मुजफ्फरपुर में आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देशव्यापी आम हड़ताल का मिलाजुला असर देखा गया। सैकड़ों रसोइया, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सफाई कर्मचारी और भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों ने सरकार की नीतियों और श्रम कोड के विरोध में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में चार लेबर कोड रद्द कर 29 लेबर कोड बहाल करना, आउटसोर्सिंग, ठेका और संविदा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रतिमाह करना, पुरानी पेंशन योजना लागू करना और सरकारी विभागों में स्थायी बहाली शामिल थीं। उन्होंने मनरेगा को फिर से लागू करने, बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई रोकने, नई बीज विधेयक 2025 और बिजली संशोधन विधेयक 2025 रद्द करने की भी मांग की। स्कूल से एक जुलूस निकाला केंद्रीय ट्रेड यूनियन ऑल इंडिया यूटीयूसी (एआईयूटीयूसी) के बैनर तले मानिकपुर स्थित मध्य विद्यालय से एक जुलूस निकाला गया। यह जुलूस मोतीपुर चौक होते हुए बीआरसी पर समाप्त हुआ, जहाँ प्रदर्शन किया गया। जुलूस का नेतृत्व भवन निर्माण यूनियन नेता, बिहार विद्यालय रसोइया यूनियन की जिलाध्यक्ष मोहर्रम खातून, उपाध्यक्ष रंजीत कुमार राय, सुनीता सिंह, हरदेव सिंह और सुधा देवी सहित अन्य नेताओं ने किया।
सभी कार्यालयों के आंशिक बंद के बाद कांटी प्रखंड गेट पर एक सभा आयोजित की गई। सभा को संबोधित करते हुए बिहार विद्यालय रसोइया यूनियन के जिला उपाध्यक्ष रंजीत राय ने कहा कि केंद्र सरकार ने तमाम विरोध के बावजूद पूंजीपतियों के हित में गैर-लोकतांत्रिक तरीके से चार मजदूर विरोधी श्रम कोड लागू किए हैं।
कहा गया कि मनरेगा को खत्म कर मजदूरों के काम के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश की सुविधा सहित तमाम मूलभूत अधिकारों को सरकार खत्म कर रही है। इन तमाम सवालों के खिलाफ हम सभी वर्करों को जात और धर्म से ऊपर उठकर मजदूर के अधिकारों को बचाने के लिए आंदोलन में शामिल होते हुए एक ताकतवर मजदूर आंदोलन निर्मित करने के लिए आगे आने की जरूरत है, तभी हम सरकार के इस मजदूर विरोधी कदम को शक्ति के साथ रोक सकते हैं। अंत में उन्होंने बंद के समर्थन करने वाले सभी सार्वजनिक उपकरणों में कार्यरत मजदूरों को धन्यवाद दिया और फिर आगे लड़ाई तेज करने के लिए अपील किया। मुजफ्फरपुर में आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देशव्यापी आम हड़ताल का मिलाजुला असर देखा गया। सैकड़ों रसोइया, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सफाई कर्मचारी और भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों ने सरकार की नीतियों और श्रम कोड के विरोध में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में चार लेबर कोड रद्द कर 29 लेबर कोड बहाल करना, आउटसोर्सिंग, ठेका और संविदा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रतिमाह करना, पुरानी पेंशन योजना लागू करना और सरकारी विभागों में स्थायी बहाली शामिल थीं। उन्होंने मनरेगा को फिर से लागू करने, बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई रोकने, नई बीज विधेयक 2025 और बिजली संशोधन विधेयक 2025 रद्द करने की भी मांग की। स्कूल से एक जुलूस निकाला केंद्रीय ट्रेड यूनियन ऑल इंडिया यूटीयूसी (एआईयूटीयूसी) के बैनर तले मानिकपुर स्थित मध्य विद्यालय से एक जुलूस निकाला गया। यह जुलूस मोतीपुर चौक होते हुए बीआरसी पर समाप्त हुआ, जहाँ प्रदर्शन किया गया। जुलूस का नेतृत्व भवन निर्माण यूनियन नेता, बिहार विद्यालय रसोइया यूनियन की जिलाध्यक्ष मोहर्रम खातून, उपाध्यक्ष रंजीत कुमार राय, सुनीता सिंह, हरदेव सिंह और सुधा देवी सहित अन्य नेताओं ने किया।
सभी कार्यालयों के आंशिक बंद के बाद कांटी प्रखंड गेट पर एक सभा आयोजित की गई। सभा को संबोधित करते हुए बिहार विद्यालय रसोइया यूनियन के जिला उपाध्यक्ष रंजीत राय ने कहा कि केंद्र सरकार ने तमाम विरोध के बावजूद पूंजीपतियों के हित में गैर-लोकतांत्रिक तरीके से चार मजदूर विरोधी श्रम कोड लागू किए हैं।
कहा गया कि मनरेगा को खत्म कर मजदूरों के काम के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश की सुविधा सहित तमाम मूलभूत अधिकारों को सरकार खत्म कर रही है। इन तमाम सवालों के खिलाफ हम सभी वर्करों को जात और धर्म से ऊपर उठकर मजदूर के अधिकारों को बचाने के लिए आंदोलन में शामिल होते हुए एक ताकतवर मजदूर आंदोलन निर्मित करने के लिए आगे आने की जरूरत है, तभी हम सरकार के इस मजदूर विरोधी कदम को शक्ति के साथ रोक सकते हैं। अंत में उन्होंने बंद के समर्थन करने वाले सभी सार्वजनिक उपकरणों में कार्यरत मजदूरों को धन्यवाद दिया और फिर आगे लड़ाई तेज करने के लिए अपील किया।


