मधुबनी के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सुमन कुमार साह ने बुधवार को मीडिया को ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025’ (VB-G RAM G Act, 2025) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम मनरेगा योजना का स्थान लेगा और इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को अधिक सशक्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाना है। इस अधिनियम के तहत, प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की कानूनी गारंटी मिलेगी। इससे ग्रामीण आय सुरक्षा मजबूत होगी और पलायन में कमी आएगी। खेती के व्यस्त मौसम को देखते हुए, वर्ष में अधिकतम 60 दिनों का कार्य-विराम रखा जा सकेगा, जबकि शेष अवधि में रोजगार के दिन सुनिश्चित किए जाएंगे। डीडीसी ने बताया कि योजना में डिजिटल पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है। कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस आधारित निगरानी और एआई ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिनों के भीतर किया जाएगा, और निर्धारित समय में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी देय होगा। अधिनियम में व्यक्तिगत और सार्वजनिक कार्य शामिल योजना का वित्तीय प्रावधान केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10) निर्धारित किया गया है। अधिनियम में व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों प्रकार के कार्य शामिल हैं। व्यक्तिगत कार्यों में पौधरोपण, वर्मी-कम्पोस्ट, बायोगैस संयंत्र, पशुपालन शेड और निजी तालाब जैसे कार्य शामिल हैं। सार्वजनिक कार्यों में चेक डैम, खेल मैदान, आंगनबाड़ी केंद्र, जल निकासी योजना और ग्रामीण सड़कों का निर्माण शामिल होगा। मधुबनी जिले में, सभी नई योजनाओं की प्रविष्टि ‘युक्त धारा’ और नरेगा सॉफ्ट पोर्टल पर अनिवार्य रूप से करने तथा संचालित योजनाओं को 60 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। कार्यों का चयन ‘विकसित ग्राम पंचायत प्लान’ के अनुरूप करते हुए उन्हें पीएम गति-शक्ति पहल से एकीकृत किया जाएगा, जिससे टिकाऊ ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण सुनिश्चित हो सके। डीडीसी ने अंत में कहा कि यह अधिनियम ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मधुबनी के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सुमन कुमार साह ने बुधवार को मीडिया को ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025’ (VB-G RAM G Act, 2025) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम मनरेगा योजना का स्थान लेगा और इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को अधिक सशक्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाना है। इस अधिनियम के तहत, प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की कानूनी गारंटी मिलेगी। इससे ग्रामीण आय सुरक्षा मजबूत होगी और पलायन में कमी आएगी। खेती के व्यस्त मौसम को देखते हुए, वर्ष में अधिकतम 60 दिनों का कार्य-विराम रखा जा सकेगा, जबकि शेष अवधि में रोजगार के दिन सुनिश्चित किए जाएंगे। डीडीसी ने बताया कि योजना में डिजिटल पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है। कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस आधारित निगरानी और एआई ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिनों के भीतर किया जाएगा, और निर्धारित समय में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी देय होगा। अधिनियम में व्यक्तिगत और सार्वजनिक कार्य शामिल योजना का वित्तीय प्रावधान केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10) निर्धारित किया गया है। अधिनियम में व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों प्रकार के कार्य शामिल हैं। व्यक्तिगत कार्यों में पौधरोपण, वर्मी-कम्पोस्ट, बायोगैस संयंत्र, पशुपालन शेड और निजी तालाब जैसे कार्य शामिल हैं। सार्वजनिक कार्यों में चेक डैम, खेल मैदान, आंगनबाड़ी केंद्र, जल निकासी योजना और ग्रामीण सड़कों का निर्माण शामिल होगा। मधुबनी जिले में, सभी नई योजनाओं की प्रविष्टि ‘युक्त धारा’ और नरेगा सॉफ्ट पोर्टल पर अनिवार्य रूप से करने तथा संचालित योजनाओं को 60 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। कार्यों का चयन ‘विकसित ग्राम पंचायत प्लान’ के अनुरूप करते हुए उन्हें पीएम गति-शक्ति पहल से एकीकृत किया जाएगा, जिससे टिकाऊ ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण सुनिश्चित हो सके। डीडीसी ने अंत में कहा कि यह अधिनियम ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


