Mutual Funds Investment: तेजी से बदलती आर्थिक दुनिया में हर निवेशक जानना चाहता है कि छोटी रकम से बड़ा फंड कैसे बनाया जाए। अधिकतर लोग सोचते हैं कि करोड़ों का फंड बनाने के लिए बहुत बड़ी शुरुआत जरूरी है। लेकिन यदि सिर्फ 13 लाख रुपये से निवेश किया जाए, तो इसे 12 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जा सकता है। आज के दौर का सबसे आसान तरीका म्यूचुअल फंड या एसआईपी हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे इस बड़े लक्ष्य को पाया जा सकता है।
म्यूचुअल फंड में निवेश
मान लीजिए आपका पैसा हर साल 12 प्रतिशत बढ़ता है। यानी 100 रुपये एक साल बाद 112 रुपये हो जाते हैं। अगले साल 112 पर फिर 12 प्रतिशत बढ़ेगा। यह कंपाउंडिंग कहलाता है, जहां ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। यदि निवेश एसआईपी में किया जाए तो इसे आसान किस्तों से पूरा किया जा सकता है, लेकिन वहीं, एक मुश्त निवेश करने से ब्याज अधिक मिलता है और फंड में ज्यादा बढ़त मिल सकती है। यह कंपाउंडिंग से मुमकिन हो पाता है। चलिए इसका पूरा गणित समझते हैं।
10 साल का निवेश
यदि 13 लाख रुपये 12 प्रतिशत की दर से 10 साल के लिए म्यूचुअल फंड्स में निवेश किए जाएं, तो कुल 40,37,603 रुपये का फंड तैयार किया जा सकता है। इसमें कुल 27,37,603 रुपये का मुनाफा होगा।
20 साल का निवेश
अगर 13 लाख रुपये निवेश किए जाएं और ब्याज दर 12 प्रतिशत हो, और समय 20 साल रखा जाए, तो कुल 1,25,40,181 रुपये का फंड तैयार किया जा सकता है। इसमें कुल 1,12,40,181 रुपये का मुनाफा होगा।
30 साल का निवेश
यदि 13 लाख रुपये 12 प्रतिशत की दर से 30 साल के लिए म्यूचुअल फंड्स में निवेश किए जाएं, तो कुल 3,89,47,899 रुपये का फंड तैयार किया जा सकता है। इसमें कुल 3,76,47,899 रुपये का मुनाफा होगा।
40 साल का निवेश
यदि 13 लाख रुपये 12 प्रतिशत की दर से 40 साल के लिए म्यूचुअल फंड्स में निवेश किए जाएं, तो कुल 12,09,66,262 रुपये का फंड तैयार किया जा सकता है। इसमें कुल 11,96,66,262 रुपये का मुनाफा होगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शुरुआती 20 साल में ग्रोथ धीमी लगती है, लेकिन अंतिम 10 साल में उछाल बेहद तेज हो जाता है।
क्यों तेजी से बढ़ता है पैसा?
30 साल में जहां रकम लगभग 4 करोड़ के आसपास होती है, वहीं सिर्फ अगले 10 साल में यह सीधे 12 करोड़ तक पहुंच जाती है। यानी आखिरी दशक में करीब 8 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होती है। यही कंपाउंडिंग का असली असर है। इस उदाहरण में कुल निवेश सिर्फ 13 लाख है, जबकि अंतिम रकम 12 करोड़ के आसपास है। यानी लगभग पूरी ग्रोथ रिटर्न से आती है। हालांकि 12 प्रतिशत रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहता है।
निवेशकों के लिए यह संदेश साफ है कि लंबी अवधि, धैर्य और सही एसेट क्लास का चुनाव वेल्थ क्रिएशन की कुंजी है। जितना लंबा समय, उतनी बड़ी ग्रोथ की संभावना। ध्यान देने वाली बात है कि निवेश करने से पहले सलाहकार से पूरी राय और जानकारी ले लेनी चाहिए, जिससे जोखिम को कम से कम किया जा सके।


