केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में व्यापक असर देखने को मिला। बैंकिंग, कोयला, दूरसंचार और औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज आंशिक या पूर्ण रूप से ठप रहा। बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन, झारखंड के अनुसार, केवल रांची में ही करीब 700 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ। वहीं, सीसीएल क्षेत्र में उत्पादन और डिस्पैच बाधित रहने से लगभग 16-17 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान जताया गया। हजारों कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने समेत अन्य मांगें उठाईं। हालांकि, नगर निकाय चुनाव के कारण बिजली कर्मी हड़ताल में शामिल नहीं हुए, जबकि कुछ संस्थानों में सांकेतिक समर्थन भी देखा गया। अल्बर्ट एक्का चौक से कचहरी तक निकाला जुलूस : इधर, आम हड़ताल के समर्थन में वाम दलों की ओर से झंडा-बैनर-तख्ती के साथ अल्बर्ट एक्का चौक पर सुबह 9.30 बजे से अपराह्न 12 बजे तक चक्का जाम किया गया। 12 बजे जुलूस निकाला गया, जो कचहरी चौक होते हुए फिर अल्बर्ट एक्का चौक आकर समाप्त हुआ। जुलूस का नेतृत्व भाकपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक कर रहे थे। मौके पर मुख्य रूप से भाकपा के जिला सचिव अजय कुमार सिंह, कर्मचारी संघ के सुनील कुमार, चुनमुन उरांव, सीपीएम के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, माले के राज्य सचिव मनोज भट्ट, शुभेंदु सेन, सुखनाथ लोहार, नंदिता भट्टाचार्य, दुकानदार संघ के विकास कुमार सहित अन्य लोग रहे। हड़ताल का असर व्यापार और बाजारों पर भी दिखा। अन्य दिनों की तुलना में मुख्य बाजारों में भीड़ कम रही। पंडरा मुख्य मंडी में रांची और आसपास के कारोबारी नहीं पहुंच पाए। अपर बाजार में भी सन्नाटा पसरा रहा। झारखंड चैंबर के महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि अनेक व्यापारी लेन-देन नहीं किए गए। एचईसी के कई मजदूर यूनियन एचईसी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए हड़ताल में शामिल नहीं हुए। कुछ यूनियनों ने थोड़ी देर हटिया मशीन बिल्डिंग प्लांट (एचएमबीपी) गेट के सामने सांकेतिक प्रदर्शन जरूर किया। हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के महामंत्री लीलाधर सिंह ने कहा कि हमारी प्रमुख मांगों में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना, न्यूनतम वेतन भुगतान की गारंटी, सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा एवं मेडिकल इंश्योरेंस कवर देना और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक आदि शामिल है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ग्रामीण बैंक व निजी बैंक की शाखाओं को छोड़ कर बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन, झारखंड के बैनर तले लगभग सभी बैंकों की शाखाएं और प्रशासनिक कार्यालय बंद रहे। बैंक कर्मियों ने अपनी शाखाओं के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। बैंकों के बंद रहने का सबसे ज्यादा असर व्यापारियों पर पड़ा। वे अपना ट्रांजेक्शन नहीं कर पाए। बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन झारखंड के महासचिव एमएल सिंह के अनुसार, इस बंदी से रांची में 700 करोड़ रुपए कारोबार प्रभावित रहा। वहीं रांची में 2000 बैंक कर्मियों ने हिस्सा लिया। बैंकों का कामकाज पूरी तरह से अवरूद्ध रहा। चेक क्लियरेंस के साथ ड्राफ्ट का काम नहीं हो सका। 2000 बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे, कामकाज पूरी तरह से अवरुद्ध कोयला खदानों में डिस्पैच का काम भी बाधित रहा झारखंड में सीसीएल के कमांड एरिया पर हड़ताल का असर देखा गया। अधिकतर कोयला खदानों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। डिस्पैच का काम भी बाधित दिखा। रांची स्थित तीन खदानों में भी उत्पादन प्रभावित रहा। सीटू के आरपी सिंह के अनुसार, सीसीएल के दो दर्जन से अधिक खदानों में हड़ताल की वजह से 16-17 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। हालांकि, सीसीएल मुख्यालय में ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी कार्यालय पहुंचे। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के एके. झा ने कहा कि झारखंड में कोयला का उत्पादन व डिस्पैच प्रभावित हुआ है। