मुसलमानों की गर्दन पर छूरी…’वंदे मातरम्’ के नए गाइडलाइन को लेकर केंद्र पर भड़कें AIMIM नेता

मुसलमानों की गर्दन पर छूरी…’वंदे मातरम्’ के नए गाइडलाइन को लेकर केंद्र पर भड़कें AIMIM नेता

Vande Mataram: केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी की गई नई गाइडलाइन पर एआईएमआईएम दिल्ली के अध्यक्ष शोएब जमई ने विरोध जताया है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मुसलमानों की गर्दन पर छुरी रखकर वंदे मातरम नहीं कहलवा सकते।

पीटीआई से बातचीत में दिल्ली एआईएमआईएम के अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और उसे तानाशाही व दमनकारी रवैये का प्रतीक बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर संविधान में कहीं यह कहां लिखा है कि ‘वंदे मातरम्’ संवैधानिक अनिवार्यता है। उनके मुताबिक, न तो यह संविधान का हिस्सा है और न ही इसे राष्ट्रगान का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान का सम्मान सभी करते हैं और उस पर कोई विवाद नहीं है। वहीं ‘वंदे मातरम्’ को लेकर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी कई मुस्लिम विद्वान और उलेमा अपनी राय रख चुके हैं। उनका कहना है कि इन विद्वानों ने इसे इस्लाम के एकेश्वरवाद की मान्यता और धार्मिक सिद्धांतों के विपरीत बताया है, इसलिए इसे थोपना उचित नहीं है।

आर्टिकल 15, 21, 25 का जिक्र

केंद्र पर भड़कें औवेसी के नेता जमई ने संविधान के अनुच्छेद 15, 21 और 25 का हवाला दिया और कहा कि किसी भी नागरिक पर इस तरह की बाध्यता थोपना धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है। उनका कहना था कि वह पहले भी साफ कर चुके हैं कि मुसलमानों पर दबाव बनाकर या डर का माहौल पैदा कर उनसे ‘वंदे मातरम्’ कहलवाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ने इस मुद्दे को राजनीतिक प्रचार का जरिया बना लिया है और इसे मुसलमानों के खिलाफ एक औजार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है। साथ ही केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर मोदी सरकार खुद को इतनी ही देशभक्त मानती है, तो उसे उन ताकतों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए जो भारत के हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं, न कि देश के भीतर धार्मिक आधार पर समाज को बांटने की कोशिश करनी चाहिए।

‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई गाइडलाइन

केंद्र सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके प्रस्तुतीकरण को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। गाइडलाइन के अनुसार, जब किसी समारोह में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन या वादन किया जाएगा। इसके साथ ही गीत के सभी छह छंदों को पूरे सम्मान के साथ प्रस्तुत करने की बात कही गई है। यह निर्देश सरकारी कार्यक्रमों, राष्ट्रीय आयोजनों और औपचारिक अवसरों पर लागू होंगे, ताकि ‘वंदे मातरम्’ के प्रस्तुतीकरण में एकरूपता और मर्यादा बनी रहे।

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