मुरादाबाद में विधायक और फैमिली का OBC प्रमाणपत्र कैंसिल:दादा जनरल कैटेगिरी में थे, सदन में स्वतंत्र देव सिंह ने कहा था बीवी की कसम खाओ

मुरादाबाद के डीएम अनुज सिंह ने बिलारी से सपा विधायक मोहम्मद फहीम और उनके परिवार के OBC प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। शिकायतों की जांच और सुनवाई के बाद डीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने यह फैसला लिया। समिति ने आदेश में कहा कि मोहम्मद फहीम इरफान का संबंध बिलारी तहसील के इब्राहीमपुर गांव में झोजा जाति (OBC) से स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ। इसलिए उन्हें झोजा जाति के तहत OBC का लाभ देना उचित नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि विधायक के दादा मोहम्मद इस्लाम लेखपाल थे और खुद को सामान्य वर्ग में दर्ज करते थे। पुराने रिकॉर्ड में यह भी पाया गया कि बिलारी क्षेत्र में झोजा नहीं, बल्कि तुर्क समुदाय के लोग रहते हैं, जो सामान्य श्रेणी में आते हैं। मोहम्मद फहीम वही विधायक हैं, जिन्होंने जल जीवन मिशन पर सवाल उठाए थे। उस दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने सदन में उनसे बीवी की कसम खाने को कहा था। 2015 में OBC सर्टिफिकेट पर जिला पंचायत चुनाव जीते थे फहीम मोहम्मद फहीम ने पहली बार OBC सर्टिफिकेट का इस्तेमाल 2015 के जिला पंचायत चुनाव में किया था। जिला पंचायत के वार्ड नंबर 37 पर उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव सपा के टिकट पर लड़ा था। उस समय ये सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थी। ऐसे में फहीम ने खुद के झोजा जाति में होने का दावा करते हुए ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाकर चुनाव में जमा किया था। उस समय फहीम के सामने भाजपा से लवली यादव ने चुनाव लड़ा था। लेकिन लवली यादव करीब 3000 वोटों से चुनाव हार गए थे। फहीम जिला पंचायत सदस्य बने थे। तभी से उनके ओबीसी सर्टिफिकेट को लेकर विवाद चला आ रहा है। लवली यादव ने फहीम के झोजा जाति से होने पर आपत्ति जताते हुए उनके ओबीसी प्रमाण पत्र को गलत बताया था। पिता की मौत के बाद फहीम विधायक बने कुंदरकी से अलग होकर 2012 में बिलारी नई विधानसभा सीट बनी थी। इस सीट पर फहीम के पिता हाजी मोहम्मद इरफान सपा के टिकट पर जीतकर विधायक बने थे। लेकिन 2016 में एक सड़क दुर्घटना में हाजी मोहम्मद इरफान की डेथ हो गई थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में मोहम्मद फहीम जीतकर पिता की जगह विधायक बन गए थे। विधायक बनने के बाद फहीम ने जिला पंचायत सदस्य से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वार्ड 37 पर हुए उपचुनाव में फहीम ने अपने छोटे भाई मोहम्मद हसन फैजी को मैदान में उतारा। लेकिन इस बार BJP के लवली यादव 4100 वोटों से यहां जीतकर जिला पंचायत सदस्य बने थे। 2020 में निरस्त हो गया था विधायक की चचेरी बहन का नामांकन 2020 में हुए जिला पंचायत चुनावों में परिसीमन के बाद वार्ड 37 का नाम वार्ड 27 हो चुका था। इस बार इस वार्ड से जिला पंचायत सदस्य पद के लिए भाजपा के लवली यादव ने अपनी मां गीता देवी को मैदान में उतारा।जबकि विधायक फैमिली से विधायक फहीम के चाचा हाजी मोहम्मद उस्मान ने अपने बेटी का नामांकन कराया था। आरक्षित सीट पर फरीन जहां ने खुद को झोजा बताकर ओबीसी सर्टिफिकेट लगाया। भाजपा उम्मीदवार ने उनके जाति प्रमाण पत्र को चुनौती दी थी। जिसके बाद चुनाव अधिकारी ने फरीन जहां के नामांकन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार गीता देवी जीत गई थीं। फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र मामले में 2022 में एक एफआईआर भी बिलारी थाने पर दर्ज कराई गई थी। विधायक फैमिली ने चुनाव शून्य घोषित करने की मांग की थी विधायक की चचेरी बहन का नामांकन रद्द होने के बाद विधायक के चाचा ने इसके खिलाफ मुरादाबाद कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने पूरे चुनाव को ही शून्य घोषित करके दोबारा से चुनाव कराए जाने की मांग की थी। कोर्ट में 2024 तक ये मामला चला। इसके बाद कोर्ट ने 2024 में इस आवेदन को खारिज कर दिया था। लवली यादव ने पिछड़ा वर्ग आयोग में की थी शिकायत भाजपा नेता लवली यादव ने दैनिक भास्कर से कहा- हमने 2024 में विधायक मोहम्मद फहीम और उनकी फैमिली के फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट के मामले की शिकायत पिछड़ा वर्ग आयोग में की थी। हमने इनके ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द करने का अनुरोध किया था। पिछड़ा आयोग की समिति ने मामले की जांच की। हमने साक्ष्यों के साथ तर्क प्रस्तुत किया कि झोजा जाति में विधायक एंड फैमिली के बीसी के प्रमाण पत्र अवैध हैं। इसके बाद जनपद स्तरीय समिति गठित की गई। बहस और तारीखें चलीं। अब जनपद स्तरीय समिति ने फैसला दिया कि प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए जाएं। ………….. ये खबर भी पढ़ें… लेम्बोर्गिनी कांड-अरबपति कारोबारी का बेटा गिरफ्तार: VIDEO बनाने पर भड़का; पिता की बचाने की कोशिशें नाकाम, नकली ड्राइवर तक पेश किया कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने वाला अरबपति कारोबारी का बेटा आखिरकार गिरफ्तार हो गया। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने बेटे को बचाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नाकाम रहीं। पहले घटनास्थल से बेटे को हटवाया, फिर कहा कि मेरा बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था। पुलिस को मैनेज करने की कोशिश की गई, लेकिन मामला सीएम योगी तक पहुंच गया। जब यह पैतरा एक्सपोज हो गया तो पुलिस कमिश्नर को ही झूठा करार दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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