कि पड़ोसी कोई भी हो, ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति घुसपैठ पर जारी रहेगी। यदि बीएनपी सत्ता में आती है, तो अपनी वैधता साबित करने और आर्थिक मदद के लिए उन्हें भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने ही होंगे।
तारिक रहमान का जनता से किया गया वादा
बहरहाल, फिलहाल, गेंद भारत के पाले में है। भारत अपनी पुरानी मित्र शेख हसीना को आसानी से नहीं सौंपेगा, क्योंकि यह कूटनीतिक भरोसे का सवाल है। वहीं, बांग्लादेश की नई सरकार के लिए हसीना को वापस लाना जनता से किया गया वादा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा (घुसपैठ बंदी) के लिए अपनी पुरानी सहयोगी (हसीना) का सौदा करता है या कोई बीच का रास्ता निकलता है।


