भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) गुट के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। किसानों ने जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मिलने की मांग की, लेकिन शुरुआत में अधिकारी उपलब्ध नहीं हो सके। इससे नाराज किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान किसानों ने रागिनी पर नृत्य किया और प्रशासन विरोधी नारे लगाए। शाम को किसानों ने अपने लिए भोजन भी तैयार किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान डटे रहे। देर रात करीब 1 बजे जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पाण्डेय विकास भवन सभागार पहुंचे। यहीं किसानों और अधिकारियों के बीच बैठक हुई। *रात्रि में किसानों से मिले डीएम-एसएसपी* किसानों ने तहसील स्तर पर दी गई समस्याओं का समाधान न होने का मुद्दा उठाया। इनमें तालाबों की सफाई, अंश निर्धारण में त्रुटि, नाम में गलती, डोल बंदी, कुर्रे बंदी, रियल टाइम फर्द में अंश निर्धारण की गलती, तहसील में भ्रष्टाचार, लेखपाल और कानूनगो की मनमानी, तथा ट्रांसफार्मर व ट्यूबवेल तार चोरी जैसे प्रमुख मामले शामिल थे। जिलाधिकारी वीके सिंह ने किसानों को आश्वासन दिया कि तहसील स्तर पर हुई सभी वार्ताओं और उठाई गई समस्याओं का तीन दिनों के भीतर उचित समाधान किया जाएगा। *अब नहीं होगा थानों में किसानों के दुर्व्यवहार* वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पाण्डेय ने किसानों को भरोसा दिलाया कि थानों में उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा। उन्होंने ट्यूबवेल और ट्रांसफार्मर चोरी की घटनाओं पर हर हाल में रोक लगाने का भी आश्वासन दिया। जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने कहा कि संगठन और किसान लगातार अधिकारियों तक अपनी समस्याएं पहुंचाते रहे हैं, लेकिन अधिकारी ‘एसआईआर’ (SIR) का हवाला देकर पिछले तीन माह से उनका निस्तारण नहीं कर रहे हैं। उन्होंने समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की। किसानों ने सदर, सरधना और मवाना तीनों तहसीलों में पूर्व में दी गई लिखित समस्याओं का निस्तारण न होने, सीओ चकबंदी द्वारा किसानों के साथ अभद्र व्यवहार करने और एसआईआर के नाम पर तहसील में किसान संबंधी कार्यों को लंबित रखने जैसे मुद्दों पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। सत्यवीर, देशपाल, हर्ष चहल, मोनू, सत्येंद्र, बबलू, सनी, विनेश प्रधान, सुभाष, वीरेंद्र व मनोज आदि मौजूद हे।


