छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज ने ‘क्लाइंट काउंसलिंग’ विषय पर एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें भावी अधिवक्ताओं को कोर्ट रूम की व्यावहारिक बारीकियों से अवगत कराया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना था कि सफल कानूनी करियर के लिए केवल धाराओं का ज्ञान ही नहीं, बल्कि क्लाइंट के साथ व्यवहार कुशलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता करण गुप्ता ने अपने वर्षों के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एक सफल वकील बनने की पहली शर्त क्लाइंट की बात को एकाग्रता और धैर्य के साथ सुनना है। करण गुप्ता ने प्रभावी संवाद और तथ्यों की स्पष्ट समझ को किसी भी मामले की मजबूत नींव बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक अधिवक्ता और क्लाइंट के बीच विश्वास का मजबूत रिश्ता स्थापित नहीं होता, तब तक केस की सही दिशा तय करना मुश्किल होता है। कानूनी प्रक्रिया की बारीकियों पर चर्चा करते हुए, अधिवक्ता करण गुप्ता ने ‘मार्किंग ऑफ सिनॉप्सिस’ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि न्यायालय में सफलता की कुंजी संक्षिप्त और स्पष्ट प्रस्तुति में निहित है। किसी भी वाद की सटीक तैयारी और उसे कम शब्दों में प्रभावी ढंग से पेश करना एक कला है, जो निरंतर अभ्यास से विकसित होती है। उन्होंने वास्तविक जीवन के विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि कठिन परिस्थितियों में क्लाइंट को कैसे संभालना चाहिए और कानूनी उलझनों का व्यावहारिक समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।
इस कार्यशाला में बी.ए.एलएल.बी., बी.बी.ए.एलएल.बी. और एलएल.बी. के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने वकालत के पेशे से जुड़ी अपनी शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान की निदेशक डॉ. स्मृति रॉय, सहायक निदेशक डॉ. राहुल तिवारी और डॉ. शामिउद्दीन भी उपस्थित रहे।


