Uttar Pradesh LIVE Budget 2026 Updates: उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में तैयार किया गया आगामी बजट जल्द ही विधानसभा में पेश किया जाएगा। इस बजट को लेकर प्रदेश के उद्यमी, व्यापारी और उद्योग जगत बड़ी आशाओं के साथ नजरें टिकाए हुए हैं। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि इस बार बजट में उनके प्रमुख मुद्दों को शामिल किया जाता है, तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकती है और “ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” के लक्ष्य की दिशा में ठोस प्रगति संभव होगी। व्यापारी समाज का कहना है कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज न होकर जमीनी समस्याओं का समाधान देने वाला होना चाहिए।

उद्योगों को बढ़ावा और लालफीताशाही पर लगाम
उद्यमियों की सबसे बड़ी मांग यह है कि उद्योग स्थापित करने और चलाने की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए। वर्तमान में कई छोटे और मध्यम उद्यमी लाइसेंस, अनुमतियों और विभागीय प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाते हैं। व्यापारिक संगठनों का सुझाव है कि बजट में ऐसे प्रावधान हों जिससे उद्योगों को ऋण आसानी से उपलब्ध हो। सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में “सिंगल विंडो सिस्टम” प्रभावी रूप से लागू हो। नई इकाइयों को शुरुआती वर्षों में कर और ब्याज में राहत मिले। उनका मानना है कि यदि लालफीताशाही कम होगी, तो निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी तेजी से सृजित होंगे।
बाजारों में स्वच्छता, शौचालय और सौंदर्यीकरण
व्यापारी वर्ग का एक बड़ा मुद्दा बाजारों की बुनियादी सुविधाएं हैं। कई प्रमुख बाजारों में अभी भी स्वच्छता, सार्वजनिक शौचालय और पार्किंग जैसी सुविधाओं का अभाव है। मांग की जा रही है कि बजट में नगर निकायों को विशेष अनुदान दिया जाए ताकि बाजारों की नियमित सफाई हो,पुरुष एवं महिला शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था हो। सड़कों, लाइटिंग और साइन बोर्ड के माध्यम से बाजारों का सौंदर्यीकरण किया जा सके। इससे ग्राहकों की आवाजाही बढ़ेगी और व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा।

दुर्घटनाओं में नुकसान पर मुआवजा
अक्सर आग, प्राकृतिक आपदा या अन्य दुर्घटनाओं में व्यापारियों की दुकानें और माल नष्ट हो जाते हैं। छोटे व्यापारी ऐसे नुकसान से उबर नहीं पाते। व्यापारी संगठनों ने मांग की है कि बजट में एक विशेष राहत कोष बनाया जाए, जिसके तहत प्रभावित व्यापारियों को शीघ्र और समुचित मुआवजा मिल सके। इससे व्यापारिक समुदाय में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
ई-कॉमर्स कंपनियों पर निगरानी और कर नीति
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनियों से उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बड़ी कंपनियां भारी छूट और गोदाम आधारित बिक्री से स्थानीय बाजार को प्रभावित कर रही हैं।
मांग उठी है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के गोदामों की नियमित जांच हो,कर ढांचे में संतुलन लाया जाए,स्थानीय व्यापार को संरक्षण देने के उपाय किए जाएँ। व्यापारी वर्ग का तर्क है कि समान प्रतिस्पर्धा का माहौल जरूरी है।
व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ का विस्तार
प्रदेश सरकार ने व्यापारी सुरक्षा के लिए प्रकोष्ठ का गठन किया है, लेकिन सभी जिलों में इसकी सक्रिय उपस्थिति नहीं है।बजट में प्रावधान की मांग है कि हर जनपद में व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ का कार्यालय स्थापित हो। शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। व्यापारियों को सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं में कानूनी सहायता मिले। वरिष्ठ व्यापारियों के लिए पेंशन योजना। 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यापारियों के लिए पेंशन योजना लागू करने की मांग भी प्रमुख है। संगठनों का कहना है कि कई व्यापारी जीवन भर छोटे व्यवसाय से जुड़े रहते हैं और वृद्धावस्था में आय का कोई स्थायी साधन नहीं होता। ऐसी योजना सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन सकती है।

स्वास्थ्य बीमा सुविधा
व्यापारियों के लिए समूह स्वास्थ्य बीमा योजना भी बजट की अपेक्षाओं में शामिल है। अचानक बीमारी या दुर्घटना में भारी चिकित्सा खर्च व्यापारियों को आर्थिक संकट में डाल देता है। यदि सरकार सब्सिडी आधारित बीमा योजना लाती है, तो लाखों परिवारों को राहत मिलेगी।
ओडीओपी योजना को बढ़ावा
“एक जनपद एक उत्पाद (ODOP)” योजना ने प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। व्यापारिक संगठनों का सुझाव है कि बजट में इस योजना के लिए अधिक संसाधन दिए जाएँ ताकि स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग बढ़े,निर्यात को प्रोत्साहन मिले,कारीगरों और लघु उद्योगों को सीधा लाभ पहुँचे,बाजारों को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग। अतिक्रमण के कारण बाजारों में जाम और अव्यवस्था रहती है, जिससे व्यापार प्रभावित होता है। बजट में अतिक्रमण हटाने और व्यवस्थित मार्केट प्लानिंग के लिए धनराशि का प्रावधान करने की मांग की गई है।
29 जून – व्यापारी कल्याण दिवस
व्यापारी संगठनों ने आग्रह किया है कि 29 जून को व्यापारी कल्याण दिवस का आयोजन सभी जनपदों में पूर्व की भांति सरकारी स्तर पर हो। इससे व्यापारी समाज और सरकार के बीच संवाद मजबूत होगा।


