अररिया जिले के बांसबाड़ी पंचायत अंतर्गत गरगद्दी गांव के रहनेवाले 35 वर्षीय अजय कुमार ऋषिदेव की हरियाणा के अम्बाला कैंट में हत्या कर दी गई। उनका शव 9 फरवरी को पानी से भरे एक गड्ढे में मिला था। बुधवार की रात शव अररिया पहुंचने पर परिजनों में शोक व्याप्त हो गया। अजय कुमार ऋषिदेव लाल चंद ऋषिदेव के पुत्र थे और दिल्ली-हरियाणा क्षेत्र में मजदूरी करते थे। वह दो महीने पहले अररिया से हरियाणा गए थे और अम्बाला के पास कोशिश बीयर फैक्ट्री में कार्यरत थे। वे छज्जू माजरा इलाके में किराए के कमरे में रहते थे। लापता होने के 15 दिन बाद मिला शव वह 26 जनवरी को अपने कमरे से लापता हो गए थे। साथी मजदूरों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। 9 फरवरी को पटवी थाना क्षेत्र में पानी से भरे एक गड्ढे में उनका शव बरामद हुआ। साथी मजदूरों ने शव को नरेनगढ़ अस्पताल पहुंचाया, जिसके बाद अस्पताल कर्मियों ने पटवी थाना पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शव को अम्बाला सिविल अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शव साथी मजदूरों को सौंप दिया गया, जिन्होंने इसे ट्रेन से अररिया पहुंचाया। आरोपियों के गिरफ्तारी की मांग कर रहे परिजन मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। उनके अनुसार, अजय मजदूरी के अलावा कोई अन्य काम नहीं करते थे और उनकी किसी से कोई पुरानी दुश्मनी भी नहीं थी। परिवार ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वे न्याय और आर्थिक सहायता की भी उम्मीद कर रहे हैं। यह घटना बिहार से बाहर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। अररिया जिले से बड़ी संख्या में लोग हरियाणा, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में मजदूरी के लिए जाते हैं। अररिया जिले के बांसबाड़ी पंचायत अंतर्गत गरगद्दी गांव के रहनेवाले 35 वर्षीय अजय कुमार ऋषिदेव की हरियाणा के अम्बाला कैंट में हत्या कर दी गई। उनका शव 9 फरवरी को पानी से भरे एक गड्ढे में मिला था। बुधवार की रात शव अररिया पहुंचने पर परिजनों में शोक व्याप्त हो गया। अजय कुमार ऋषिदेव लाल चंद ऋषिदेव के पुत्र थे और दिल्ली-हरियाणा क्षेत्र में मजदूरी करते थे। वह दो महीने पहले अररिया से हरियाणा गए थे और अम्बाला के पास कोशिश बीयर फैक्ट्री में कार्यरत थे। वे छज्जू माजरा इलाके में किराए के कमरे में रहते थे। लापता होने के 15 दिन बाद मिला शव वह 26 जनवरी को अपने कमरे से लापता हो गए थे। साथी मजदूरों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। 9 फरवरी को पटवी थाना क्षेत्र में पानी से भरे एक गड्ढे में उनका शव बरामद हुआ। साथी मजदूरों ने शव को नरेनगढ़ अस्पताल पहुंचाया, जिसके बाद अस्पताल कर्मियों ने पटवी थाना पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शव को अम्बाला सिविल अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शव साथी मजदूरों को सौंप दिया गया, जिन्होंने इसे ट्रेन से अररिया पहुंचाया। आरोपियों के गिरफ्तारी की मांग कर रहे परिजन मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। उनके अनुसार, अजय मजदूरी के अलावा कोई अन्य काम नहीं करते थे और उनकी किसी से कोई पुरानी दुश्मनी भी नहीं थी। परिवार ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वे न्याय और आर्थिक सहायता की भी उम्मीद कर रहे हैं। यह घटना बिहार से बाहर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। अररिया जिले से बड़ी संख्या में लोग हरियाणा, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में मजदूरी के लिए जाते हैं।