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में संयुक्त ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में व्यापक असर देखने को मिला। बैंकिंग, कोयला, दूरसंचार और औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज आंशिक या पूर्ण रूप से ठप रहा। बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन, झारखंड के अनुसार, केवल रांची में ही करीब 700 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ। वहीं, सीसीएल क्षेत्र में उत्पादन और डिस्पैच बाधित रहने से लगभग 16-17 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान जताया गया। हजारों कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने समेत अन्य मांगें उठाईं। हालांकि, नगर निकाय चुनाव के कारण बिजली कर्मी हड़ताल में शामिल नहीं हुए, जबकि कुछ संस्थानों में सांकेतिक समर्थन भी देखा गया। अल्बर्ट एक्का चौक से कचहरी तक निकाला जुलूस : इधर, आम हड़ताल के समर्थन में वाम दलों की ओर से झंडा-बैनर-तख्ती के साथ अल्बर्ट एक्का चौक पर सुबह 9.30 बजे से अपराह्न 12 बजे तक चक्का जाम किया गया। 12 बजे जुलूस निकाला गया, जो कचहरी चौक होते हुए फिर अल्बर्ट एक्का चौक आकर समाप्त हुआ। जुलूस का नेतृत्व भाकपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक कर रहे थे। मौके पर मुख्य रूप से भाकपा के जिला सचिव अजय कुमार सिंह, कर्मचारी संघ के सुनील कुमार, चुनमुन उरांव, सीपीएम के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, माले के राज्य सचिव मनोज भट्ट, शुभेंदु सेन, सुखनाथ लोहार, नंदिता भट्टाचार्य, दुकानदार संघ के विकास कुमार सहित अन्य लोग रहे। हड़ताल का असर व्यापार और बाजारों पर भी दिखा। अन्य दिनों की तुलना में मुख्य बाजारों में भीड़ कम रही। पंडरा मुख्य मंडी में रांची और आसपास के कारोबारी नहीं पहुंच पाए। अपर बाजार में भी सन्नाटा पसरा रहा। झारखंड चैंबर के महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि अनेक व्यापारी लेन-देन नहीं किए गए। एचईसी के कई मजदूर यूनियन एचईसी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए हड़ताल में शामिल नहीं हुए। कुछ यूनियनों ने थोड़ी देर हटिया मशीन बिल्डिंग प्लांट (एचएमबीपी) गेट के सामने सांकेतिक प्रदर्शन जरूर किया। हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के महामंत्री लीलाधर सिंह ने कहा कि हमारी प्रमुख मांगों में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना, न्यूनतम वेतन भुगतान की गारंटी, सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा एवं मेडिकल इंश्योरेंस कवर देना और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक आदि शामिल है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ग्रामीण बैंक व निजी बैंक की शाखाओं को छोड़ कर बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन, झारखंड के बैनर तले लगभग सभी बैंकों की शाखाएं और प्रशासनिक कार्यालय बंद रहे। बैंक कर्मियों ने अपनी शाखाओं के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। बैंकों के बंद रहने का सबसे ज्यादा असर व्यापारियों पर पड़ा। वे अपना ट्रांजेक्शन नहीं कर पाए। बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन झारखंड के महासचिव एमएल सिंह के अनुसार, इस बंदी से रांची में 700 करोड़ रुपए कारोबार प्रभावित रहा। वहीं रांची में 2000 बैंक कर्मियों ने हिस्सा लिया। बैंकों का कामकाज पूरी तरह से अवरूद्ध रहा। चेक क्लियरेंस के साथ ड्राफ्ट का काम नहीं हो सका। 2000 बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे, कामकाज पूरी तरह से अवरुद्ध कोयला खदानों में डिस्पैच का काम भी बाधित रहा झारखंड में सीसीएल के कमांड एरिया पर हड़ताल का असर देखा गया। अधिकतर कोयला खदानों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। डिस्पैच का काम भी बाधित दिखा। रांची स्थित तीन खदानों में भी उत्पादन प्रभावित रहा। सीटू के आरपी सिंह के अनुसार, सीसीएल के दो दर्जन से अधिक खदानों में हड़ताल की वजह से 16-17 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। हालांकि, सीसीएल मुख्यालय में ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी कार्यालय पहुंचे। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के एके. झा ने कहा कि झारखंड में कोयला का उत्पादन व डिस्पैच प्रभावित हुआ है।


