मधेपुरा में चार लेबर कोड के खिलाफ प्रदर्शन:भारतीय स्टेट बैंक के सामने सरकार के खिलाफ नारेबाजी; किसानों-मजदूरों की आवाज को दबाने का प्रयास

मधेपुरा में चार लेबर कोड के खिलाफ प्रदर्शन:भारतीय स्टेट बैंक के सामने सरकार के खिलाफ नारेबाजी; किसानों-मजदूरों की आवाज को दबाने का प्रयास

मधेपुरा में गुरुवार को देशव्यापी भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मजदूरों और कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस क्रम में मधेपुरा शहर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में लाल झंडे और मांगों से संबंधित तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व एक्टू सहित देश के 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न सेवा संघों और फेडरेशनों ने किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग चार लेबर कोड को रद्द करने की रही। उनका कहना था कि ये श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं। इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं। लेबर कोड लागू होने से काम के घंटे बढ़ेंगे यूनियनों ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड लागू होने से काम के घंटे बढ़ेंगे, नौकरी की सुरक्षा खत्म होगी और संगठित क्षेत्र के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का भी शोषण बढ़ेगा। भारत बंद के कारण जिले में बैंकिंग, बीमा, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य, गैस और जलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि प्रशासन की ओर से आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के प्रयास किए गए। बैंकिंग क्षेत्र में आंशिक असर देखा गया, जहां कुछ स्थानों पर कामकाज प्रभावित रहा। प्रदर्शन में वाम दलों के कार्यकर्ता, अखिल भारतीय किसान सभा, भाकपा माले समेत अन्य संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने सभा को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। मजदूरों-किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और मजदूरों-किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने के लिए श्रमिक कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, जिसका देशभर में विरोध हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान गणेश मानव, रामचंद्र दास, मो. वसीमुद्दीन उर्फ नन्हें समेत कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि जब तक मजदूरों और किसानों की मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। मधेपुरा में गुरुवार को देशव्यापी भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मजदूरों और कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस क्रम में मधेपुरा शहर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में लाल झंडे और मांगों से संबंधित तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व एक्टू सहित देश के 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न सेवा संघों और फेडरेशनों ने किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग चार लेबर कोड को रद्द करने की रही। उनका कहना था कि ये श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं। इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं। लेबर कोड लागू होने से काम के घंटे बढ़ेंगे यूनियनों ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड लागू होने से काम के घंटे बढ़ेंगे, नौकरी की सुरक्षा खत्म होगी और संगठित क्षेत्र के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का भी शोषण बढ़ेगा। भारत बंद के कारण जिले में बैंकिंग, बीमा, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य, गैस और जलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि प्रशासन की ओर से आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के प्रयास किए गए। बैंकिंग क्षेत्र में आंशिक असर देखा गया, जहां कुछ स्थानों पर कामकाज प्रभावित रहा। प्रदर्शन में वाम दलों के कार्यकर्ता, अखिल भारतीय किसान सभा, भाकपा माले समेत अन्य संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने सभा को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। मजदूरों-किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और मजदूरों-किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने के लिए श्रमिक कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, जिसका देशभर में विरोध हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान गणेश मानव, रामचंद्र दास, मो. वसीमुद्दीन उर्फ नन्हें समेत कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि जब तक मजदूरों और किसानों की मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।  

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