हाईवे किनारे अवैध कब्जों पर 15 दिन में हो कार्रवाई-हाईकोर्ट:नेशनल हाईवे पर अवैध निर्माण और धर्मकांटों पर चलेगा बुलडोजर

हाईवे किनारे अवैध कब्जों पर 15 दिन में हो कार्रवाई-हाईकोर्ट:नेशनल हाईवे पर अवैध निर्माण और धर्मकांटों पर चलेगा बुलडोजर

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने नेशनल हाईवे और राजकीय राजमार्गों पर होने वाले अवैध अतिक्रमण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी को आदेश दिया है कि हाईवे की सीमा में आने वाले सभी अवैध ढाबों, धर्मकांटों और निर्माणों को तुरंत हटाया जाए। कोर्ट ने इसे सड़क सुरक्षा और आम जनजीवन के लिए गंभीर खतरा माना है। क्या है मामला: ‘सड़क सुरक्षा और अवैध व्यापार’ जोधपुर के चौखा सुलिया बेरा निवासी हिम्मत सिंह गहलोत द्वारा दायर जनहित याचिका में बताया गया कि जोधपुर-बाड़मेर हाईवे सहित राज्य के विभिन्न राजमार्गों पर भू-माफिया और व्यापारियों ने नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण कर लिए हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि हाईवे किनारे बिना अनुमति के संचालित अवैध धर्मकांटों और ढाबों के कारण भारी वाहन अनियंत्रित तरीके से सड़क पर खड़े रहते हैं, जिससे घातक दुर्घटनाएं हो रही हैं। अनगिनत अवैध कट और रास्ते, कोर्ट की फटकार सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवेज (लैंड एंड ट्रैफिक) एक्ट के तहत बिना ‘एक्सेस परमिशन’ के कोई भी निर्माण नहीं किया जा सकता, फिर भी सैकड़ों की संख्या में अवैध कट और रास्ते बना लिए गए हैं। वहीं, सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर बिश्नोई और एनएचएआई के वकीलों ने स्वीकार किया कि कई स्थानों पर अतिक्रमण की समस्या है। कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, हाईवे की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। अधिकारियों की ढिलाई के कारण ही ये अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं। हाईकोर्ट के 5 कड़े निर्देश खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित अंतरिम निर्देश जारी किए हैं: 15 दिन में सर्वे और बेदखली: एनएचएआई और सार्वजनिक निर्माण विभाग अगले 15 दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले हाईवे का संयुक्त सर्वे करेंगे और बिना वैध अनुमति के चल रहे सभी ढाबों और धर्मकांटों को बेदखल करेंगे। अवैध कट होंगे बंद: हाईवे पर सुरक्षा मानकों के विपरीत बनाए गए सभी अनधिकृत ‘कट्स’ और प्रवेश द्वारों को तुरंत स्थाई रूप से बंद किया जाएगा। पुलिस सुरक्षा का प्रावधान: अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान संबंधित जिला कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर/अधीक्षक आवश्यक बल उपलब्ध कराएंगे ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। एनओसी की समीक्षा: जिन स्थानों पर उल्लंघन पाया जाएगा, वहां जारी की गई किसी भी प्रकार की एनओसी को 15 दिनों के भीतर निलंबित कर दिया जाएगा। जवाबदेही तय: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश की पालना न होने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। भविष्य की योजना: ‘सेफ्टी ऑडिट’ और नए नियम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत जल्द से जल्द नियम बनाए जाएं ताकि भविष्य में सड़क किनारे होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सके। साथ ही, एनएचएआई को नियमित ‘हाईवे सेफ्टी ऑडिट’ करने और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा गया है। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च तय की है, जिसमें सरकार को की गई कार्रवाई की ‘स्टेटस रिपोर्ट’ और अनुपालन शपथ पत्र दाखिल करना होगा।

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