हुब्बल्ली का भवानीशंकर मंदिर: शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना का प्राचीन केन्द्र

हुब्बल्ली का भवानीशंकर मंदिर: शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना का प्राचीन केन्द्र

आस्था और इतिहास का संगम: महाशिवरात्रि की तैयारियां तेज
ओल्ड हुब्बल्ली में स्थित भवानीशंकर मंदिर हुब्बल्ली के प्रमुख और ऐतिहासिक शिव मंदिरों में गिना जाता है। लंबे समय से यह मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था, धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र बना हुआ है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना होने के कारण मंदिर को भवानीशंकर नाम से जाना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का इतिहास कई पीढिय़ों पुराना है। प्रारंभ में यह एक छोटा धार्मिक स्थल था, किंतु समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे पर इसका विस्तार किया गया। बुजुर्गों का मानना है कि यहां सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना से पारिवारिक सुख-शांति, विवाह तथा संतान संबंधी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसी कारण आसपास के क्षेत्रों सहित दूर-दराज़ से भी भक्त यहां पहुंचते हैं।

धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख स्थल
कुछ वर्ष पूर्व मंदिर का व्यापक जीर्णोद्वार किया गया, जिसमें गर्भगृह, सभा मंडप और परिसर का विस्तार हुआ। इसके बाद मंदिर की व्यवस्था, सौंदर्य और आकर्षण और बढ़ गया है। आज यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख स्थल बन चुका है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होती है, जबकि सोमवार, सावन मास और प्रमुख पर्वों पर विशेष भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर रुद्राभिषेक, विशेष पूजन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

सामाजिक समरसता और परंपराएं जीवंत
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि समाज को जोडऩे वाला सांस्कृतिक केंद्र भी है, जहां धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता और परंपराएं जीवंत बनी रहती हैं। यह मंदिर केंद्र सरकार के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत संरक्षित स्मारक के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

भक्तों की गहरी आस्था
श्री भवानी शंकर एवं श्री नारायण देवस्थान ट्रस्ट हुब्बल्ली के अध्यक्ष संजीव जोशी ने बताया कि हाशिवरात्रि पर्व पर दोपहर 12 बजे विशेष अभिषेक किया जाएगा और मंदिर दिनभर भक्तों के लिए खुला रहेगा। वर्षभर विभिन्न अवसरों पर यहां विशेष आयोजन होते हैं और मंदिर के प्रति भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

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