पूर्णिया यूनिवर्सिटी के PHD सीटों में कटौती का मामला:यूजीसी नियमों के मुताबिक सीट बढ़ाने की मांग, छात्र राजद ने दी आंदोलन की चेतावनी

पूर्णिया यूनिवर्सिटी के PHD सीटों में कटौती का मामला:यूजीसी नियमों के मुताबिक सीट बढ़ाने की मांग, छात्र राजद ने दी आंदोलन की चेतावनी

पूर्णिया विश्वविद्यालय में पीएचडी सत्र 2025 के लिए अधिसूचना जारी हुई। इसमें कुछ प्रमुख विषयों में शून्य सीट दर्शाए जाने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ आलोक राज और छात्र राजद के जिलाध्यक्ष मोहम्मद बिस्मिल ने इस मुद्दे को लेकर कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह से मुलाकात कर कड़ी आपत्ति जताई और सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। मोहम्मद बिस्मिल ने कहा कि राजनीति विज्ञान, जूलॉजी और कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों में पीएचडी के लिए शून्य सीट दिखाया जाना छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों में योग्य प्रोफेसर और शोध मार्गदर्शक मौजूद हैं, फिर भी सीट नहीं देना समझ से परे है। इससे शोध करने के इच्छुक विद्यार्थियों को भारी नुकसान होगा। फैसले को वापस लेने की मांग की कुलपति से अनुरोध किया कि उपलब्ध संसाधनों और यूजीसी के नियमों के अनुसार सीटों का पुनर्मूल्यांकन कर संशोधित सूची जारी की जाए। बिस्मिल ने कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय क्षेत्र के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में शोध की सीटों को शून्य करना शैक्षणिक विकास पर असर डालेगा। कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह से मुलाकात कर इस फैसले को वापस लेने की मांग की। विश्वविद्यालय प्रशासन का ये निर्णय सैकड़ों छात्रों के सपनों पर पानी फेरने जैसा है। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार सीटों की समीक्षा करे और योग्य छात्रों के लिए पर्याप्त अवसर तय करें। छात्र राजद का कहना है कि शोध की सीटों में कमी से क्षेत्र के शैक्षणिक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए मामले की समीक्षा करने और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। आश्वस्त किया कि मामले की जांच कर उचित निर्णय लिया जाएगा। छात्र राजद ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। पूर्णिया विश्वविद्यालय में पीएचडी सत्र 2025 के लिए अधिसूचना जारी हुई। इसमें कुछ प्रमुख विषयों में शून्य सीट दर्शाए जाने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ आलोक राज और छात्र राजद के जिलाध्यक्ष मोहम्मद बिस्मिल ने इस मुद्दे को लेकर कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह से मुलाकात कर कड़ी आपत्ति जताई और सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। मोहम्मद बिस्मिल ने कहा कि राजनीति विज्ञान, जूलॉजी और कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों में पीएचडी के लिए शून्य सीट दिखाया जाना छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों में योग्य प्रोफेसर और शोध मार्गदर्शक मौजूद हैं, फिर भी सीट नहीं देना समझ से परे है। इससे शोध करने के इच्छुक विद्यार्थियों को भारी नुकसान होगा। फैसले को वापस लेने की मांग की कुलपति से अनुरोध किया कि उपलब्ध संसाधनों और यूजीसी के नियमों के अनुसार सीटों का पुनर्मूल्यांकन कर संशोधित सूची जारी की जाए। बिस्मिल ने कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय क्षेत्र के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में शोध की सीटों को शून्य करना शैक्षणिक विकास पर असर डालेगा। कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह से मुलाकात कर इस फैसले को वापस लेने की मांग की। विश्वविद्यालय प्रशासन का ये निर्णय सैकड़ों छात्रों के सपनों पर पानी फेरने जैसा है। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार सीटों की समीक्षा करे और योग्य छात्रों के लिए पर्याप्त अवसर तय करें। छात्र राजद का कहना है कि शोध की सीटों में कमी से क्षेत्र के शैक्षणिक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए मामले की समीक्षा करने और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। आश्वस्त किया कि मामले की जांच कर उचित निर्णय लिया जाएगा। छात्र राजद ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।  

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