अररिया जिला मुख्यालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II (VVP-II) के प्रभावी क्रियान्वयन और अनुश्रवण के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में हुई इस जिला स्तरीय समिति (DLC) की मासिक समीक्षा बैठक में गैप एनालिसिस और ग्राम एक्शन प्लान के प्रारूप पर विस्तृत चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों के चयनित गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास उनकी प्राथमिकता है और प्रत्येक विभाग को अपनी भूमिका सक्रियता से निभानी होगी। VVP-II के तहत 12 गांव चयनित बैठक में बताया गया कि VVP-II के तहत कुल 12 गांव चयनित किए गए हैं। इनमें फारबिसगंज प्रखंड के बैजनाथपुर, दमादिघी, हथवा, पोखरिया; कुर्साकांटा प्रखंड के लैलोखर, सुन्दरी तथा नरपतगंज प्रखंड के बेला, भवानीपुर, डुमरवना, घुरना, गोसोई पछियारी और मानिकपुर शामिल हैं। इन चयनित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, सामुदायिक भवन, पुस्तकालय, सड़क, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 7 दिन में चयनित गांवों का करना है भ्रमण डीएम ने जिला योजना पदाधिकारी सह सहायक नोडल अधिकारी VVP-II को एक सप्ताह के भीतर सभी चयनित गांवों का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और कमियों की अद्यतन रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। बैठक में उप विकास आयुक्त, एसएसबी अररिया एवं बथनाहा के समादेष्टा, सिविल सर्जन, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (ICDS), महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, पर्यटन, श्रम, सहकारिता, कृषि, पशुपालन, मत्स्य, सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी और कार्यपालक अभियंता उपस्थित रहे। VVP-II का लक्ष्य इन गांवों को मॉडल गांव बनाना है, जिससे सीमा क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके और पलायन रुके। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। अररिया जिला मुख्यालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II (VVP-II) के प्रभावी क्रियान्वयन और अनुश्रवण के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में हुई इस जिला स्तरीय समिति (DLC) की मासिक समीक्षा बैठक में गैप एनालिसिस और ग्राम एक्शन प्लान के प्रारूप पर विस्तृत चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों के चयनित गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास उनकी प्राथमिकता है और प्रत्येक विभाग को अपनी भूमिका सक्रियता से निभानी होगी। VVP-II के तहत 12 गांव चयनित बैठक में बताया गया कि VVP-II के तहत कुल 12 गांव चयनित किए गए हैं। इनमें फारबिसगंज प्रखंड के बैजनाथपुर, दमादिघी, हथवा, पोखरिया; कुर्साकांटा प्रखंड के लैलोखर, सुन्दरी तथा नरपतगंज प्रखंड के बेला, भवानीपुर, डुमरवना, घुरना, गोसोई पछियारी और मानिकपुर शामिल हैं। इन चयनित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, सामुदायिक भवन, पुस्तकालय, सड़क, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 7 दिन में चयनित गांवों का करना है भ्रमण डीएम ने जिला योजना पदाधिकारी सह सहायक नोडल अधिकारी VVP-II को एक सप्ताह के भीतर सभी चयनित गांवों का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और कमियों की अद्यतन रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। बैठक में उप विकास आयुक्त, एसएसबी अररिया एवं बथनाहा के समादेष्टा, सिविल सर्जन, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (ICDS), महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, पर्यटन, श्रम, सहकारिता, कृषि, पशुपालन, मत्स्य, सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी और कार्यपालक अभियंता उपस्थित रहे। VVP-II का लक्ष्य इन गांवों को मॉडल गांव बनाना है, जिससे सीमा क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके और पलायन रुके। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।


