दरभंगा में आज से घर-घर दी जाएगी फाइलेरिया की दवा:मेगा एमडीए कैंप लगेगा, सीएस बोले- जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाना प्राथमिकता

    दरभंगा में आज से घर-घर दी जाएगी फाइलेरिया की दवा:मेगा एमडीए कैंप लगेगा, सीएस बोले- जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाना प्राथमिकता

    दरभंगा जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से आज से सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम के तहत जिले के सभी लक्षित लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करने के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बूथ लगाकर स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने लोगों को दवा खिलाएंगे। इसके बाद अगले 14 दिनों तक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा का सेवन कराएंगे। हर प्रखंड में रैपिड रिस्पांस टीम तैनात रहेगी जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि रक्तचाप, शुगर, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य रोगों से पीड़ित व्यक्ति भी इन दवाओं का सेवन कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की परेशानी से निपटने के लिए हर प्रखंड में रैपिड रिस्पांस टीम तैनात रहेगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी, बिरौल और सदर प्रखंडों की कुल 10 लाख 85 हजार 418 जनसंख्या को डीईसी, अल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन की निर्धारित खुराक स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से घर-घर जाकर उनके सामने खिलाई जाएगी।
    खाली पेट दवा नहीं लेना है स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। सभी दवाएं निःशुल्क घर तक पहुंचाई जाएंगी।
    फाइलेरिया या हाथीपांव रोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो संक्रमित मादा क्युलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। यह रोग लिम्फैटिक सिस्टम को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न होने पर शरीर के अंगों में असामान्य सूजन, हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा और काइलूरिया जैसी जटिलताएं उत्पन्न करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 वर्षों तक फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करता है तो जीवनभर इस रोग से सुरक्षित रह सकता है। कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एके मिश्रा, भीबीडी कंसलटेंट बबन प्रसाद, मनीष कुमार, आशुतोष कुमार, शशिकांत, पिरामल संस्था से चंद्रेश कर्ण, प्रशांत कुमार झा, डब्ल्यूएचओ से डॉ. सूफिया खातून, सीफार के डिविजनल कोऑर्डिनेटर अमन कुमार सहित अन्य अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे। दरभंगा जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से आज से सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम के तहत जिले के सभी लक्षित लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करने के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बूथ लगाकर स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने लोगों को दवा खिलाएंगे। इसके बाद अगले 14 दिनों तक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा का सेवन कराएंगे। हर प्रखंड में रैपिड रिस्पांस टीम तैनात रहेगी जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि रक्तचाप, शुगर, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य रोगों से पीड़ित व्यक्ति भी इन दवाओं का सेवन कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की परेशानी से निपटने के लिए हर प्रखंड में रैपिड रिस्पांस टीम तैनात रहेगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी, बिरौल और सदर प्रखंडों की कुल 10 लाख 85 हजार 418 जनसंख्या को डीईसी, अल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन की निर्धारित खुराक स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से घर-घर जाकर उनके सामने खिलाई जाएगी।
    खाली पेट दवा नहीं लेना है स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। सभी दवाएं निःशुल्क घर तक पहुंचाई जाएंगी।
    फाइलेरिया या हाथीपांव रोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो संक्रमित मादा क्युलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। यह रोग लिम्फैटिक सिस्टम को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न होने पर शरीर के अंगों में असामान्य सूजन, हाइड्रोसील, लिम्फेडेमा और काइलूरिया जैसी जटिलताएं उत्पन्न करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 वर्षों तक फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करता है तो जीवनभर इस रोग से सुरक्षित रह सकता है। कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एके मिश्रा, भीबीडी कंसलटेंट बबन प्रसाद, मनीष कुमार, आशुतोष कुमार, शशिकांत, पिरामल संस्था से चंद्रेश कर्ण, प्रशांत कुमार झा, डब्ल्यूएचओ से डॉ. सूफिया खातून, सीफार के डिविजनल कोऑर्डिनेटर अमन कुमार सहित अन्य अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।  

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