कोसी-सीमांचल के चर्चित बिल्डर और VIP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजीव मिश्रा के 12 ठिकानों पर पटना से आई IT की टीम ने रेड मारा। इसमें सुपौल के 5 ठिकानों पर 30 घंटे से लगातार छापा चल रहा है। वहीं, अररिया और पूर्णिया में 15 घंटे तक छापेमारी चली थी। पनोरमा ई-होम्स ग्रुप से जुड़े सभी ठिकानों पर बड़े अधिकारियों के नेतृत्व में करीब 150 सुरक्षा जवानों और 40 से 50 अधिकारी-कर्मियों की टीम ने छापेमारी की। इसके बाद दस्तावेजों की लंबी जांच शुरू कर दी। वहीं, बुधवार को अधिकारियों ने सुपौल में छापेमारी वाली जगहों पर कैश गिनने की मशीन भी मंगवाई थी। पनोरमा ग्रुप पर वास्तविक आमदनी छिपाकर इनकम टैक्स चोरी का आरोप लगा है। IT के अधिकारियों ने कंपनी में काम करने वाले स्टाफ के घर और किराए के कमरे पर भी छापेमारी की है। सभी से सख्ती से पूछताछ की गई है। जमीन से जुड़े कागजात, रियल एस्टेट बिजनेस के डॉक्यूमेंट, बैंक पासबुक, चेक और ऐसे ही कई अहम दस्तावेज आईटी के हाथ लगे हैं। सभी को बारीकी से खंगाला जा रहा है। तीनों जिले में पनोरमा ग्रुप के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। विभाग को बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी शक है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने संजीव मिश्रा के चाचा केदारनाथ मिश्रा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इस बातचीत में पहली बार संजीव मिश्रा के बचपन, पारिवारिक, शिक्षा, कारोबार और गांव से उनके टूटते रिश्ते से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अब जानते हैं कौन है संजीव मिश्रा? संजीव मिश्रा का जन्म 25 जून 1980 को सुपौल के छातापुर प्रखंड के रामपुर गांव में हुआ है। उनका पूरा बचपन इसी गांव की गलियों, खेतों और मिट्टी की खुशबू के बीच बीता है। प्राथमिक स्कूल से लेकर मैट्रिक तक की पढ़ाई उन्होंने यहीं की है। पढ़ाई में सामान्य होने के बावजूद उनकी सोच गांव के दूसरे बच्चों से अलग थी। संजीव शुरू से ही आगे बढ़ना चाहते थे। सिर्फ पढ़ाई नहीं, कुछ करके दिखाने की चाह उनमें बचपन से थी। संजीव बहुत ही सामान्य परिवार से आते थे, इस वजह से उन्हें अमीर बनना था। उनके पिता राधेश्याम मिश्रा लुधियाना में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। इसकी वजह से उनके घर की ज्यादा आमदनी नहीं थी। पिता के मार्गदर्शन में होता रहा फैसला मैट्रिक के बाद संजीव इंटर की पढ़ाई के लिए अररिया के फारबिसगंज कॉलेज गए। इसके बाद उन्होंने पूर्णिया कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इन्हीं दिनों वे अपने भविष्य को लेकर योजनाएं बनाने लगे। MBA करते हुए संजीव कुछ समय के लिए लुधियाना भी रहे, जहां उन्होंने व्यापार के तौर-तरीकों को नजदीक से समझा। परिवार के अनुसार, इसी दौरान उनके अंदर कारोबारी बनने की नींव मजबूती से पड़ी। संजीव ने 2002 में पूर्णिया में कंप्यूटर सेंटर खोला ग्रेजुएशन के बाद वे पूर्णिया लौटे और कंप्यूटर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट शुरू किया, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हुआ। इसे कुछ महीने में ही बंद करना पड़ा। