जमीन के लिए परिवार के 5 लोगों की हत्या मामला:6 साल बाद आज मिलेगी सजा; बदमाश ने हाईकोर्ट का फर्जी बेल ऑर्डर भी तैयार किया था

जमीन के लिए परिवार के 5 लोगों की हत्या मामला:6 साल बाद आज मिलेगी सजा; बदमाश ने हाईकोर्ट का फर्जी बेल ऑर्डर भी तैयार किया था

बेगूसराय में हुए 3 लोगों के मर्डर मामले में आज कोर्ट का फैसला आने वाला है। महज कुछ जमीन के टुकड़े और जायदाद की हवस में एक शख्स ने परिवार के 5 लोगों की हत्या की थी। इसने अपने ही घर को श्मशान बना दिया था। बदमाश ने पहले अपने चाचा-चाची का मर्डर किया। फिर इस हत्या के गवाह भाई, भाभी और भतीजी को भी मार डाला। कोर्ट आज ट्रिपल मर्डर के मामले में फैसला सुनाने वाला है। जिले के सिंघौल के मचहा गांव में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में अदालत ने 6 साल बाद मुख्य आरोपी विकास कुमार को दोषी पाया है। करीब 6 साल पहले 27 अक्टूबर 2019 को पूरा देश दीपावली के दीयों से जगमगा रहा था। उसी दिन मचहा गांव में विकास कुमार के सिर पर खून सवार था। जमीन के लालच में उसने अपने ही सगे भाई कुणाल कुमार, भाभी कंचन देवी और मासूम भतीजी सोनम कुमारी की अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। गोली खत्म होने पर बची थी भतीजे की जान हत्यारा यहीं नहीं रुका, उसने अपने भतीजे शिवम कुमार के सीने में भी पिस्टल सटाकर दो बार ट्रिगर दबाया‌। लेकिन, किस्मत से गोली खत्म हो गई थी और शिवम वहां से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। इसी शिवम की गवाही आज इस केस में इंसाफ का सबसे बड़ा आधार बनने जा रही है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विकास कुमार को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 27 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया। बेऊर जेल से कल आरोपी को लाया गया बेगूसराय अदालत ने सजा के लिए बुधवार 11 फरवरी की तारीख निर्धारित की थी। लेकिन आरोपी विकास कुमार के बेऊर जेल से समय पर नहीं आने के कारण आज गुरुवार को सजा सुनाई जाएगी। इस मामले में अपर लोक अभियोजक रामप्रकाश यादव ने कोर्ट में आईओ, डॉक्टरों और चश्मदीदों की गवाही करवाकर इस क्रूरतम अपराध साबित किया है। विकास कुमार का अपराध का ग्राफ बेहद पुराना और डरावना है। बदमाश पर 5 मर्डर का आरोप पुलिस और अदालती दस्तावेजों के अनुसार सबसे पहले 18 नवंबर 2012 को विकास ने अपने चाचा अरुण कुमार सिंह की घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी थी। चाचा की हत्या में गवाह बनी अपनी चाची मणि देवी को उसने 2017 में उनके ही दरवाजे पर मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में कुणाल सिंह गवाह बने थे। चाचा-चाची की हत्या के बाद विकास का झगड़ा अपने भाई कुणाल से शुरू हुआ, क्योंकि कुणाल अपने चाचा के परिवार के प्रति सहानुभूति रखता था। अरुण कुमार सिंह को कोई बच्चा नहीं था और वे विकास के चरित्र से काफी गुस्से में रहते थे। जिसके कारण भतीजा कुणाल सिंह के साथ रहते थे। विकास को लगता था कि चाचा की संपत्ति भी हमारे भाई कुणाल सिंह की हो जाएगी, हमें कुछ नहीं मिलेगा। इसी खुन्नस में दीपावली की रात उसने ट्रिपल मर्डर की घटना को अंजाम दिया। हाईकोर्ट का एक फर्जी बेल ऑर्डर तैयार किया था विकास कुमार ने सिर्फ खून-खराबा ही नहीं किया, बल्कि न्यायपालिका की आंखों में धूल झोंकने की भी कोशिश की थी। 