बदलेगा राजस्थान का जल भविष्य, अनास नदी की बड़ी परियोजना से इन 7 जिलों को मिलेगी राहत

डूंगरपुर। राजस्थान सरकार वागड़ क्षेत्र से राज्य का दूसरा बड़ा वॉटर ट्रांसफर प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। झाबुआ से निकलने वाली अनास नदी का पानी अब तक गलियाकोट के पास माही नदी में मिलकर गुजरात चला जाता था। सरकार ने अब इस बहते पानी को रोककर राजस्थान के जल-संकटग्रस्त जिलों तक पहुंचाने का प्लान तैयार किया है।

7 जिलों की प्यास बुझाएगी एक नदी

इस परियोजना के तहत डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूम्बर, प्रतापगढ़, उदयपुर, पाली और जालोर जैसे पानी की किल्लत से जूझ रहे जिलों को सीधा फायदा मिलेगा। लगभग 500 MCM पानी को माही नदी में जाने से रोका जाएगा और इसे लिफ्ट, नहर तथा पाइपलाइन के जरिए आगे पहुंचाया जाएगा। यह पानी सोमकमला बांध, जयसमंद लिफ्ट, मातृकुंडिया होते हुए जवाई बांध तक पहुंचेगा।

20,000 करोड़ का बजट, 5 चरणों में होगा काम

ERCP के बाद यह राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी जल योजना मानी जा रही है। परियोजना की कुल लागत 15 से 20 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। पहले चरण में 100 करोड़ DPR और सर्वे के लिए तय किए गए हैं। सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे के बाद डूंगरपुर-बांसवाड़ा क्षेत्र में बड़े जल भंडारण टैंक बनाए जाएंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट में राज्य और केंद्र सरकार मिलकर काम करेंगी।

2 करोड़ लोगों की बदलेगी जिंदगी

इस परियोजना से दक्षिण और पश्चिम राजस्थान के सूखा प्रभावित इलाकों में पेयजल संकट काफी हद तक कम होगा। किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा जिससे कृषि उत्पादन में सीधी बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि इस योजना से लगभग 2 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। वागड़ से शुरू होने वाला यह प्रोजेक्ट राजस्थान के जल भविष्य की दिशा बदल सकता है।

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