किशनगंज में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अनन्य विशेष उत्पाद न्यायाधीश-प्रथम नीरज किशोर सिंह की अदालत ने एक शराब तस्कर को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न चुकाने पर उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। आरोपी अवैध शराब के कारोबार में था लिप्त यह फैसला ठाकुरगंज थाना कांड संख्या 37/17 से संबंधित है, जिसमें आरोपी कैलाश कामती को दोषी करार दिया गया। लोक अभियोजक सुरेन प्रसाद साहा ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अदालत में सबूतों के आधार पर यह साबित किया कि आरोपी अवैध शराब के कारोबार में लिप्त था, जिससे समाज में नशे की समस्या बढ़ रही थी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और ऐसे अपराध राज्य की नीति के सीधे उल्लंघन हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की कि आरोपी ने कानून तोड़कर अवैध धंधा चलाया, जिससे युवाओं और पूरे समाज को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था। अवैध शराब के खिलाफ मुहिम और तेज होगी इस फैसले से जिले में अवैध शराब तस्करों के बीच हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अवैध शराब के खिलाफ उसकी मुहिम और तेज होगी। पुलिस और उत्पाद शुल्क विभाग की संयुक्त कार्रवाई से पहले भी कई तस्करों पर भारी जुर्माना और लंबी सजाएं हो चुकी हैं। प्रशासन का संदेश साफ है कि शराबबंदी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए छापेमारी और जांच जारी रहेगी, और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह निर्णय अवैध शराब कारोबार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का एक मजबूत उदाहरण है। किशनगंज में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अनन्य विशेष उत्पाद न्यायाधीश-प्रथम नीरज किशोर सिंह की अदालत ने एक शराब तस्कर को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न चुकाने पर उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। आरोपी अवैध शराब के कारोबार में था लिप्त यह फैसला ठाकुरगंज थाना कांड संख्या 37/17 से संबंधित है, जिसमें आरोपी कैलाश कामती को दोषी करार दिया गया। लोक अभियोजक सुरेन प्रसाद साहा ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अदालत में सबूतों के आधार पर यह साबित किया कि आरोपी अवैध शराब के कारोबार में लिप्त था, जिससे समाज में नशे की समस्या बढ़ रही थी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और ऐसे अपराध राज्य की नीति के सीधे उल्लंघन हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की कि आरोपी ने कानून तोड़कर अवैध धंधा चलाया, जिससे युवाओं और पूरे समाज को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था। अवैध शराब के खिलाफ मुहिम और तेज होगी इस फैसले से जिले में अवैध शराब तस्करों के बीच हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अवैध शराब के खिलाफ उसकी मुहिम और तेज होगी। पुलिस और उत्पाद शुल्क विभाग की संयुक्त कार्रवाई से पहले भी कई तस्करों पर भारी जुर्माना और लंबी सजाएं हो चुकी हैं। प्रशासन का संदेश साफ है कि शराबबंदी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए छापेमारी और जांच जारी रहेगी, और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह निर्णय अवैध शराब कारोबार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का एक मजबूत उदाहरण है।