2013 में चाचा की हत्या के आरोप में वह जेल में था। जब हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी, तो उसने शातिर दिमाग का इस्तेमाल कर 17 अक्टूबर 2014 को हाईकोर्ट का एक फर्जी बेल ऑर्डर तैयार करवाया और जेल से बाहर निकल गया। इस फर्जीवाड़े की जानकारी हाईकोर्ट को मिली तो 29 अप्रैल 2015 को कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और मामले की CBI जांच के आदेश दिए। सीबीआई की जांच में फर्जीवाड़ा साबित सीबीआई की जांच में फर्जीवाड़ा साबित हुआ, लेकिन बाहर रहने के दौरान ही उसने 2017 और 2019 की हत्याओं को अंजाम दे डाला। 2019 में दिपावली की रात पिस्टल से 16 गोली चलाकर भाई, भाभी और भतीजी की हत्या करने के बाद विकास भागकर देवघर चला गया। लेकिन जांच कर रही पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर उसे देवघर से गिरफ्तार कर लिया। माता-पिता के हत्यारे के खिलाफ बेटे ने गवाही दी इस पूरे केस में इंसाफ की राह शिवम कुमार ने आसान की। शिवम ने अपनी आंखों के सामने अपने माता-पिता और बहन को मारते देखा था। उसने ही भागकर अपनी जान बचाई और बाद में देवघर से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में डटकर गवाही दी। शिवम के साथ उसके छोटे भाई सत्यम ने भी अदालत में अपनी बात मजबूती से रखी। 6 साल बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को कुछ हद तक मानसिक शांति दी है। बदमाश जब इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दे रहा था, उस समय कुणाल के दोनों बेटे शिवम और शुभम घर के बाहर पटाखे चला रहे थे। लगातार गोली की आवाज सुनकर दोनों घर के भीतर गए, तो उन्हें भी गोली मारने की कोशिश की गई। पटाखों के शोर के चलते पड़ोसियों को गोलियों की आवाज पता ही नहीं चली। वारदात की जानकारी उस समय हुई जब शिवम और शुभम ने शोर मचाया। लेकिन कोई भी लोग सामने नहीं आए। भाई-भाभी से पहले की थी चाचा-चाची की हत्या वरिष्ठ वकील अमरेंद्र कुमार अमर बताते हैं कि बेगूसराय शहर से सटे मचहा की तरफ जाती लोगों की भीड़ के बीच मैं भी उस खपरैल मकान में पहुंच गया। जहां कुणाल, उसकी पत्नी और बेटी बुझे दीपों के आगे क्रुर भाई के हाथों जीवन का दीप बुझा कर सोये थे। जमीन के लोभ में रिश्ते का कई खून हमने देखा था। लेकिन इसकी कहानी उनसे अलग और खौफनाक थी। विकास ने पहले जमीन के लिए चाचा की हत्या की। फिर गवाही देने कर सूचक चाची की हत्या की, उसके बाद चाची से नजदीकी सहानुभूति के कारण सगे भाई, भाभी, भतीजी की हत्या की। गोली खत्म होने के कारण भतीजा बच गया। उसी की गवाही पर कोर्ट ने सजा दिया है। घटना के बाद तात्कालीन काल एसपी अवकाश कुमार की टीम ने आरोपी विकास को देवघर से गिरफ्तार किया। उस समय मैं भी इस घटना को लेकर पुलिस के साथ सक्रिय और न्याय में उस बच्चे की मदद कर रहा था। बच्चे को बीजेपी नेता ने मुहैया कराई सुरक्षा वकील ने आगे कहा कि बच्चे की हत्या न हो जाए इसके लिए बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह के विकास विद्यालय में पढ़ाई और सुरक्षा गार्ड मुहैया कराया गया, जिससे उसकी सुरक्षित गवाही हो सके। आदमी जमीन जायदाद के लोभ में नरपिशाच भी हो सकता है, यह हमने पहली बार अपने आंखों से देखा। जब वह