बक्सर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित अखिल भारतीय आम हड़ताल की तैयारियां तेज हो गई हैं। यह हड़ताल मजदूर विरोधी नीतियों और चार लेबर कोड्स के विरोध में बुलाई गई है। इसी क्रम में बुधवार को डुमरांव स्थित खेग्रामस कार्यालय प्रांगण में खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठन ने एक बैठक आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में श्रमिकों और किसान नेताओं ने भाग लिया। बैठक में कन्हैया पासवान, नारायण दास, शंकर तिवारी और भगवान दास जैसे श्रमिक नेता तथा किसान नेता रामदेव सिंह उपस्थित थे। नेताओं ने केंद्र सरकार पर मजदूरों के अधिकार छीनने और निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों को हड़ताल और संगठन बनाने के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। ”कोड्स से मजदूरों की कानूनी सुरक्षा कमजोर होगी” वक्ताओं ने बताया कि सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए लेबर कोड्स लागू किए हैं। उनका आरोप है कि इन कोड्स से मजदूरों की कानूनी सुरक्षा कमजोर होगी और उन्हें मालिकों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। नेताओं का दावा है कि ये श्रम कोड बड़ी संख्या में श्रमिकों को मजदूर की परिभाषा से बाहर कर उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर देंगे। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान श्रम कानून आजादी के आंदोलन और मजदूर संघर्षों की देन हैं। इन्हें खत्म करना संविधान और श्रमिक अधिकारों पर बड़ा हमला है। उन्होंने इस कदम को बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों के हित में उठाया गया बताया। बक्सर जिला मुख्यालय पर होने वाले प्रदर्शन में कई संगठन शामिल होंगे बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि बक्सर जिला मुख्यालय पर होने वाले प्रदर्शन में कई संगठन शामिल होंगे। इनमें भाकपा-माले, माकपा, भाकपा के नेता, पूर्व विधायक अजीत कुमार सिंह, विभिन्न मजदूर संगठन, स्कीम वर्कर्स, तथा शिक्षक और कर्मचारी महासंघ गोपगुट प्रमुख हैं। अंत में, नेताओं ने सभी मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता से 12 फरवरी की आम हड़ताल और प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। बक्सर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित अखिल भारतीय आम हड़ताल की तैयारियां तेज हो गई हैं। यह हड़ताल मजदूर विरोधी नीतियों और चार लेबर कोड्स के विरोध में बुलाई गई है। इसी क्रम में बुधवार को डुमरांव स्थित खेग्रामस कार्यालय प्रांगण में खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठन ने एक बैठक आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में श्रमिकों और किसान नेताओं ने भाग लिया। बैठक में कन्हैया पासवान, नारायण दास, शंकर तिवारी और भगवान दास जैसे श्रमिक नेता तथा किसान नेता रामदेव सिंह उपस्थित थे। नेताओं ने केंद्र सरकार पर मजदूरों के अधिकार छीनने और निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों को हड़ताल और संगठन बनाने के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। ”कोड्स से मजदूरों की कानूनी सुरक्षा कमजोर होगी” वक्ताओं ने बताया कि सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए लेबर कोड्स लागू किए हैं। उनका आरोप है कि इन कोड्स से मजदूरों की कानूनी सुरक्षा कमजोर होगी और उन्हें मालिकों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। नेताओं का दावा है कि ये श्रम कोड बड़ी संख्या में श्रमिकों को मजदूर की परिभाषा से बाहर कर उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर देंगे। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान श्रम कानून आजादी के आंदोलन और मजदूर संघर्षों की देन हैं। इन्हें खत्म करना संविधान और श्रमिक अधिकारों पर बड़ा हमला है। उन्होंने इस कदम को बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों के हित में उठाया गया बताया। बक्सर जिला मुख्यालय पर होने वाले प्रदर्शन में कई संगठन शामिल होंगे बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि बक्सर जिला मुख्यालय पर होने वाले प्रदर्शन में कई संगठन शामिल होंगे। इनमें भाकपा-माले, माकपा, भाकपा के नेता, पूर्व विधायक अजीत कुमार सिंह, विभिन्न मजदूर संगठन, स्कीम वर्कर्स, तथा शिक्षक और कर्मचारी महासंघ गोपगुट प्रमुख हैं। अंत में, नेताओं ने सभी मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता से 12 फरवरी की आम हड़ताल और प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।