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। MBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे दोबारा बिजनेस में उतरने के लिए तैयार थे। पटना, नोएडा और कोलकाता में कारोबार शुरू किया संजीव ने पटना में लालू यादव के परिवार के एक रिश्तेदार के साथ रियल एस्टेट का काम शुरू किया। लेकिन यहां उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसके बाद वे नोएडा चले गए। यहां प्रॉपर्टी डीलर के रूप में काम शुरू किया। इसी दौरान उसकी पहचान HDFC बैंक के एक अधिकारी से हुई। दोनों ने मिलकर ब्रोकर के रूप में काम किया। यह साझेदारी उनका पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। यहां से आर्थिक रूप से वे मजबूत होने लगे। नोएडा के बाद वे कोलकाता पहुंचे और रियल एस्टेट में निवेश शुरू किया। फ्लैट खरीदना, बेचना और निवेश बढ़ाना इन सबने उनके कारोबार को नई ऊंचाई दी। हालांकि, इसी दौरान उनके नाम के साथ पुलिस की छापेमारी और कुछ विवाद भी जुड़े। दिल्ली और यूपी पुलिस की टीम ने उनके पैतृक घर और ससुराल में कई बार पूछताछ और छापेमारी के लिए पहुंची। लेकिन वे कभी पुलिस के हाथ नहीं आए। HDFC बैंक नोएडा से जुड़े एक मामले में भी वे नामजद हुए, पर गिरफ्तारी नहीं हुई। कोलकाता से सुपौल लौटकर दूसरा बिजनेस शुरू किया कोलकाता के बाद संजीव मिश्रा ने सुपौल में व्यवसाय की नई शुरुआत की। उन्होंने हल्दीराम कंपनी के भुजिया कारोबार की फ्रेंचाइजी लेकर बाजार में दोबारा अपनी पहचान बनाई। इसके बाद संजीव ने शिक्षा क्षेत्र में पनोरमा पब्लिक स्कूल और स्वास्थ्य क्षेत्र में पनोरमा हॉस्पिटल की स्थापना की। हाल ही में उन्होंने छातापुर में बंधन रिजॉर्ट नाम से एक बड़े बैंक्वेट हॉल और होटल का शुभारंभ किया। सोमवार को इसी रिजॉर्ट का उद्घाटन हुआ था। रात में वे पनोरमा स्कूल परिसर में रुके थे। चाचा ने खोले पारिवारिक रिश्तों के सच संजीव के चाचा केदारनाथ मिश्र बताते हैं, अब उनका गांव से संबंध लगभग नाममात्र का रह गया है। न उनकी कोई निश्चित समय पर गांव आने की आदत है और न परिवार यहां रहता है। कभी रात में अचानक आ जाते हैं, थोड़ी देर रुकते हैं और निकल जाते हैं। गांववालों को भी बाद में पता चलता है कि संजीव आए थे। वे बताते हैं कि संजीव के पिता भी अलग रहते हैं। परिवार का कोई सदस्य अब रामपुर में नहीं रहता है। खुद केदारनाथ मिश्र भी संजीव के जन्म से पहले ही परिवार से अलग हो चुके थे। छातापुर में कार्यक्रम, सुबह पूर्णिया रवाना सोमवार को बंधन रिजॉर्ट के उद्घाटन के बाद संजीव मिश्रा ने रात छातापुर में बिताई। मंगलवार की अहले सुबह वे पूर्णिया रवाना हुए। गांव के लोग यह सोच ही रहे थे कि वे लौटेंगे या नहीं, तभी दोपहर तक खबर आई कि आयकर विभाग की टीमें उनके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी करने पहुंची है। इतना ही नहीं पूर्णिया में भी संजीव और उनके परिवार से पूछताछ की जा रही है। गेट बंद होने के कारण बाहर इंतजार करना पड़ा स्थानीय सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग की टीम अहले सुबह 3 बजे ही पनोरमा स्कूल और हॉस्पिटल के आसपास पहुंच गई थी, लेकिन गेट बंद होने के कारण टीम को बाहर ही इंतजार करना पड़ा था। सुबह करीब 6 बजे गेट खुलते ही अधिकारी काफिले के रूप में अंदर घुसे और तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। स्टाफ से मोबाइल छीनकर सुरक्षा घेरे में लिया गया अंदर प्रवेश करते ही अधिकारियों ने स्टाफ और मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए। इसके बाद सभी मुख्य गेट पर जवानों को तैनात कर दिया। स्कूल और हॉस्पिटल दोनों परिसरों में आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई। इस दौरान किसी स्थानीय व्यक्ति या गैर-कर्मचारी को परिसर के आसपास तक नहीं जाने दिया गया।