‘न तो उचित मानदेय, न ही स्थायी दर्जा’:जमुई सदर अस्पताल परिसर में आशा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन,कहा-वेतन भुगतान हो

‘न तो उचित मानदेय, न ही स्थायी दर्जा’:जमुई सदर अस्पताल परिसर में आशा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन,कहा-वेतन भुगतान हो

जमुई में आशा कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। वे पिछले आठ माह से लंबित प्रोत्साहन राशि और मानदेय के भुगतान की मांग कर रही थीं। कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पिछले 8 महीनों से प्रोत्साहन राशि और मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। इसके अतिरिक्त, लगभग 18 वर्षों से लगातार सेवा देने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है और न ही उनके कार्य के अनुरूप वेतन दिया जा रहा है। धरना प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ता ललिता कुमारी ने बताया कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। कोविड-19, फाइलेरिया उन्मूलन, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य जैसी योजनाओं में उनसे लगातार काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें न तो उचित मानदेय मिलता है और न ही स्थायी दर्जा। आशा कार्यकर्ता प्रमिला देवी और सुशीला देवी ने आरोप लगाया कि आठ माह से वेतन नहीं मिलने के बावजूद जब वे अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाती हैं, तो उन्हें अधिकारियों द्वारा धमकी दी जाती है। इसी के विरोध में उन्होंने एक दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया। आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगे भी आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से शीघ्र हस्तक्षेप कर बकाया भुगतान और अन्य मांगों को पूरा करने की अपील की। इस धरना प्रदर्शन के कारण सदर अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए कार्य प्रभावित हुआ, हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं। जमुई में आशा कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। वे पिछले आठ माह से लंबित प्रोत्साहन राशि और मानदेय के भुगतान की मांग कर रही थीं। कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पिछले 8 महीनों से प्रोत्साहन राशि और मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। इसके अतिरिक्त, लगभग 18 वर्षों से लगातार सेवा देने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है और न ही उनके कार्य के अनुरूप वेतन दिया जा रहा है। धरना प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ता ललिता कुमारी ने बताया कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। कोविड-19, फाइलेरिया उन्मूलन, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य जैसी योजनाओं में उनसे लगातार काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें न तो उचित मानदेय मिलता है और न ही स्थायी दर्जा। आशा कार्यकर्ता प्रमिला देवी और सुशीला देवी ने आरोप लगाया कि आठ माह से वेतन नहीं मिलने के बावजूद जब वे अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाती हैं, तो उन्हें अधिकारियों द्वारा धमकी दी जाती है। इसी के विरोध में उन्होंने एक दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया। आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगे भी आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से शीघ्र हस्तक्षेप कर बकाया भुगतान और अन्य मांगों को पूरा करने की अपील की। इस धरना प्रदर्शन के कारण सदर अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए कार्य प्रभावित हुआ, हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं।  

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