भीलवाड़ा को 125 करोड़ की ‘लॉजिस्टिक’ संजीवनी; सिंगल विंडो 2.0 से खत्म होगा फाइलों का सफर

भीलवाड़ा को 125 करोड़ की ‘लॉजिस्टिक’ संजीवनी; सिंगल विंडो 2.0 से खत्म होगा फाइलों का सफर

कान्याखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र की बदलती सूरत, टेक्सटाइल और सर्विस सेक्टर को रिप्स में मिली बड़ी राहत

वस्त्रनगरी भीलवाड़ा के औद्योगिक विकास को राज्य बजट में नई रफ्तार मिली है। टेक्सटाइल उद्यमियों की लंबे समय से चली आ रही लॉजिस्टिक्स और परिवहन की समस्या को दूर करते हुए सरकार ने कान्याखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए खजाना खोल दिया है। बजट घोषणा के अनुसार, यहां लॉजिस्टिक पार्क के पहुंच मार्ग और अन्य विकास कार्यों पर करीब 125 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।

सड़कों का जाल बिछने से अब उद्यमियों के लिए माल परिवहन सुगम होगा। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत सिंगल विंडो 2.0 और रिप्स में डिजिटलाइजेशन की घोषणा ने निवेशकों के चेहरे खिला दिए हैं।

अब ‘एक क्लिक’ पर सभी स्वीकृतियां: सिंगल विंडो 2.0

उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर लाल फीताशाही के खात्मे को लेकर है। बजट में सिंगल विंडो 2.0 प्लेटफॉर्म की घोषणा की गई है।

  • क्या होगा फायदा: अब निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने होंगे। ‘एक आवेदन और एक डिजिटल ट्रैक’ की व्यवस्था लागू होगी।
  • पारदर्शिता: सभी विभागीय स्वीकृतियां इसी एक प्लेटफॉर्म के जरिए मिलेंगी, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी नहीं होगी।
  • निर्यातकों को राहत: रिप्स का पैसा अब सीधे खाते में

औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए रिप्स योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहन की प्रक्रिया को अब पूर्णतः डिजिटल कर दिया गया है। इससे टेक्सटाइल निर्यातकों और निवेशकों को सब्सिडी और इंसेंटिव के लिए दफ्तरों में फाइलें नहीं धकेलनी पड़ेंगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और तेज होगी।

टेक्सटाइल को ‘बूस्टर डोज’: पेरोल सब्सिडी का नया अवतार

राज्य के पारंपरिक और सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले टेक्सटाइल उद्योग को नई ऊर्जा देने के लिए सरकार ने पेरोल सब्सिडी को नए रूप में पेश किया है। अब इसे ‘एसेट क्रिएशन इंसेंटिव’ के रूप में दिया जाएगा। इससे नई यूनिट्स लगाने वाले या विस्तार करने वाले उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खास बात यह है कि रिप्स-2024 में अब ब्याज अनुदान का दायरा बढ़ाकर इसमें सर्विस सेक्टर को भी शामिल कर लिया गया है।

विस्तार पर भी मिलेगी मार्जिन मनी

एक जिला एक उत्पाद पॉलिसी-2024 के तहत स्थानीय उद्योगों को वैश्विक पटल पर लाने की कवायद तेज की गई है। यह योजना 31 मार्च 2029 तक मान्य रहेगी। उद्यमियों को 6 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी। 15 लाख रुपए तक की सहायता। बजट में खास बात यह है कि विपणन और कच्चे माल की सुविधा के साथ-साथ, अब उद्योग के विस्तारीकरण के लिए ऋण लेने वाली इकाइयों को भी 10 प्रतिशत मार्जिन मनी के रूप में सहायता मिलेगी। इससे छोटी इकाइयों को बड़ा बनने का मौका मिलेगा।

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