हालांकि, बुधवार को अस्पताल और स्कूल दोनों ही पूरी तरह से संचालित रहा। हॉस्पिटल के एमडी बोले पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं पनोरमा हॉस्पिटल के एमडी अमित मिश्रा ने बताया, मंगलवार की सुबह 6:30 बजे स्टाफ ने जानकारी दी कि मेन गेट पर कुछ अधिकारी हैं। बाहर आया तो आयकर विभाग के कमिश्नर ने आईडी दिखाकर सर्च वारंट की बात कही। हम जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। आय-व्यय से जुड़े दस्तावेजों की जांच चल रही है। टीम में 40-50 अधिकारी और पुलिस बल शामिल हैं। फाइलों की गहन पड़ताल जारी सूत्रों के मुताबिक छापेमारी के दौरान पनोरमा ग्रुप से जुड़ी फाइलें, वित्तीय रिकॉर्ड, और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज को बारीकी से खंगाला जा रहा है। 2020 में लड़ चुके हैं विधानसभा चुनाव संजीव मिश्रा का सफर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहा। वे VIP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं। 2020 में उन्होंने जन अधिकार पार्टी (पप्पू यादव) के टिकट पर छातापुर से विधानसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि उनकी जमानत जब्त हो गई थी। इससे पहले वे राजद में भी सक्रिय थे। 2025 के चुनाव से पहले उन्होंने मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी ज्वाइन की, जहां उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। पार्टी उन्हें छातापुर विधानसभा सीट के लिए संभावित दावेदार मान रही थी, लेकिन अंतिम समय में यह सीट महागठबंधन में राजद कोटे में चली गई। इसके बावजूद वह क्षेत्र में सक्रिय रहे और महागठबंधन के प्रचार में जुटे दिखे। कोसी-सीमांचल के चर्चित बिल्डर और VIP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजीव मिश्रा के 12 ठिकानों पर पटना से आई IT की टीम ने रेड मारा। इसमें सुपौल के 5 ठिकानों पर 30 घंटे से लगातार छापा चल रहा है। वहीं, अररिया और पूर्णिया में 15 घंटे तक छापेमारी चली थी। पनोरमा ई-होम्स ग्रुप से जुड़े सभी ठिकानों पर बड़े अधिकारियों के नेतृत्व में करीब 150 सुरक्षा जवानों और 40 से 50 अधिकारी-कर्मियों की टीम ने छापेमारी की। इसके बाद दस्तावेजों की लंबी जांच शुरू कर दी। वहीं, बुधवार को अधिकारियों ने सुपौल में छापेमारी वाली जगहों पर कैश गिनने की मशीन भी मंगवाई थी। पनोरमा ग्रुप पर वास्तविक आमदनी छिपाकर इनकम टैक्स चोरी का आरोप लगा है। IT के अधिकारियों ने कंपनी में काम करने वाले स्टाफ के घर और किराए के कमरे पर भी छापेमारी की है। सभी से सख्ती से पूछताछ की गई है। जमीन से जुड़े कागजात, रियल एस्टेट बिजनेस के डॉक्यूमेंट, बैंक पासबुक, चेक और ऐसे ही कई अहम दस्तावेज आईटी के हाथ लगे हैं। सभी को बारीकी से खंगाला जा रहा है। तीनों जिले में पनोरमा ग्रुप के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। विभाग को बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी शक है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने संजीव मिश्रा के चाचा केदारनाथ मिश्रा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इस बातचीत में पहली बार संजीव मिश्रा के बचपन, पारिवारिक, शिक्षा, कारोबार और गांव से उनके टूटते रिश्ते से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अब जानते हैं कौन है संजीव मिश्रा? संजीव मिश्रा का जन्म 25 जून 1980 को सुपौल के छातापुर प्रखंड के