गोपालगंज का युवक दुबई जेल में बंद:आर्थिक तंगी-कर्ज चुकाने और पक्का घर बनाने का था सपना, डेढ़ साल से फजीरा जेल में कैद

गोपालगंज का युवक दुबई जेल में बंद:आर्थिक तंगी-कर्ज चुकाने और पक्का घर बनाने का था सपना, डेढ़ साल से फजीरा जेल में कैद

गोपालगंज के सदर प्रखंड अंतर्गत हजियापुर वार्ड संख्या-8 निवासी स्व. शिवबालक ठाकुर के पुत्र रितेश ठाकुर बेहतर भविष्य की तलाश में ढाई वर्ष पहले दुबई गए थे। परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने, कर्ज चुकाने और पक्का घर बनाने का सपना लेकर विदेश गए रितेश आज डेढ़ साल से दुबई की फुजैरा जेल में बंद हैं। इधर उनके घर में पत्नी और वृद्ध मां का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी पुनीता देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पति की वतन वापसी की गुहार लगाई है। दो मासूम बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए गए विदेश रितेश ठाकुर गांव में सैलून चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने वर्ष 2023 में टूरिस्ट वीजा पर दुबई जाने का फैसला किया। उनका उद्देश्य अधिक कमाई कर परिवार पर चढ़ा कर्ज उतारना और अपनी दो मासूम बेटियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना था। परिजनों के अनुसार, दुबई पहुंचने के बाद करीब एक साल तक रितेश ने काम किया और घर पैसे भी भेजे। इसी बीच वह कथित रूप से दलालों के संपर्क में आ गए। बताया जाता है कि टूरिस्ट वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह वहीं रह गए, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अनजान नंबर से फोनकर दी जेल में बंद होने की जानकारी परिवार का आरोप है कि करीब डेढ़ साल पहले रितेश का फोन अचानक बंद हो गया और उनसे संपर्क टूट गया। एजेंट से संपर्क करने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। लगभग दो वर्षों तक परिवार अनिश्चितता में रहा। कुछ महीने पहले एक अनजान नंबर से फोन आया, जिसमें रितेश ने खुद को दुबई की फुजैरा जेल में बंद होने की जानकारी दी और छुड़ाने की गुहार लगाई। रितेश जुलाई 2023 में पासपोर्ट और वीजा के साथ गए थे दुबई रितेश की पत्नी पुनीता देवी ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर मदद की मांग की है। उन्होंने बताया कि उनके पति जुलाई 2023 में पासपोर्ट और वीजा के साथ रोजी-रोटी के सिलसिले में दुबई गए थे। एक वर्ष तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन बाद में संपर्क पूरी तरह टूट गया। पुनीता देवी का कहना है कि “मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। घर चलाने वाला कोई नहीं है। भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। मेरे पति ही पूरे परिवार का सहारा हैं। उन्हें छुड़ाने के लिए हम दर-दर भटक रहे हैं।” रिहाई और सुरक्षित भारत वापसी की मांग परिवार ने राज्य और केंद्र सरकार से अपील की है कि विदेश मंत्रालय के माध्यम से आवश्यक कानूनी सहायता दिलाकर रितेश ठाकुर की रिहाई और सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित की जाए। जिस युवक ने सात समंदर पार जाकर परिवार की तकदीर बदलने का सपना देखा था, आज वही सलाखों के पीछे है और उसका परिवार उसकी वापसी की आस में हर दरवाजा खटखटा रहा है। गोपालगंज के सदर प्रखंड अंतर्गत हजियापुर वार्ड संख्या-8 निवासी स्व. शिवबालक ठाकुर के पुत्र रितेश ठाकुर बेहतर भविष्य की तलाश में ढाई वर्ष पहले दुबई गए थे। परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने, कर्ज चुकाने और पक्का घर बनाने का सपना लेकर विदेश गए रितेश आज डेढ़ साल से दुबई की फुजैरा जेल में बंद हैं। इधर उनके घर में पत्नी और वृद्ध मां का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी पुनीता देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पति की वतन वापसी की गुहार लगाई है। दो मासूम बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए गए विदेश रितेश ठाकुर गांव में सैलून चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने वर्ष 2023 में टूरिस्ट वीजा पर दुबई जाने का फैसला किया। उनका उद्देश्य अधिक कमाई कर परिवार पर चढ़ा कर्ज उतारना और अपनी दो मासूम बेटियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना था। परिजनों के अनुसार, दुबई पहुंचने के बाद करीब एक साल तक रितेश ने काम किया और घर पैसे भी भेजे। इसी बीच वह कथित रूप से दलालों के संपर्क में आ गए। बताया जाता है कि टूरिस्ट वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह वहीं रह गए, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अनजान नंबर से फोनकर दी जेल में बंद होने की जानकारी परिवार का आरोप है कि करीब डेढ़ साल पहले रितेश का फोन अचानक बंद हो गया और उनसे संपर्क टूट गया। एजेंट से संपर्क करने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। लगभग दो वर्षों तक परिवार अनिश्चितता में रहा। कुछ महीने पहले एक अनजान नंबर से फोन आया, जिसमें रितेश ने खुद को दुबई की फुजैरा जेल में बंद होने की जानकारी दी और छुड़ाने की गुहार लगाई। रितेश जुलाई 2023 में पासपोर्ट और वीजा के साथ गए थे दुबई रितेश की पत्नी पुनीता देवी ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर मदद की मांग की है। उन्होंने बताया कि उनके पति जुलाई 2023 में पासपोर्ट और वीजा के साथ रोजी-रोटी के सिलसिले में दुबई गए थे। एक वर्ष तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन बाद में संपर्क पूरी तरह टूट गया। पुनीता देवी का कहना है कि “मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। घर चलाने वाला कोई नहीं है। भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। मेरे पति ही पूरे परिवार का सहारा हैं। उन्हें छुड़ाने के लिए हम दर-दर भटक रहे हैं।” रिहाई और सुरक्षित भारत वापसी की मांग परिवार ने राज्य और केंद्र सरकार से अपील की है कि विदेश मंत्रालय के माध्यम से आवश्यक कानूनी सहायता दिलाकर रितेश ठाकुर की रिहाई और सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित की जाए। जिस युवक ने सात समंदर पार जाकर परिवार की तकदीर बदलने का सपना देखा था, आज वही सलाखों के पीछे है और उसका परिवार उसकी वापसी की आस में हर दरवाजा खटखटा रहा है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *