बक्सर जिले के कृष्णब्रह्म थाना क्षेत्र स्थित बड़का धकाईच के राम जानकी मठ से तीन साल पहले चोरी हुई रामदरबार की अष्टधातु की बहुमूल्य मूर्तियां आखिरकार मंदिर को वापस सौंप दी गई। मंगलवार को भोजपुर जिले के कोईलवर थाना के मालखाना में सुरक्षित रखी गई सातों मूर्तियों को विधिवत कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुक्त कराया गया। सीजेएम न्यायालय में छह लाख रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद कोईलवर थाना से सभी मूर्तियों को रिलीज किया गया। इसके बाद मठ समिति के सदस्य कन्हैया दुबे, सुधीर दुबे, रौशन पांडेय, नवीन कुमार सिंह और अधिवक्ता धनेश पांडेय विधिवत पूजा-अर्चना कर मूर्तियों को लेकर कृष्णब्रह्म के लिए रवाना हुए। 300 वर्ष पुरानी है सभी मूर्तियां अधिवक्ता धनेश पांडेय ने बताया कि ये सभी मूर्तियां करीब 300 वर्ष पुरानी और अत्यंत प्राचीन धरोहर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी अनुमानित कीमत लगभग 68 करोड़ रुपये आंकी गई है। अष्टधातु से बनी ये मूर्तियां ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह मूर्तियां तीन साल पहले 21 जनवरी को राम जानकी मठ से चोरी हुई थीं। चोरी की गई मूर्तियों में राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, लड्डू गोपाल समेत सात मूर्तियां और एक मुकुट शामिल थे। कार से सभी मूर्तियां बरामद घटना के अगले ही दिन 22 जनवरी को कोईलवर पुलिस ने आरा-छपरा मोड़ के पास एक कार से सभी मूर्तियां बरामद कर ली थीं और एक आरोपी को हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था। तब से ये मूर्तियां मालखाना में सुरक्षित रखी गई थीं। यह पहली बार नहीं है जब इस मठ में चोरी की घटना हुई है। इससे पहले 6 जून 2011 को भी यहां से तीन मूर्तियां चोरी हुई थीं और उस दौरान पुजारी भुनेश्वर दास की हत्या कर दी गई थी। हालांकि, 2013 में वे मूर्तियां भी बरामद कर मंदिर में पुनः स्थापित की गई थीं। मठ के सचिव कन्हैया दुबे ने बताया कि करीब 300 साल पहले नेपाल के महाराजा ने इन मूर्तियों की स्थापना कराई थी। ऐसे में इनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ जाता है।तीन साल बाद अपने आराध्य की घर वापसी से श्रद्धालुओं में उत्सव जैसा माहौल है और मंदिर परिसर में विशेष पूजा-पाठ की तैयारी की जा रही है। बक्सर जिले के कृष्णब्रह्म थाना क्षेत्र स्थित बड़का धकाईच के राम जानकी मठ से तीन साल पहले चोरी हुई रामदरबार की अष्टधातु की बहुमूल्य मूर्तियां आखिरकार मंदिर को वापस सौंप दी गई। मंगलवार को भोजपुर जिले के कोईलवर थाना के मालखाना में सुरक्षित रखी गई सातों मूर्तियों को विधिवत कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुक्त कराया गया। सीजेएम न्यायालय में छह लाख रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद कोईलवर थाना से सभी मूर्तियों को रिलीज किया गया। इसके बाद मठ समिति के सदस्य कन्हैया दुबे, सुधीर दुबे, रौशन पांडेय, नवीन कुमार सिंह और अधिवक्ता धनेश पांडेय विधिवत पूजा-अर्चना कर मूर्तियों को लेकर कृष्णब्रह्म के लिए रवाना हुए। 300 वर्ष पुरानी है सभी मूर्तियां अधिवक्ता धनेश पांडेय ने बताया कि ये सभी मूर्तियां करीब 300 वर्ष पुरानी और अत्यंत प्राचीन धरोहर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी अनुमानित कीमत लगभग 68 करोड़ रुपये आंकी गई है। अष्टधातु से बनी ये मूर्तियां ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह मूर्तियां तीन साल पहले 21 जनवरी को राम जानकी मठ से चोरी हुई थीं। चोरी की गई मूर्तियों में राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, लड्डू गोपाल समेत सात मूर्तियां और एक मुकुट शामिल थे। कार से सभी मूर्तियां बरामद घटना के अगले ही दिन 22 जनवरी को कोईलवर पुलिस ने आरा-छपरा मोड़ के पास एक कार से सभी मूर्तियां बरामद कर ली थीं और एक आरोपी को हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था। तब से ये मूर्तियां मालखाना में सुरक्षित रखी गई थीं। यह पहली बार नहीं है जब इस मठ में चोरी की घटना हुई है। इससे पहले 6 जून 2011 को भी यहां से तीन मूर्तियां चोरी हुई थीं और उस दौरान पुजारी भुनेश्वर दास की हत्या कर दी गई थी। हालांकि, 2013 में वे मूर्तियां भी बरामद कर मंदिर में पुनः स्थापित की गई थीं। मठ के सचिव कन्हैया दुबे ने बताया कि करीब 300 साल पहले नेपाल के महाराजा ने इन मूर्तियों की स्थापना कराई थी। ऐसे में इनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ जाता है।तीन साल बाद अपने आराध्य की घर वापसी से श्रद्धालुओं में उत्सव जैसा माहौल है और मंदिर परिसर में विशेष पूजा-पाठ की तैयारी की जा रही है।