रामपुर गांव में हुआ है। उनका पूरा बचपन इसी गांव की गलियों, खेतों और मिट्टी की खुशबू के बीच बीता है। प्राथमिक स्कूल से लेकर मैट्रिक तक की पढ़ाई उन्होंने यहीं की है। पढ़ाई में सामान्य होने के बावजूद उनकी सोच गांव के दूसरे बच्चों से अलग थी। संजीव शुरू से ही आगे बढ़ना चाहते थे। सिर्फ पढ़ाई नहीं, कुछ करके दिखाने की चाह उनमें बचपन से थी। संजीव बहुत ही सामान्य परिवार से आते थे, इस वजह से उन्हें अमीर बनना था। उनके पिता राधेश्याम मिश्रा लुधियाना में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। इसकी वजह से उनके घर की ज्यादा आमदनी नहीं थी। पिता के मार्गदर्शन में होता रहा फैसला मैट्रिक के बाद संजीव इंटर की पढ़ाई के लिए अररिया के फारबिसगंज कॉलेज गए। इसके बाद उन्होंने पूर्णिया कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इन्हीं दिनों वे अपने भविष्य को लेकर योजनाएं बनाने लगे। MBA करते हुए संजीव कुछ समय के लिए लुधियाना भी रहे, जहां उन्होंने व्यापार के तौर-तरीकों को नजदीक से समझा। परिवार के अनुसार, इसी दौरान उनके अंदर कारोबारी बनने की नींव मजबूती से पड़ी। संजीव ने 2002 में पूर्णिया में कंप्यूटर सेंटर खोला ग्रेजुएशन के बाद वे पूर्णिया लौटे और कंप्यूटर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट शुरू किया, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हुआ। इसे कुछ महीने में ही बंद करना पड़ा। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। MBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे दोबारा बिजनेस में उतरने के लिए तैयार थे। पटना, नोएडा और कोलकाता में कारोबार शुरू किया संजीव ने पटना में लालू यादव के परिवार के एक रिश्तेदार के साथ रियल एस्टेट का काम शुरू किया। लेकिन यहां उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। इसके बाद वे नोएडा चले गए। यहां प्रॉपर्टी डीलर के रूप में काम शुरू किया। इसी दौरान उसकी पहचान HDFC बैंक के एक अधिकारी से हुई। दोनों ने मिलकर ब्रोकर के रूप में काम किया। यह साझेदारी उनका पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। यहां से आर्थिक रूप से वे मजबूत होने लगे। नोएडा के बाद वे कोलकाता पहुंचे और रियल एस्टेट में निवेश शुरू किया। फ्लैट खरीदना, बेचना और निवेश बढ़ाना इन सबने उनके कारोबार को नई ऊंचाई दी। हालांकि, इसी दौरान उनके नाम के साथ पुलिस की छापेमारी और कुछ विवाद भी जुड़े। दिल्ली और यूपी पुलिस की टीम ने उनके पैतृक घर और ससुराल में कई बार पूछताछ और छापेमारी के लिए पहुंची। लेकिन वे कभी पुलिस के हाथ नहीं आए। HDFC बैंक नोएडा से जुड़े एक मामले में भी वे नामजद हुए, पर गिरफ्तारी नहीं हुई। कोलकाता से सुपौल लौटकर दूसरा बिजनेस शुरू किया कोलकाता के बाद संजीव मिश्रा ने सुपौल में व्यवसाय की नई शुरुआत की। उन्होंने हल्दीराम कंपनी के भुजिया कारोबार की फ्रेंचाइजी लेकर बाजार में दोबारा अपनी पहचान बनाई। इसके बाद संजीव ने शिक्षा क्षेत्र में पनोरमा पब्लिक स्कूल और स्वास्थ्य क्षेत्र में पनोरमा हॉस्पिटल की स्थापना की। हाल ही में उन्होंने छातापुर में बंधन रिजॉर्ट नाम से एक बड़े बैंक्वेट हॉल और होटल का शुभारंभ किया। सोमवार को इसी रिजॉर्ट का उद्घाटन हुआ था। रात में वे पनोरमा स्कूल परिसर में रुके थे। चाचा ने खोले पारिवारिक रिश्तों के सच संजीव के चाचा केदारनाथ मिश्र बताते हैं, अब उनका गांव से संबंध लगभग नाममात्र का रह गया है। न उनकी कोई