पूर्णिया में बंद के समर्थन में ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन:4 लेबर कोड के विरोध में सड़क पर उतरे मजदूर-बैंककर्मी; सरकार के खिलाफ नारेबाजी की

पूर्णिया में बंद के समर्थन में ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन:4 लेबर कोड के विरोध में सड़क पर उतरे मजदूर-बैंककर्मी; सरकार के खिलाफ नारेबाजी की

पूर्णिया में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर बुलाए गए राष्ट्रव्यापी भारत बंद का असर दिखाई दिया। 4 नए श्रम कोड के विरोध में विभिन्न मजदूर संगठनों, बैंक कर्मचारियों और ऑटो-टोटो चालकों ने शहर में प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ट्रेड यूनियन से जुड़े कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। आर एन शॉ चौकचौक तक रैली निकाली गई, जहां सभा कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। बिहार स्टेट ऑटो टोटो चालक संघ की पूर्णिया इकाई ने भी बंद का समर्थन किया। संघ के सदस्यों ने नगर निगम, जिला परिषद और नगर परिषद क्षेत्र में कथित अवैध टैक्स वसूली का विरोध किया। साथ ही शहर में स्थायी टेम्पो स्टैंड निर्माण की मांग उठाई। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे राजीव सिंह ने कहा कि बिना आधारभूत सुविधा दिए उनसे मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है। वाम दलों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन से आयोजित इस बंद में विभिन्न सेक्टर के मजदूरों ने भाग लिया। आलोक कुमार ने कहा कि देश का मेहनतकश वर्ग बेलगाम निजीकरण, कॉरपोरेटपरस्त नीतियों और श्रमिक विरोधी लेबर कोड से परेशान है। उन्होंने सम्मानजनक रोजगार, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग की। दावा किया कि देशभर में करोड़ों श्रमिक इस हड़ताल में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन (AIBEA), AIBOA और BEFI के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हुए। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक समेत कई बैंकों में कामकाज प्रभावित रहा। कई शाखाओं पर हड़ताल के समर्थन में बैनर लगाए गए। बैंकिंग सेवाएं ठप रहने से ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कहा गया कि 44 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर बनाए गए 4 लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं और इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे। उन्होंने कहा कि यूनियन बनाने, हड़ताल करने, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसे अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है। पूर्णिया में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर बुलाए गए राष्ट्रव्यापी भारत बंद का असर दिखाई दिया। 4 नए श्रम कोड के विरोध में विभिन्न मजदूर संगठनों, बैंक कर्मचारियों और ऑटो-टोटो चालकों ने शहर में प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ट्रेड यूनियन से जुड़े कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। आर एन शॉ चौकचौक तक रैली निकाली गई, जहां सभा कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। बिहार स्टेट ऑटो टोटो चालक संघ की पूर्णिया इकाई ने भी बंद का समर्थन किया। संघ के सदस्यों ने नगर निगम, जिला परिषद और नगर परिषद क्षेत्र में कथित अवैध टैक्स वसूली का विरोध किया। साथ ही शहर में स्थायी टेम्पो स्टैंड निर्माण की मांग उठाई। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे राजीव सिंह ने कहा कि बिना आधारभूत सुविधा दिए उनसे मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है। वाम दलों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन से आयोजित इस बंद में विभिन्न सेक्टर के मजदूरों ने भाग लिया। आलोक कुमार ने कहा कि देश का मेहनतकश वर्ग बेलगाम निजीकरण, कॉरपोरेटपरस्त नीतियों और श्रमिक विरोधी लेबर कोड से परेशान है। उन्होंने सम्मानजनक रोजगार, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग की। दावा किया कि देशभर में करोड़ों श्रमिक इस हड़ताल में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन (AIBEA), AIBOA और BEFI के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हुए। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक समेत कई बैंकों में कामकाज प्रभावित रहा। कई शाखाओं पर हड़ताल के समर्थन में बैनर लगाए गए। बैंकिंग सेवाएं ठप रहने से ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कहा गया कि 44 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर बनाए गए 4 लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं और इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे। उन्होंने कहा कि यूनियन बनाने, हड़ताल करने, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसे अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है।  

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