सदन में शब्दों का संग्राम: विधान परिषद में गूंजे ‘दलाल, टपोरी और लफंगा’, माननीयों की भाषा से सभापति हैरान

सदन में शब्दों का संग्राम: विधान परिषद में गूंजे ‘दलाल, टपोरी और लफंगा’, माननीयों की भाषा से सभापति हैरान

दलाल, टपोरी और लफंगा, बिहार विधान परिषद में गुरूवार को ये शब्द गूंजे। चौंक चौराहे पर लफंगों द्वारा बोले जाने वाले ये शब्द के बजट सत्र में गूंजने पर सभापति अवधेश नारायण सिंह भी हैरान दिखे। दरअसल, बिहार विधान परिषद के चालू सत्र में एमएलसी महेश्वर सिंह की गुरूवार को जुबान फिसल गई। गरीबों को मिलने वाले राशन को लेकर सदन में वो अपनी बात रखना चाहते थे। गरीबों को मिलने वाले राशन में होने वाले हेराफेरी की चर्चा कर रहे थे। इसी क्रम में एमएलसी खालिद अनवर के टोका टोकी से वे नाराज हो गए और उनकी तरफ इशारा करते उन्हें दलाल तक कह डाला। इसके बाद कुछ पल के लिए सदन खामोश हो गया। लेकिन, फिर एमएलसी महेश्वर सिंह ने ही सदन की चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि बिहार में गरीबों को पांच किलो अनाज मिलता है लेकिन, मोतिहारी में गरीबों को 4 किलो आनाज मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मेरी बात गलत हुई तो अभी सदन से इस्तीफा दे देंगे।

मंत्री और एमएलसी को कहा ‘लफंगा’

बिहार विधान परिषद में इससे पहले बुधवार को लफंगा शब्द ने एंट्री ले ली थी। इस शब्द की एंट्री माननीय मंत्री अशोक चौधरी और आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह के बीच नोकझोंक के साथ हुई। इस नोकझोंक के क्रम में ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने कहा सुनील सिंह ‘लफंगा’ हैं, लड़ना है तो सड़क पर आ जाएं। परिषद में उन्होंने आगे कहा कि मैं लफंगों से मैं डरने वाला नहीं हूं। अशोक चौधरी ने कहा कि हमने उनको बिस्कोमान में हराया था। वे वहां कब्जा कर बैठे थे। इसकी वजह से ही उनको मुझसे दिक्कत है। वे अगर लड़ना चाहते है तो सड़क पर आएं, मैं इसके लिए तैयार हूं।

  एमएलसी ने मंत्री को कहा ‘टपोरी’

मंत्री अशोक चौधरी पर पलटवार करते हुए एमएलसी सुनील सिंह ने कहा कि मंत्री अशोक चौधरी का व्यवहार सदन में ‘टपोरी’ से कम नहीं था। वे संख्या बल के दम पर दबाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने पूरी घटना की चर्चा करते हुए कहा कि मंत्री अशोक चौधरी ने फाइल फेंककर मारी। सदन के भीतर अभद्र भाषा का प्रयोग किया। सुनील सिंह ने कहा कि राबड़ी देवी के अपमान पर हम सदन में चर्चा की मांग कर रहे थे, इसपर मंत्री ने हमें और राबड़ी देवी को गाली दी, यह असहनीय है।

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