देवघर से गिरफ्तार होकर आया तो उसका चेहरा एसपी कार्यालय में सामान्य थे, उसे कोई पश्चाताप नहीं था। बेगूसराय में हुए 3 लोगों के मर्डर मामले में आज कोर्ट का फैसला आने वाला है। महज कुछ जमीन के टुकड़े और जायदाद की हवस में एक शख्स ने परिवार के 5 लोगों की हत्या की थी। इसने अपने ही घर को श्मशान बना दिया था। बदमाश ने पहले अपने चाचा-चाची का मर्डर किया। फिर इस हत्या के गवाह भाई, भाभी और भतीजी को भी मार डाला। कोर्ट आज ट्रिपल मर्डर के मामले में फैसला सुनाने वाला है। जिले के सिंघौल के मचहा गांव में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में अदालत ने 6 साल बाद मुख्य आरोपी विकास कुमार को दोषी पाया है। करीब 6 साल पहले 27 अक्टूबर 2019 को पूरा देश दीपावली के दीयों से जगमगा रहा था। उसी दिन मचहा गांव में विकास कुमार के सिर पर खून सवार था। जमीन के लालच में उसने अपने ही सगे भाई कुणाल कुमार, भाभी कंचन देवी और मासूम भतीजी सोनम कुमारी की अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। गोली खत्म होने पर बची थी भतीजे की जान हत्यारा यहीं नहीं रुका, उसने अपने भतीजे शिवम कुमार के सीने में भी पिस्टल सटाकर दो बार ट्रिगर दबाया‌। लेकिन, किस्मत से गोली खत्म हो गई थी और शिवम वहां से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। इसी शिवम की गवाही आज इस केस में इंसाफ का सबसे बड़ा आधार बनने जा रही है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विकास कुमार को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 27 आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया। बेऊर जेल से कल आरोपी को लाया गया बेगूसराय अदालत ने सजा के लिए बुधवार 11 फरवरी की तारीख निर्धारित की थी। लेकिन आरोपी विकास कुमार के बेऊर जेल से समय पर नहीं आने के कारण आज गुरुवार को सजा सुनाई जाएगी। इस मामले में अपर लोक अभियोजक रामप्रकाश यादव ने कोर्ट में आईओ, डॉक्टरों और चश्मदीदों की गवाही करवाकर इस क्रूरतम अपराध साबित किया है। विकास कुमार का अपराध का ग्राफ बेहद पुराना और डरावना है। बदमाश पर 5 मर्डर का आरोप पुलिस और अदालती दस्तावेजों के अनुसार सबसे पहले 18 नवंबर 2012 को विकास ने अपने चाचा अरुण कुमार सिंह की घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी थी। चाचा की हत्या में गवाह बनी अपनी चाची मणि देवी को उसने 2017 में उनके ही दरवाजे पर मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में कुणाल सिंह गवाह बने थे। चाचा-चाची की हत्या के बाद विकास का झगड़ा अपने भाई कुणाल से शुरू हुआ, क्योंकि कुणाल अपने चाचा के परिवार के प्रति सहानुभूति रखता था। अरुण कुमार सिंह को कोई बच्चा नहीं था और वे विकास के चरित्र से काफी गुस्से में रहते थे। जिसके कारण भतीजा कुणाल सिंह के साथ रहते थे। विकास को लगता था कि चाचा की संपत्ति भी हमारे भाई कुणाल सिंह की हो जाएगी, हमें कुछ नहीं मिलेगा। इसी खुन्नस में दीपावली की रात उसने ट्रिपल मर्डर की घटना को अंजाम दिया। हाईकोर्ट का एक फर्जी बेल ऑर्डर तैयार किया था विकास कुमार ने सिर्फ खून-खराबा ही नहीं किया, बल्कि न्यायपालिका की आंखों में धूल झोंकने की भी कोशिश की थी। 