मुजफ्फरपुर कोर्ट ने DMK सांसद दयानिधि मारन को तलब किया है। मामला उत्तर भारतीय महिलाओं पर कथित अपमानजनक टिप्पणी से जुड़ा है। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM-1, पश्चिम) की कोर्ट ने इस संबंध में संज्ञान लिया है। कोर्ट ने DMK सांसद को समन जारी किया है। जिसे 13 फरवरी को रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया है। उन्हें 23 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। आरोप है कि सांसद ने चेन्नई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिंदी भाषी राज्यों और तमिलनाडु की महिलाओं की तुलना करते हुए कहा था कि उत्तर भारत की महिलाएं केवल खाना बनाने और बच्चे पैदा करने तक सीमित हैं। अब पढ़िए डीएमके सांसद का पूरा बयान सांसद ने कहा था, ‘उत्तर भारतीय राज्यों में लड़कियों से कहा जाता है कि वे नौकरी नहीं करें, घर में रहें, किचन में काम करें और बच्चे पैदा करें। तमिलनाडु में लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण पर ध्यान दिया जाता है। हमारे छात्राओं को गर्व होना चाहिए।’ ‘हम तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई करने के लिए कहते हैं। उन्हें लैपटॉप देते हैं, जिसका इस्तेमाल वे पढ़ाई करने और इंटरव्यू देने के लिए कर रही हैं। तमिलनाडु एक द्रविड़ राज्य है, जहां आपके उत्थान को महत्व दिया जाता है। जबकि कई उत्तर भारत राज्यों में लड़कियों को नहीं करने दिया जाता है। उन्हें घर में रखा जाता है।’ महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप बयान सामने आने के बाद 16 जनवरी 2026 को स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा ने मुजफ्फरपुर कोर्ट में एक परिवाद दायर किया था। ओझा ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि सांसद का बयान न केवल उत्तर भारतीय महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि यह देश की एकता को प्रभावित कर क्षेत्रीय विद्वेष और नफरत फैलाने का प्रयास है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत संज्ञान लिया है। इनमें मुख्य रूप से धारा 74, 75 और 79 (महिला की गरिमा और अपमान से संबंधित), धारा 192 और 298 (धार्मिक या क्षेत्रीय भावनाओं को ठेस पहुँचाना), तथा धारा 352 और 251(2) (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) शामिल हैं। 23 फरवरी होगी सुनवाई परिवाद दायर करने वाले अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को देश के किसी हिस्से या वर्ग का अपमान करने का अधिकार नहीं है। इसलिए मेरे द्वारा परिवाद दायर किया गया था। जिस पर माननीय न्यायालय ने स्वीकार किया और गंभीरता से लिया है। अब सबकी नजरें 23 फरवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी है। जब दयानिधि मारन को अदालत के समक्ष अपनी सफाई पेश करनी होगी। मुजफ्फरपुर कोर्ट ने DMK सांसद दयानिधि मारन को तलब किया है। मामला उत्तर भारतीय महिलाओं पर कथित अपमानजनक टिप्पणी से जुड़ा है। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM-1, पश्चिम) की कोर्ट ने इस संबंध में संज्ञान लिया है। कोर्ट ने DMK सांसद को समन जारी किया है। जिसे 13 फरवरी को रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया है। उन्हें 23 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। आरोप है कि सांसद ने चेन्नई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिंदी भाषी राज्यों और तमिलनाडु की महिलाओं की तुलना करते हुए कहा था कि उत्तर भारत की महिलाएं केवल खाना बनाने और बच्चे पैदा करने तक सीमित हैं। अब पढ़िए डीएमके सांसद का पूरा बयान सांसद ने कहा था, ‘उत्तर भारतीय राज्यों में लड़कियों से कहा जाता है कि वे नौकरी नहीं करें, घर में रहें, किचन में काम करें और बच्चे पैदा करें। तमिलनाडु में लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण पर ध्यान दिया जाता है। हमारे छात्राओं को गर्व होना चाहिए।’ ‘हम तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई करने के लिए कहते हैं। उन्हें लैपटॉप देते हैं, जिसका इस्तेमाल वे पढ़ाई करने और इंटरव्यू देने के लिए कर रही हैं। तमिलनाडु एक द्रविड़ राज्य है, जहां आपके उत्थान को महत्व दिया जाता है। जबकि कई उत्तर भारत राज्यों में लड़कियों को नहीं करने दिया जाता है। उन्हें घर में रखा जाता है।’ महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप बयान सामने आने के बाद 16 जनवरी 2026 को स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा ने मुजफ्फरपुर कोर्ट में एक परिवाद दायर किया था। ओझा ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि सांसद का बयान न केवल उत्तर भारतीय महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि यह देश की एकता को प्रभावित कर क्षेत्रीय विद्वेष और नफरत फैलाने का प्रयास है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत संज्ञान लिया है। इनमें मुख्य रूप से धारा 74, 75 और 79 (महिला की गरिमा और अपमान से संबंधित), धारा 192 और 298 (धार्मिक या क्षेत्रीय भावनाओं को ठेस पहुँचाना), तथा धारा 352 और 251(2) (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) शामिल हैं। 23 फरवरी होगी सुनवाई परिवाद दायर करने वाले अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को देश के किसी हिस्से या वर्ग का अपमान करने का अधिकार नहीं है। इसलिए मेरे द्वारा परिवाद दायर किया गया था। जिस पर माननीय न्यायालय ने स्वीकार किया और गंभीरता से लिया है। अब सबकी नजरें 23 फरवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी है। जब दयानिधि मारन को अदालत के समक्ष अपनी सफाई पेश करनी होगी।


