भागलपुर जिले में ग्रामीण कार्य विभाग की लापरवाही और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। नाथनगर प्रखंड के कंझीया गांव में करीब दो किलोमीटर लंबी मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क पूरी तरह तालाब में बदल गई है। नाले के पानी की उचित निकासी न होने के कारण सड़क पर सालभर पानी जमा रहता है। इससे सड़क की गिट्टी उखड़ गई है और जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण वर्ष 2020 में शुरू होकर 2021 में पूरा हुआ था। इस पर लगभग 27 लाख 503 रुपए खर्च किए गए थे, जबकि पांच साल के रखरखाव के लिए 13 लाख रुपए अलग से आवंटित किए गए थे। कुल मिलाकर करीब 40 लाख की लागत से बनी यह सड़क पांच साल भी नहीं टिक पाई।
मरम्मत के नाम पर गिट्टी डाल दी जाती है स्थानीय निवासी मनीष कुमार का कहना है कि सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद पहली बारिश में ही यह उखड़ने लगी थी। अब तक इसकी पांच बार मरम्मत कराई जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल खानापूर्ति की गई। विभागीय अधिकारियों ने समय रहते न तो जांच की और न ही ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की। मरम्मत के नाम पर गड्ढों में सिर्फ राबीस और गिट्टी डाली जाती है, जो अगली बारिश में बह जाती है। यह सड़क नाथनगर से हुलास स्थान होते हुए बांका जिले को जोड़ती है। यह भतोड़िया, गोविंदपुर, सोखर, चांदपुर, गोलाहु, बेलखोरिया, दरियापुर, सजोर, राधानगर, पवय और अमरपुर सहित दर्जनों गांवों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। रोजाना इस सड़क से छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। कई बार राहगीर गिरकर घायल भी हो चुके हैं ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे बना नाला वर्षों से जाम है। समय पर उड़ाही नहीं होने से नाले का पानी सड़क पर फैल जाता है और पूरा मार्ग कीचड़ व गंदे पानी में डूबा रहता है। पंचायत के मुखिया गौतम पासवान ने बताया कि इस समस्या को लेकर प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासी सुशील कुमार कहते हैं कि निर्माण के समय ही गुणवत्ता पर सवाल उठे थे, लेकिन विभाग ने अनदेखी कर दी। नतीजा यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी और हादसों का कारण बन गई है। भागलपुर जिले में ग्रामीण कार्य विभाग की लापरवाही और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। नाथनगर प्रखंड के कंझीया गांव में करीब दो किलोमीटर लंबी मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क पूरी तरह तालाब में बदल गई है। नाले के पानी की उचित निकासी न होने के कारण सड़क पर सालभर पानी जमा रहता है। इससे सड़क की गिट्टी उखड़ गई है और जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण वर्ष 2020 में शुरू होकर 2021 में पूरा हुआ था। इस पर लगभग 27 लाख 503 रुपए खर्च किए गए थे, जबकि पांच साल के रखरखाव के लिए 13 लाख रुपए अलग से आवंटित किए गए थे। कुल मिलाकर करीब 40 लाख की लागत से बनी यह सड़क पांच साल भी नहीं टिक पाई।
मरम्मत के नाम पर गिट्टी डाल दी जाती है स्थानीय निवासी मनीष कुमार का कहना है कि सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद पहली बारिश में ही यह उखड़ने लगी थी। अब तक इसकी पांच बार मरम्मत कराई जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल खानापूर्ति की गई। विभागीय अधिकारियों ने समय रहते न तो जांच की और न ही ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की। मरम्मत के नाम पर गड्ढों में सिर्फ राबीस और गिट्टी डाली जाती है, जो अगली बारिश में बह जाती है। यह सड़क नाथनगर से हुलास स्थान होते हुए बांका जिले को जोड़ती है। यह भतोड़िया, गोविंदपुर, सोखर, चांदपुर, गोलाहु, बेलखोरिया, दरियापुर, सजोर, राधानगर, पवय और अमरपुर सहित दर्जनों गांवों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। रोजाना इस सड़क से छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। कई बार राहगीर गिरकर घायल भी हो चुके हैं ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे बना नाला वर्षों से जाम है। समय पर उड़ाही नहीं होने से नाले का पानी सड़क पर फैल जाता है और पूरा मार्ग कीचड़ व गंदे पानी में डूबा रहता है। पंचायत के मुखिया गौतम पासवान ने बताया कि इस समस्या को लेकर प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासी सुशील कुमार कहते हैं कि निर्माण के समय ही गुणवत्ता पर सवाल उठे थे, लेकिन विभाग ने अनदेखी कर दी। नतीजा यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी और हादसों का कारण बन गई है।