2013 में चाचा की हत्या के आरोप में वह जेल में था। जब हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी, तो उसने शातिर दिमाग का इस्तेमाल कर 17 अक्टूबर 2014 को हाईकोर्ट का एक फर्जी बेल ऑर्डर तैयार करवाया और जेल से बाहर निकल गया। इस फर्जीवाड़े की जानकारी हाईकोर्ट को मिली तो 29 अप्रैल 2015 को कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और मामले की CBI जांच के आदेश दिए। सीबीआई की जांच में फर्जीवाड़ा साबित सीबीआई की जांच में फर्जीवाड़ा साबित हुआ, लेकिन बाहर रहने के दौरान ही उसने 2017 और 2019 की हत्याओं को अंजाम दे डाला। 2019 में दिपावली की रात पिस्टल से 16 गोली चलाकर भाई, भाभी और भतीजी की हत्या करने के बाद विकास भागकर देवघर चला गया। लेकिन जांच कर रही पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर उसे देवघर से गिरफ्तार कर लिया। माता-पिता के हत्यारे के खिलाफ बेटे ने गवाही दी इस पूरे केस में इंसाफ की राह शिवम कुमार ने आसान की। शिवम ने अपनी आंखों के सामने अपने माता-पिता और बहन को मारते देखा था। उसने ही भागकर अपनी जान बचाई और बाद में देवघर से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में डटकर गवाही दी। शिवम के साथ उसके छोटे भाई सत्यम ने भी अदालत में अपनी बात मजबूती से रखी। 6 साल बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को कुछ हद तक मानसिक शांति दी है। बदमाश जब इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दे रहा था, उस समय कुणाल के दोनों बेटे शिवम और शुभम घर के बाहर पटाखे चला रहे थे। लगातार गोली की आवाज सुनकर दोनों घर के भीतर गए, तो उन्हें भी गोली मारने की कोशिश की गई। पटाखों के शोर के चलते पड़ोसियों को गोलियों की आवाज पता ही नहीं चली। वारदात की जानकारी उस समय हुई जब शिवम और शुभम ने शोर मचाया। लेकिन कोई भी लोग सामने नहीं आए। भाई-भाभी से पहले की थी चाचा-चाची की हत्या वरिष्ठ वकील अमरेंद्र कुमार अमर बताते हैं कि बेगूसराय शहर से सटे मचहा की तरफ जाती लोगों की भीड़ के बीच मैं भी उस खपरैल मकान में पहुंच गया। जहां कुणाल, उसकी पत्नी और बेटी बुझे दीपों के आगे क्रुर भाई के हाथों जीवन का दीप बुझा कर सोये थे। जमीन के लोभ में रिश्ते का कई खून हमने देखा था। लेकिन इसकी कहानी उनसे अलग और खौफनाक थी। विकास ने पहले जमीन के लिए चाचा की हत्या की। फिर गवाही देने कर सूचक चाची की हत्या की, उसके बाद चाची से नजदीकी सहानुभूति के कारण सगे भाई, भाभी, भतीजी की हत्या की। गोली खत्म होने के कारण भतीजा बच गया। उसी की गवाही पर कोर्ट ने सजा दिया है। घटना के बाद तात्कालीन काल एसपी अवकाश कुमार की टीम ने आरोपी विकास को देवघर से गिरफ्तार किया। उस समय मैं भी इस घटना को लेकर पुलिस के साथ सक्रिय और न्याय में उस बच्चे की मदद कर रहा था। बच्चे को बीजेपी नेता ने मुहैया कराई सुरक्षा वकील ने आगे कहा कि बच्चे की हत्या न हो जाए इसके लिए बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह के विकास विद्यालय में पढ़ाई और सुरक्षा गार्ड मुहैया कराया गया, जिससे उसकी सुरक्षित गवाही हो सके। आदमी जमीन जायदाद के लोभ में नरपिशाच भी हो सकता है, यह हमने पहली बार अपने आंखों से देखा। जब वह देवघर से गिरफ्तार होकर आया तो उसका चेहरा एसपी कार्यालय में सामान्य थे, उसे कोई पश्चाताप नहीं था।  

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