Obesity Infection Risk: मोटापा सिर्फ दिल की बीमारी या डायबिटीज का कारण ही नहीं है, बल्कि अब यह संक्रमण से होने वाली मौतों का भी बड़ा कारण बनता जा रहा है। हाल ही में मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भारत में हर 1,000 संक्रामक रोग से होने वाली मौतों में से करीब 46 मौतें मोटापे से जुड़ी हो सकती हैं।
मोटापा बढ़ाता है संक्रमण का खतरा
इस बड़े अध्ययन में 5.4 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 30 या उससे ज्यादा है, यानी जो मोटापे से ग्रस्त हैं, उन्हें संक्रमण होने पर अस्पताल में भर्ती होने या मौत का खतरा सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में 70 प्रतिशत ज्यादा होता है। अगर मोटापा बहुत ज्यादा है, तो यह खतरा लगभग तीन गुना तक बढ़ सकता है।
किन बीमारियों में ज्यादा खतरा
शोध में पाया गया कि मोटापे का असर कई आम संक्रमणों को गंभीर बना देता है। इनमें फ्लू, कोविड-19, निमोनिया, पेट के संक्रमण (गैस्ट्रोएंटेराइटिस), यूरिन इंफेक्शन (UTI) और सांस से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं। हालांकि HIV और टीबी के मामलों में मोटापे का असर उतना स्पष्ट नहीं दिखा।
दुनिया भर में बढ़ती चिंता
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साल 2023 में दुनियाभर में संक्रमण से हुई लगभग 54 लाख मौतों में से करीब 6 लाख मौतों में मोटापा एक अहम कारण रहा। यानी हर 10 में से लगभग 1 मौत मोटापे से जुड़ी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे दुनिया में मोटापा बढ़ेगा, वैसे-वैसे संक्रमण से होने वाली गंभीर बीमारियां और मौतें भी बढ़ती जाएंगी।
भारत में क्या है स्थिति
भारत में भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। अनुमान के मुताबिक 2023 में संक्रमण से करीब 12 लाख मौतें हुईं, जिनमें लगभग 46,100 मौतें मोटापे से जुड़ी थीं। यानी कुल मौतों का करीब 3.8 प्रतिशत हिस्सा मोटापे से प्रभावित था। सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। करीब 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय सामान्य मोटापे से पीड़ित हैं, जो कुल आबादी का लगभग 29 प्रतिशत है। वहीं पेट के आसपास जमा चर्बी यानी एब्डॉमिनल मोटापा तो और भी ज्यादा लोगों में पाया जा रहा है। करीब 35 करोड़ से ज्यादा लोगों में।
क्यों खतरनाक है मोटापा
मोटापा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है और सूजन (inflammation) बढ़ाता है। इससे शरीर संक्रमण से लड़ने में कमजोर पड़ जाता है और बीमारी ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है।


