नालंदा जिले के सैकड़ों निजी स्कूल गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने से कतरा रहे हैं। जिले के 801 पंजीकृत निजी विद्यालयों में से 336 स्कूलों ने आरटीई पोर्टल पर अपनी नामांकन क्षमता तक अपलोड नहीं की है। जो स्पष्ट रूप से इन संस्थानों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। कानून का खुला उल्लंघन शिक्षा के अधिकार के तहत प्रत्येक निजी विद्यालय को अपनी कुल क्षमता का 25 प्रतिशत सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। यह प्रावधान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज में शैक्षणिक समानता स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन जिले के 336 स्कूल इस संवैधानिक प्रावधान को दरकिनार कर रहे हैं। समग्र शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) मोहम्मद शाहनवाज ने बताया कि ज्ञानदीप पोर्टल पर पहली कक्षा में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन तमाम स्कूलों के प्राचार्यों ने अपनी नामांकन क्षमता (इंटेक कैपेसिटी) ही पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। विभाग की सख्ती: 24 घंटे का अल्टीमेटम मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीओ ने संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर निर्धारित समय में नामांकन क्षमता पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई, तो स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यह कदम निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या इससे पहले विभाग ने पर्याप्त सतर्कता बरती। क्या केवल धमकी देने से स्कूलों की मानसिकता बदल जाएगी। बार-बार की अनदेखी की गई डीपीओ की ओर से प्राचार्यों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नामांकन क्षमता अपलोड करने के लिए मोबाइल समेत कई माध्यमों से बार-बार सूचित किया गया है। लेकिन इसके बावजूद स्कूल प्रशासन ने विभागीय आदेश की अनदेखी की है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नामांकन क्षमता अपलोड न करना आपकी मनमानी और विभागीय आदेश की अवहेलना है। साथ ही, यह दर्शाता है कि आप कमजोर और वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को अपने विद्यालय में नामांकन देने को इच्छुक नहीं हैं, जो मान्यता के पूर्व निर्धारित मानदंडों की अवहेलना है। नालंदा जिले के सैकड़ों निजी स्कूल गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने से कतरा रहे हैं। जिले के 801 पंजीकृत निजी विद्यालयों में से 336 स्कूलों ने आरटीई पोर्टल पर अपनी नामांकन क्षमता तक अपलोड नहीं की है। जो स्पष्ट रूप से इन संस्थानों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। कानून का खुला उल्लंघन शिक्षा के अधिकार के तहत प्रत्येक निजी विद्यालय को अपनी कुल क्षमता का 25 प्रतिशत सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। यह प्रावधान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज में शैक्षणिक समानता स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन जिले के 336 स्कूल इस संवैधानिक प्रावधान को दरकिनार कर रहे हैं। समग्र शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) मोहम्मद शाहनवाज ने बताया कि ज्ञानदीप पोर्टल पर पहली कक्षा में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन तमाम स्कूलों के प्राचार्यों ने अपनी नामांकन क्षमता (इंटेक कैपेसिटी) ही पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। विभाग की सख्ती: 24 घंटे का अल्टीमेटम मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीओ ने संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर निर्धारित समय में नामांकन क्षमता पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई, तो स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यह कदम निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या इससे पहले विभाग ने पर्याप्त सतर्कता बरती। क्या केवल धमकी देने से स्कूलों की मानसिकता बदल जाएगी। बार-बार की अनदेखी की गई डीपीओ की ओर से प्राचार्यों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नामांकन क्षमता अपलोड करने के लिए मोबाइल समेत कई माध्यमों से बार-बार सूचित किया गया है। लेकिन इसके बावजूद स्कूल प्रशासन ने विभागीय आदेश की अनदेखी की है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नामांकन क्षमता अपलोड न करना आपकी मनमानी और विभागीय आदेश की अवहेलना है। साथ ही, यह दर्शाता है कि आप कमजोर और वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को अपने विद्यालय में नामांकन देने को इच्छुक नहीं हैं, जो मान्यता के पूर्व निर्धारित मानदंडों की अवहेलना है।