निश्चित समय पर गांव आने की आदत है और न परिवार यहां रहता है। कभी रात में अचानक आ जाते हैं, थोड़ी देर रुकते हैं और निकल जाते हैं। गांववालों को भी बाद में पता चलता है कि संजीव आए थे। वे बताते हैं कि संजीव के पिता भी अलग रहते हैं। परिवार का कोई सदस्य अब रामपुर में नहीं रहता है। खुद केदारनाथ मिश्र भी संजीव के जन्म से पहले ही परिवार से अलग हो चुके थे। छातापुर में कार्यक्रम, सुबह पूर्णिया रवाना सोमवार को बंधन रिजॉर्ट के उद्घाटन के बाद संजीव मिश्रा ने रात छातापुर में बिताई। मंगलवार की अहले सुबह वे पूर्णिया रवाना हुए। गांव के लोग यह सोच ही रहे थे कि वे लौटेंगे या नहीं, तभी दोपहर तक खबर आई कि आयकर विभाग की टीमें उनके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी करने पहुंची है। इतना ही नहीं पूर्णिया में भी संजीव और उनके परिवार से पूछताछ की जा रही है। गेट बंद होने के कारण बाहर इंतजार करना पड़ा स्थानीय सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग की टीम अहले सुबह 3 बजे ही पनोरमा स्कूल और हॉस्पिटल के आसपास पहुंच गई थी, लेकिन गेट बंद होने के कारण टीम को बाहर ही इंतजार करना पड़ा था। सुबह करीब 6 बजे गेट खुलते ही अधिकारी काफिले के रूप में अंदर घुसे और तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। स्टाफ से मोबाइल छीनकर सुरक्षा घेरे में लिया गया अंदर प्रवेश करते ही अधिकारियों ने स्टाफ और मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए। इसके बाद सभी मुख्य गेट पर जवानों को तैनात कर दिया। स्कूल और हॉस्पिटल दोनों परिसरों में आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई। इस दौरान किसी स्थानीय व्यक्ति या गैर-कर्मचारी को परिसर के आसपास तक नहीं जाने दिया गया।हालांकि, बुधवार को अस्पताल और स्कूल दोनों ही पूरी तरह से संचालित रहा। हॉस्पिटल के एमडी बोले पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं पनोरमा हॉस्पिटल के एमडी अमित मिश्रा ने बताया, मंगलवार की सुबह 6:30 बजे स्टाफ ने जानकारी दी कि मेन गेट पर कुछ अधिकारी हैं। बाहर आया तो आयकर विभाग के कमिश्नर ने आईडी दिखाकर सर्च वारंट की बात कही। हम जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। आय-व्यय से जुड़े दस्तावेजों की जांच चल रही है। टीम में 40-50 अधिकारी और पुलिस बल शामिल हैं। फाइलों की गहन पड़ताल जारी सूत्रों के मुताबिक छापेमारी के दौरान पनोरमा ग्रुप से जुड़ी फाइलें, वित्तीय रिकॉर्ड, और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज को बारीकी से खंगाला जा रहा है। 2020 में लड़ चुके हैं विधानसभा चुनाव संजीव मिश्रा का सफर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहा। वे VIP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं। 2020 में उन्होंने जन अधिकार पार्टी (पप्पू यादव) के टिकट पर छातापुर से विधानसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि उनकी जमानत जब्त हो गई थी। इससे पहले वे राजद में भी सक्रिय थे। 2025 के चुनाव से पहले उन्होंने मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी ज्वाइन की, जहां उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। पार्टी उन्हें छातापुर विधानसभा सीट के लिए संभावित दावेदार मान रही थी, लेकिन अंतिम समय में यह सीट महागठबंधन में राजद कोटे में चली गई। इसके बावजूद वह क्षेत्र में सक्रिय रहे और महागठबंधन के प्रचार में जुटे दिखे।


