बांका में वसंतोत्सव का समापन:50 बच्चियों ने सीखी लोक कलाओं की बारीकियां,कल्पनाशीलता को मिला मंच

बांका में वसंतोत्सव का समापन:50 बच्चियों ने सीखी लोक कलाओं की बारीकियां,कल्पनाशीलता को मिला मंच

बांका टाउन हॉल के चंद्रशेखर सिंह भवन में बुधवार शाम वसंतोत्सव कार्यक्रम का समापन हुआ। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन बांका के संयुक्त तत्वावधान में यह तीन दिवसीय आयोजन किया गया था। इसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों से चयनित लगभग 50 बच्चियों ने चित्रकला कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बिहार की मंजूषा कला, मधुबनी चित्रकला और मूर्तिकला जैसी समृद्ध लोक एवं पारंपरिक कलाओं से परिचित कराया गया। विशेषज्ञ कलाकारों ने बच्चियों को इन कलाओं की तकनीक, रंग संयोजन, पारंपरिक शैली और उनके सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान बच्चियों ने स्वयं चित्र बनाकर और कलाकृतियां तैयार कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस रचनात्मक गतिविधि ने प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, सजगता और कला के प्रति रुचि को बढ़ावा दिया। कार्यशाला ने उन्हें अपनी कल्पनाशीलता को आकार देने और मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। समापन अवसर पर बांका के उप विकास आयुक्त ने कहा कि कला व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने बच्चियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। जिला कला संस्कृति पदाधिकारी ने बताया कि वसंतोत्सव जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। विभाग का उद्देश्य बच्चों में पारंपरिक एवं लोक कलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें रचनात्मक मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कलाकारों, शिक्षकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखने की बात कही। बांका टाउन हॉल के चंद्रशेखर सिंह भवन में बुधवार शाम वसंतोत्सव कार्यक्रम का समापन हुआ। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन बांका के संयुक्त तत्वावधान में यह तीन दिवसीय आयोजन किया गया था। इसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों से चयनित लगभग 50 बच्चियों ने चित्रकला कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बिहार की मंजूषा कला, मधुबनी चित्रकला और मूर्तिकला जैसी समृद्ध लोक एवं पारंपरिक कलाओं से परिचित कराया गया। विशेषज्ञ कलाकारों ने बच्चियों को इन कलाओं की तकनीक, रंग संयोजन, पारंपरिक शैली और उनके सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान बच्चियों ने स्वयं चित्र बनाकर और कलाकृतियां तैयार कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस रचनात्मक गतिविधि ने प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, सजगता और कला के प्रति रुचि को बढ़ावा दिया। कार्यशाला ने उन्हें अपनी कल्पनाशीलता को आकार देने और मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। समापन अवसर पर बांका के उप विकास आयुक्त ने कहा कि कला व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने बच्चियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। जिला कला संस्कृति पदाधिकारी ने बताया कि वसंतोत्सव जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। विभाग का उद्देश्य बच्चों में पारंपरिक एवं लोक कलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें रचनात्मक मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कलाकारों, शिक्षकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखने की बात कही।  

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