कटनी में गुरुवार को बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने एकत्र हुईं और अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका फेडरेशन के बैनर तले हुए इस धरने में महिलाओं ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने विभागीय दबाव और तकनीकी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाई। पोषण ट्रैकर और FRS पर जताई आपत्ति महिलाओं ने पोषण ट्रैकर ऐप और हाल ही में लागू किए गए फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का विरोध किया। ज्ञापन में कहा गया कि टेक होम राशन वितरण के लिए चेहरा पहचान और ओटीपी आधारित सत्यापन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति से मेल नहीं खाता। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई गांवों और आदिवासी इलाकों में इंटरनेट की सुविधा ठीक नहीं है और अधिकांश हितग्राहियों के पास महंगे स्मार्टफोन नहीं हैं। ऐसे में तकनीक फेल होने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। नौकरी से हटाने की धमकी देने का आरोप प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी बजट रुकने के डर से उन पर दबाव बना रहे हैं। FRS सत्यापन न होने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग द्वारा दिए गए मोबाइल फोन ठीक से काम नहीं करते, जिससे उन्हें अपने निजी फोन का उपयोग करना पड़ रहा है। इंटरनेट खर्च के लिए मिलने वाली सालाना 2000 रुपए की राशि भी पर्याप्त नहीं है। राशन से नाम हटाने पर सवाल ज्ञापन में कहा गया कि आधार या चेहरा सत्यापन न होने पर हितग्राहियों का नाम राशन सूची से हटाना कानून के खिलाफ है। कई गरीब परिवारों के पास मोबाइल नहीं हैं या वे काम के लिए बाहर रहते हैं, जिससे ओटीपी मिलना संभव नहीं हो पाता। कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस व्यवस्था के कारण उन्हें आम लोगों के गुस्से और नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।


