पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से पहली मौत: कैसे फैलता है यह वायरल? जानें इसके लक्षण

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से पहली मौत: कैसे फैलता है यह वायरल? जानें इसके लक्षण

Nipah Virus Bengal: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से संबंधित पहली मौत दर्ज की गई। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती एक नर्स की मृत्यु हो गई। 

Nipah Virus: पश्चिम बंगाल में गुरुवार को निपाह वायरस संक्रमण से 25 साल की महिला नर्स की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि बंगाल में निपाह वायरस से संबंधित पहली मौत है। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती एक नर्स की मृत्यु हो गई। राज्य स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि मृतक नर्स के फेफड़ों में द्वितीयक संक्रमण हो गया था। वायरस से संक्रमित एक अन्य नर्स का भी उसी अस्पताल में इलाज चल रहा था। ये दोनों नर्सें निपाह वायरस से संक्रमित होने वाले अब तक के एकमात्र मामले हैं।

बंगाल के अस्पताल में नर्स की मौत

बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इन दो नर्सों के अलावा राज्य में निपाह वायरस से संक्रमित होने का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। संक्रमित नर्सों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए संपर्क ट्रेसिंग की गई। राज्य में निपाह वायरस से संबंधित पहली मौत दर्ज की गई।

नर्सों के संपक में आए लोगों की पहचान

सभी लोगों की पहचान कर ली गई और उनके नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, सभी नमूनों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है। संक्रमित नर्सों के संपर्क में आए किसी भी व्यक्ति में निपाह वायरस का कोई निशान नहीं मिला है।

कैसे फैसलता हैं निपाह वायरस

निपाह वायरस के मुख्य वाहक चमगादड़ होते हैं। अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ के काटने से प्रभावित फल खाता है, तो वह भी इस वायरस से संक्रमित हो सकता है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दावा किया था कि चमगादड़ों के अलावा पागल कुत्ते भी इस वायरस के वाहक हो सकते हैं। निपाह वायरस से संक्रमित लोगों की औसत मृत्यु दर 50 प्रतिशत से अधिक है। डॉक्टरों के अनुसार, वायरस का जितनी जल्दी पता चलता है, ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।

निपाह वायरस के लक्षण

बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे होते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसके बाद दौरे, गले में खराश, और सांस लेने में गंभीर समस्या हो सकती है। अधिक गंभीर अवस्था में, रोगी कोमा में जा सकता है। अभी तक इसका कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। इस वायरस के टीके पर शोध जारी है।

  

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