किशनगंज में गुरुवार को विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। इस हड़ताल के कारण जिले में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं, जिससे लगभग 200 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। बैंक यूनियनों ने नए लेबर कोड की वापसी, बैंकों को मजबूती प्रदान करने और पांच दिवसीय कार्य सप्ताह (फाइव डे वर्किंग वीक) सहित अन्य मांगों को लेकर यह आह्वान किया था। एसबीआई के कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए, जिसके कारण एसबीआई की शाखाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। हालांकि, शहर में एसबीआई को छोड़कर 20 से अधिक अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं हैं। इन सभी शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहा, जिससे ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और आरटीजीएस/एनईएफटी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुईं। हड़ताली बैंक कर्मचारियों ने शहर के भगत टोली रोड पर स्थित एक बैंक शाखा के सामने धरना प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए। इसके बाद वे गांधी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का तर्क था कि छह दिवसीय कार्य सप्ताह और लगातार बढ़ते कार्यभार से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने नए लेबर कोड को श्रमिक विरोधी बताते हुए कहा कि यह यूनियनों की आवाज दबाने और नौकरी की सुरक्षा कम करने का प्रयास है। नकदी निकालने और आवश्यक बैंकिंग कार्यों में ग्राहक हुए परेशान जिले में दैनिक बैंकिंग कारोबार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। अनुमान के मुताबिक, इस एक दिवसीय हड़ताल से 200 करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय प्रभावित हुआ। नकदी निकालने या अन्य आवश्यक बैंकिंग कार्यों के लिए ग्राहक परेशान दिखे। कई लोगों ने डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया, लेकिन शाखा स्तर पर सेवाएं बंद होने से व्यापारियों और आम जनता को विशेष रूप से कठिनाई हुई। यह हड़ताल देशव्यापी स्तर पर विभिन्न बैंक यूनियनों, जैसे AIBEA, AIBOA और BEFI, के आह्वान पर की गई थी। इन यूनियनों ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों का विरोध किया है। किशनगंज में भी एसबीआई को छोड़कर इस हड़ताल का व्यापक असर देखा गया। बैंक कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे भविष्य में आंदोलन को और तेज करेंगे। किशनगंज में गुरुवार को विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। इस हड़ताल के कारण जिले में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं, जिससे लगभग 200 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। बैंक यूनियनों ने नए लेबर कोड की वापसी, बैंकों को मजबूती प्रदान करने और पांच दिवसीय कार्य सप्ताह (फाइव डे वर्किंग वीक) सहित अन्य मांगों को लेकर यह आह्वान किया था। एसबीआई के कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए, जिसके कारण एसबीआई की शाखाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। हालांकि, शहर में एसबीआई को छोड़कर 20 से अधिक अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं हैं। इन सभी शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहा, जिससे ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और आरटीजीएस/एनईएफटी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुईं। हड़ताली बैंक कर्मचारियों ने शहर के भगत टोली रोड पर स्थित एक बैंक शाखा के सामने धरना प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए। इसके बाद वे गांधी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का तर्क था कि छह दिवसीय कार्य सप्ताह और लगातार बढ़ते कार्यभार से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने नए लेबर कोड को श्रमिक विरोधी बताते हुए कहा कि यह यूनियनों की आवाज दबाने और नौकरी की सुरक्षा कम करने का प्रयास है। नकदी निकालने और आवश्यक बैंकिंग कार्यों में ग्राहक हुए परेशान जिले में दैनिक बैंकिंग कारोबार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। अनुमान के मुताबिक, इस एक दिवसीय हड़ताल से 200 करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय प्रभावित हुआ। नकदी निकालने या अन्य आवश्यक बैंकिंग कार्यों के लिए ग्राहक परेशान दिखे। कई लोगों ने डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया, लेकिन शाखा स्तर पर सेवाएं बंद होने से व्यापारियों और आम जनता को विशेष रूप से कठिनाई हुई। यह हड़ताल देशव्यापी स्तर पर विभिन्न बैंक यूनियनों, जैसे AIBEA, AIBOA और BEFI, के आह्वान पर की गई थी। इन यूनियनों ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों का विरोध किया है। किशनगंज में भी एसबीआई को छोड़कर इस हड़ताल का व्यापक असर देखा गया। बैंक कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे भविष्य में आंदोलन को और तेज करेंगे।


