विश्व पटल पर शक्ति स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाला परमाणु नगरी पोकरण यातायात व्यवस्था की बदहाली पर आंसू बहा रहा है। समय के साथ आबादी व वाहनों की संख्या बढ़ी। यही नहीं जैसलमेर जाने और वापिस आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। जबकि यातायात व्यवस्था 5 दशक पुरानी ही चली आ रही है। गौरतलब है कि सरहदी जैसलमेर जिले का पोकरण प्रवेश द्वार माना जाता है। प्रतिवर्ष रामदेवरा में लाखों श्रद्धालुओं की आवक होती है, जो पोकरण होकर निकलते है। स्वर्णनगरी जैसलमेर घूमने आने वाले 90 प्रतिशत पर्यटकों की भी पहले पोकरण में आमद होती है। साथ ही वापसी में भी ये पर्यटक यहीं से गुजरते है। इसी प्रकार पोकरण विधानसभा, उपखंड मुख्यालय होने और आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में बाहरी कंपनियां होने से कस्बे में हर समय वाहनों का दबाव बना रहता है। जिससे प्रतिदिन मुख्य मार्गों पर वाहनों का जमावड़ा देखा जा सकता है।
पांच दशक पुरानी यातायात व्यवस्था
वर्ष 1971-72 में पोकरण में यातायात पुलिस की अस्थायी चौकी शुरू की गई थी। उस समय 2 हेड कांस्टेबल व 8 कांस्टेबल के पद स्वीकृत किए गए थे। तब से हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल के पद बढ़ाए नहीं गए है। हालांकि प्रभारी के रूप में एक सहायक उपनिरीक्षक अवश्य लगाया गया है। करीब पांच दशक में आबादी तीन गुणा बढ़ चुकी है और वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, लेकिन पुरानी व्यवस्था को क्रमोन्नत नहीं करने के कारण बिगड़ती यातायात व्यवस्था से लोग परेशान हो रहे है।
यातायात स्टाफ आधा भी नहीं
भौगोलिक परिस्थिति से पोकरण की स्थिति जंक्शन की तरह है।राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 व 125 से जुड़ा होने के कारण जैसलमेर जाने वाले लाखों सैलानी पोकरण होकर गुजरते है। इसके साथ ही वापसी में भी पोकरण से ही निकलते है। यही स्थिति रामदेवरा आने वाले श्रद्धालुओं की भी है, जो जाते व वापिस आते समय पोकरण से ही गुजरते है। ऐसे में पोकरण में आवाजाही दो-गुणा हो जाती है, जबकि यातायात स्टाफ की स्थिति देखे तो जैसलमेर में तीन गुणा कार्यरत है। जैसलमेर में एक निरीक्षक सहित कुल 35 का स्टाफ है, जबकि पोकरण में 10 का स्टाफ।
व्यवस्था सुधरे तो मिले राहत
यातायात स्टाफ की कमी के कारण आए दिन यातायात व्यवस्था लडख़ड़ा रही है। हालांकि उपलब्ध स्टाफ व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास करते है, लेकिन आबादी व वाहनों की संख्या के सामने यातायात स्टाफ की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। ऐसे में आए दिन वाहनों का जाम लगने, नो-पार्किंग में वाहन खड़े हो जाने, प्रतिबंध के बावजूद वाहनों के प्रवेश करने से व्यवस्था बिगड़ जाती है।


