केंद्र सरकार BHEL यानी, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसमें ऑफर फॉर सेल के जरिए 3% हिस्सा बेचेगी। ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए 2% अतिरिक्त हिस्सा बेचने का विकल्प भी रखा गया है। इस तरह सरकार कुल 5% हिस्सेदारी बेच सकती है। यह OFS आज 11 फरवरी को खुल गया है। 12 फरवरी तक इसमें निवेश कर सकते हैं। इसके लिए ₹254 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है, जो मंगलवार को बाजार बंद होने की कीमत 276 रुपए से 8% कम है। आज इसका शेयर 6% नीचे 260 रुपए पर ट्रेड कर रहा है। रिटेल निवेशक कल लगा सकेंगे बोली सरकार के पास अभी 63% से ज्यादा हिस्सेदारी वर्तमान में BHEL की प्रमोटर भारत सरकार है। सरकार की कंपनी में कुल 63.17% हिस्सेदारी है। इस 5% हिस्सेदारी की बिक्री के बाद भी कंपनी पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा। विनिवेश के तहत सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास के कामों के लिए फंड जुटा रही है। तीसरी तिमाही में मुनाफा 200% से ज्यादा बढ़ा BHEL का दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 206% बढ़कर ₹382 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹125 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी 16% बढ़कर ₹8,473 करोड़ पर पहुंच गया। कामकाज में सुधार और ऑपरेशंस पर बेहतर पकड़ के चलते कंपनी के मुनाफा बढ़ा है। ओडिशा के प्रोजेक्ट के लिए मिला ₹2,800 करोड़ का ऑर्डर हिस्सेदारी बेचने की खबर के बीच कंपनी को एक बड़ा वर्क ऑर्डर भी मिला है। BHEL को भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड से करीब ₹2,800 करोड़ का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LoA) मिला है। यह प्रोजेक्ट ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में ‘कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट’ प्लांट से जुड़ा है। BHEL को इसमें डिजाइन, इंजीनियरिंग, सप्लाई और मेंटेनेंस का काम करना है। नॉलेज बॉक्स: OFS, ग्रीन शू ऑप्शन और फ्लोर प्राइस समझें 1. क्या होता है ऑफर फॉर सेल (OFS)? OFS शेयर बाजार के जरिए हिस्सेदारी बेचने का एक आसान तरीका है। इसमें प्रमोटर (इस मामले में भारत सरकार) अपने शेयर सीधे निवेशकों को ऑफर करते हैं। इसमें आमतौर पर शेयर की मौजूदा बाजार कीमत से थोड़ा डिस्काउंट दिया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा निवेशक आकर्षित हो सकें। 2. क्या है ग्रीन शू ऑप्शन? जब किसी शेयर सेल (OFS या IPO) में मांग उम्मीद से ज्यादा होती है, तो कंपनी या सरकार के पास कुछ अतिरिक्त शेयर बेचने का अधिकार होता है। इसे ही ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ कहते हैं। BHEL के मामले में सरकार ने 3% के अलावा 2% का यही विकल्प रखा है। 3. क्या है फ्लोर प्राइस? फ्लोर प्राइस वह न्यूनतम कीमत होती है जिस पर सरकार या प्रमोटर अपने शेयर बेचने को तैयार होते हैं। निवेशक इससे कम कीमत पर बोली नहीं लगा सकते। आमतौर पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इसे बाजार की मौजूदा कीमत से थोड़ा कम रखा जाता है।
BHEL के शेयर सस्ते में खरीदने का मौका:सरकार बेच रही 5% हिस्सेदारी, ₹254 फ्लोर प्राइस तय; कल रिटेल निवेशक लगा सकेंगे बोली


