हुजूर, सरकार मेरी हत्या कराना चाहती है। PMCH में लावारिस पड़ा था। वार्ड के बाहर की एक सुई लगाई गई, जिससे मेरी तबीयत खराब होने लगी। मुझे शक है कि गलत इंजेक्शन देकर पटना पुलिस मेरी हत्या करवाना चाहती है। मैं सरेंडर करने वाला था। सादे कपड़ों में मेरे घर बहुत से हथियारबंद लोग आए। SP नहीं आते तो पता नहीं क्या होता।
मंगलवार दोपहर को सांसद पप्पू यादव ने ये बातें कोर्ट में कहीं। पेश होते ही सांसद ने जज के सामने हाथ जोड़ लिए। फूट-फूटकर रोते हुए अपना दुखड़ा सुनाया। गिड़गिड़ाकर कहा- ‘हुजूर सरकार मरवा देगी, बचा लीजिए।’ सुनवाई के दौरान वह करीब 20 मिनट तक जज के सामने हाथ जोड़े खड़े रहे। पप्पू यादव को 31 साल पुराने एक मामले में पटना की MP-MLA विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि, अन्य दो मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण वे फिलहाल जेल में रहेंगे। आज इन्हीं दोनों मामलों पर सुनवाई होगी। पप्पू यादव ने जज के सामने रोते-रोते क्या कहा? सरकारी वकील ने क्या दलीलें दी, अपने संदेश में नीतीश सरकार पर क्या आरोप लगाए। पढ़िए रिपोर्ट…। कैदी वैन से पहुंचे पप्पू यादव, व्हीलचेयर से कोर्ट पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव मंगलवार दोपहर को करीब 12:30 बजे MP-MLA कोर्ट आए। पुलिस उन्हें कैदी वैन में बैठाकर बेऊर जेल से लाई थी। वह जैसे ही पहुंचे वैन के पास भीड़ जुट गई। कुछ सांसद के समर्थक थे तो बड़ी संख्या में पुलिस के जवान। सांसद को उतारने के लिए वैन का पिछला दरवाजा खोला गया। अब तक बेंच पर बैठकर खिड़की पर लगी जाली से झांककर बाहर की स्थिति का अंदाजा लगा रहे पप्पू यादव धीरे-धीरे खड़ा हुए। एक पुलिसकर्मी उनके बेहद पास मौजूद थे। वैन से उतरने से पहले सांसद ने हाथ जोड़ लिए। उन्होंने झुककर सामने मौजूद लोगों को प्रणाम किया। इसके बाद पुलिस सांसद को व्हीलचेयर पर बैठाकर कोर्ट के अंदर ले गई। पेशी के दौरान फूट-फूटकर रोने लगे पप्पू यादव MP/MLA कोर्ट के ACJM 1 की अदालत में पप्पू यादव के मामले की सुनवाई हुई। अपनी बारी आने से पहले सांसद कोर्ट के बाहर व्हीलचेयर पर बैठकर इंतजार करते रहे। वहां उनके समर्थकों की भीड़ लगी रही। कोई लिट्टी तो कोई मिल्क शेक लेकर पहुंचा। एक छोटा बच्चा भी आया था, जिसकी पढ़ाई का खर्च सांसद उठाते हैं। लंच के बाद दोपहर 2 बजे जज अपनी सीट पर पहुंचे। इसके साथ ही पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। आगे पढ़िए, कोर्ट में क्या हुआ…(जैसा कोर्ट रूम में मौजूद वकील ऋषिकेश नारायण सिन्हा ने बताया) सरकारी वकील: हुजूर बुद्धा कॉलनी थाने से जुड़े केस में रिमांड दी जाए। जज: पप्पू यादव कहां हैं? पप्पू यादव: अपना नाम सुनकर व्हीलचेयर से लड़खड़ाते हुए खड़े हुए। पैर कांप रहे थे। आंखें भरी हुईं। उठते ही जज के सामने दोनों हाथ जोड़ लिए। बोले हुजूर मैं हूं। जज: आपको कांड संख्या 72/26 में रिमांड किया जा रहा है। पप्पू यादव: इतना सुनते ही फूट-फूटकर रोने लगे। हाथ जोड़े हुए अपनी आपबीती सुनाई। कहा, ‘हुजूर मैं सांसद हूं। मुझे बहुत से काम होते हैं। मैं कभी कोर्ट से भागा नहीं हूं। सरेंडर करने वाला था। मेरे घर पर बहुत सारी पुलिस आ गई। विरोध भी मैंने नहीं किया। साथ चलने के लिए तैयार था।’ ‘सादे लिबास में आए दीपक कुमार नाम के शख्स ने पिस्टल दिखाते हुए मुझे धमकी दी। उनके साथ और भी लोग सादे लिबास में थे। SP और अन्य लोग नहीं आते तो पता नहीं मेरे साथ उस दिन क्या होता। कुछ कह नहीं सकता। मेरे साथ बहुत दुर्व्यवहार किया गया है।’ ‘हुजूर आपके आदेश पर मुझे PMCH इलाज के लिए ले जाया गया। वहां लावारिस छोड़ दिया गया। वार्ड के बाहर एक गलत सुई लगाई गई। जिससे मुझे अब परेशानी हो रही है। इसे अपने रिकॉर्ड पर रखा जाए। सरकार मेरी हत्या करा सकती है। ऐसे में मेरे साथ कुछ भी अनहोनी होती है। इस पर संज्ञान लिया जाए।’ इस दौरान पप्पू यादव अपने हाथ में 3-4 पन्ने का आवेदन लिए हुए थे। यह आवेदन सांसद ने जेल में लिखा था। जज: डॉक्यूमेंट लाइए। यह सुनकर कोर्ट के कर्मचारी सांसद के पास आए और आवेदन लेकर जज के सामने रख दिया। पप्पू यादव के वकील: हुजूर बेल दी जाए। सरकारी वकील: हुजूर लंबे समय से फरार हैं। बार-बार बुलाने के बाद भी ना इनके वकील आये और ना खुद। इन्हें बेल नहीं दी जाए। पप्पू यादव के वकील: हुजूर इसमें प्रॉसिक्यूशन की गलती है। इसके बारे में बताया नहीं गया। मामला मिस यूज का है। प्रत्येक डेट पर आने के लिए तैयार हैं। बेल मिलनी चाहिए। जज ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पप्पू यादव को बेल दे दी। बेल मिलने के बाद भी जेल गए पप्पू यादव पप्पू यादव जमानत मिलने के बाद भी जेल में हैं। ऐसा उनके खिलाफ बुद्धा कॉलनी और कोतवाली थाना में दर्ज मामलों के चलते हुआ है। इनपर आज सुनवाई होगी। वकील ऋषिकेश नारायण सिन्हा ने बताया कि सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने सांसद को जमानत दिए जाने का विरोध किया। इस पर कुछ पॉइंट्स को लेकर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। इन दोनों केस में रिमांड पर हैं पप्पू यादव अब पढ़िए मुख्यमंत्री को पप्पू यादव की चिट्ठी सांसद पप्पू यादव ने सरकार, अधिकारियों और भाजपा नेताओं का नाम लेते हुए पत्र जारी किया है। इसमें लिखा… ‘माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दीपक बाबू, प्रत्यय अमृत, सम्राट बाबू, डीजीपी साहब, कुंदन कृष्णन साहब, ललन बाबू, संजय बाबू आपको हृदय से आभार और सम्मान!’ ‘मुझे नहीं पता कि सरकार आज कौन चला रहे हैं? मुझे यह पता था कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार चल रही है। लेकिन अब लगता है कि जिस नीतीश कुमार का सम्मान मैंने हमेशा किया, उनके साथ खड़ा रहा, पहली बार जब सरकार बन रही थी तब भी हम उनके साथ सगे भाई की तरह जीने मरने को तैयार थे, उस नीतीश कुमार की सरकार नहीं है।’ कभी व्यक्तिगत तौर पर नीतीश की आलोचना नहीं की जदयू के लिए किए गए काम गिनाते हुए सांसद ने लिखा, ‘याद कीजिये, उस वक्त भी हम पाटलिपुत्रा में लालू यादव और शहाबुद्दीन की गोली खाने को तैयार थे। जहां आज जदयू का कार्यालय है, वहां पर विधायक महाबली और बसपा विधायक जो आज जीवित हैं वे जानते हैं कि मैं नीतीश के लिए किस हद तक गया था।’ ‘ये मेरा नीतीश के लिए समर्पण था। जैसे मैं लालू यादव का सम्मान करता रहा हूं, उसी तरह नीतीश कुमार के हर अच्छे काम में उनके साथ रहा। व्यक्तिगत तौर पर उनकी आलोचना कभी नहीं की।’ ‘उनके सकारात्मक काम की प्रशंसा की। जब नीतीश कुमार की आलोचना बीजेपी और राजद ने की, तब भी हम उनके साथ रहे। फिर भी पता नहीं, नीतीश मुझसे किस बात का बदला लेना चाह रहे हैं, जबकि मैंने उनसे उनके 20 साल के कार्यकाल में कोई मदद तक नहीं मांगी। ना ही मैंने कभी शकुनी चौधरी और सम्राट चौधरी की व्यक्तिगत आलोचना की।’ CM बताएं-मेरा गुनाह क्या है? CM पर आरोप लगाते हुए पप्पू यादव ने कहा, ‘मैं जानना चाहता हूं कि क्या वैचारिक लड़ाई को निजी बनाया जाना सही है? क्या कथनी और करनी में फर्क नहीं है? आप कहते हैं, ना किसी को फंसाते हैं और ना किसी को बचाते हैं। मुझे और बिहार की जनता को बताएं कि मेरा गुनाह क्या है?’ ‘साल 2017 में भी आपने मुझे छात्रों की आवाज उठाने के चलते गिरफ्तार किया था। क्या मिला आपको, तंग करने के अलावा। सुकून मिल गया था कि आप सरकार में हैं, कुछ भी कर सकते हैं।’ लोकतंत्र में जनता और न्यायालय सर्वोच्च है, ना कि सरकार। फिर 5 साल बाद कोरोना के समय आपकी सरकार की कमियों को वैचारिक रूप से उजागर कर रहा था, तब भी जबरदस्ती केस बना कर गिरफ्तार किया था। निजी दुश्मनी और सत्ता के अहंकार की हनक मुझ पर निकाली। 5 साल बाद अब 2026 में निजी दुश्मनी मेरे साथ निभाई। समझ नहीं पा रहा हूं कि महाभारत का धृतराष्ट्र कौन है? बिहार सरकार के बड़े अधिकारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘NEET की छात्रा और हर घर की मां, बेटियों एवं बहनों की सुरक्षा के लिए संघर्ष के परिणाम स्वरूप आपने अहंकार दिखाई। मेरा गुनाह क्या था? मैं तो आपकी साख के लिए सवाल उठा रहा था, जबकि आपका प्रशासन उस पर लगातार कालिख पोत रहा था। डीजी साहब और कुंदन कृष्णन साहब, मुझे नहीं पता कि आप दोनों में कौन बादशाह हैं और कौन गुलाम! लेकिन पब्लिक है, सब जानती है।’ ‘समय बदलता है। सबका समय एक जैसा नहीं रहता है। परिस्थितियों के गुलाम सब लोग हैं। आप दोनों से हमारा व्यक्तिगत रिश्ता रहा है। दीपक बाबू, याद कीजिए, कभी आप पूर्णिया के डीडीसी थे। फिर डीएम और फिर जसवंत सिन्हा के ओएसडी। मेरा आपसे पारिवारिक रिश्ता रहा है। घर का और बच्चे का। मैंने आपसे कभी मदद नहीं ली, लेकिन आपको न्याय करनी चाहिए थी।’ मैं महाभारत का अभिमन्यु नहीं हूं। आज की परिस्थितियों में अगर महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद भी होते तो कब के खत्म हो गए होते। 1985 से लेकर आज तक संघर्ष और सच्चाई के रास्ते चला हूं। मेरी आवाज कभी रुकी नहीं, लेकिन ये नहीं समझ पा रहा हूं कि महाभारत का धृतराष्ट्र कौन है? जो सरकार चलाने या बचाने के लिए सच्चाई और नैतिकता को कुचलना चाहता है। जो मौत से नहीं डरा, वो आपकी पुलिस से कितना डरेगा 31 साल पुराने केस में हुई गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए सांसद ने लिखा, ‘मेरी उम्र 59 में प्रवेश कर रही है। 60 का पड़ाव बहुत खतरनाक होता है। धर्म और अधर्म की लड़ाई शुरू हो चुकी है। मुझे नहीं पता कि धर्म और अधर्म की इस लड़ाई में जीत किसकी होगी, लेकिन इतना जरूर पता है कि बिहार और बिहार की बेटियों की रक्षा के लिए हमेशा सच की लड़ाई लड़ता रहूंगा। जो आदमी कभी मौत से नहीं डरा, वो आपकी पुलिस से कितना डरेगा।’ ‘मुख्यमंत्री जी, 2024 में जनता ने मुझे सांसद चुना। 2 साल आपके साथ काम करता रहा। आपकी मीटिंग अटेंड की। आपको कभी नहीं लगा कि मुझपर केस हैं। अचानक से ये केस कहां से आने लगे, जबकि ये सभी आचार संहिता और आंदोलन के केस हैं। एक भी केस मुझ पर क्रिमिनल नहीं है। बेल टूटने में ऐसा क्या हो गया कि ये नौबत आई?’ पटना SSP की कथा कहने लगूं तो.. पटना के SSP पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने लिखा, ‘मैंने आपका सहयोग किया, फिर भी दीपक नाम के आदमी को (जो खुद को रंगदारी सेल का इंस्पेक्टर बताता है) आपके एसएसपी साहब ने भेजा था। मैं आपके एसएसपी साहब की कथा कहने लगूं तो शायद आप सोच नहीं सकते क्या होगा?’ ‘उनकी पूर्णिया से लेकर पटना तक की पूरी कहानी और कथा मेरे पास है। उनके फोटो और वीडियो सबूत के रूप में मेरे पास हैं। मगर मैं अपनी मर्यादा जानता हूं। मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा। आपके एसएसपी साहब ने पहले भी लॉरेंस बिश्नोई केस में गलत और निर्दोष लोगों को मेरे खिलाफ खड़ा किया था।’ ‘ये लड़ाई कोर्ट तक जाएगी। मुझे न्यायालय, जनता और ईश्वर पर पूरा भरोसा है। जब तक न्यायालय और जनता है, तब तक मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं है।’ मैं अपनी बातों पर कायम हूं। NEET की छात्रा को न्याय मिलकर रहेगा। रविवार के दिन कौन सा भारत-पाकिस्तान युद्ध हो रहा था, जिसमें आपने हमको बिना जांच पूरे हुए अस्पताल से जेल भेज दिया। आखिर कब आपको ठंडक मिलेगी और कब पप्पू यादव को तंग कर आपके अहंकार को संतुष्टि मिलेगी? तभी तो पूर्णिया समेत अन्य जगहों पर पूछने लगे कि और किस-किस केस में वारंट है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन देखें, सरकार क्या कर रही है पप्पू यादव ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से गुहार लगाई, कहा, ‘मुझ पर आंदोलन और आचार संहिता के अलावा कोई केस आपके पूरे बिहार में नहीं है, जिसकी धारा मुझे रोक पाए। ये केस विपक्ष को तंग करने के लिए सत्ता का हथकंडा जरूर हैं, लेकिन विचलित करने के लिए नहीं।’ ‘किसी की आलोचना किए बगैर मैं यही कहूंगा कि सदन में सरकर के बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनपर दर्जनों केस होने के बावजूद वो आपके साथ बैठते हैं। मेरा ये संदेश अगर नीतीश, सम्राट, संजय, ललन तक पहुंचे तो उनसे यही कहूंगा कि आप हमेशा से वैचारिक रूप से लड़े हैं।’ ‘भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बधाई कि आप कम उम्र में एक बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। आपको ये जरूर देखना चाहिए कि आपकी सरकार जबरन किस विचार और आवाज को दबाना चाहती है।’ ‘नित्यानंद राय, आपसे पारिवारिक संबंध रहा है। परिवार के सदस्य के रूप में आपको देखा है। कभी आपकी आलोचना नहीं की। आप करिए, लेकिन रिश्ते का कद्र भी कर लिया कीजिए।’ ‘अंत में ये जरूर कहूंगा कि अगर मैं सही मामले में गलत हूं तो बेहतर है कि एक बार में ही मरवा दीजिए। लेकिन वैचारिक और सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए इस तरह से तंग मत कीजिये। आपकी छवि तंग करने की नहीं रही है। अगर और भी कोई केस बचा है तो वो भी लगा दीजिए।’ हुजूर, सरकार मेरी हत्या कराना चाहती है। PMCH में लावारिस पड़ा था। वार्ड के बाहर की एक सुई लगाई गई, जिससे मेरी तबीयत खराब होने लगी। मुझे शक है कि गलत इंजेक्शन देकर पटना पुलिस मेरी हत्या करवाना चाहती है। मैं सरेंडर करने वाला था। सादे कपड़ों में मेरे घर बहुत से हथियारबंद लोग आए। SP नहीं आते तो पता नहीं क्या होता।
मंगलवार दोपहर को सांसद पप्पू यादव ने ये बातें कोर्ट में कहीं। पेश होते ही सांसद ने जज के सामने हाथ जोड़ लिए। फूट-फूटकर रोते हुए अपना दुखड़ा सुनाया। गिड़गिड़ाकर कहा- ‘हुजूर सरकार मरवा देगी, बचा लीजिए।’ सुनवाई के दौरान वह करीब 20 मिनट तक जज के सामने हाथ जोड़े खड़े रहे। पप्पू यादव को 31 साल पुराने एक मामले में पटना की MP-MLA विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि, अन्य दो मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण वे फिलहाल जेल में रहेंगे। आज इन्हीं दोनों मामलों पर सुनवाई होगी। पप्पू यादव ने जज के सामने रोते-रोते क्या कहा? सरकारी वकील ने क्या दलीलें दी, अपने संदेश में नीतीश सरकार पर क्या आरोप लगाए। पढ़िए रिपोर्ट…। कैदी वैन से पहुंचे पप्पू यादव, व्हीलचेयर से कोर्ट पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव मंगलवार दोपहर को करीब 12:30 बजे MP-MLA कोर्ट आए। पुलिस उन्हें कैदी वैन में बैठाकर बेऊर जेल से लाई थी। वह जैसे ही पहुंचे वैन के पास भीड़ जुट गई। कुछ सांसद के समर्थक थे तो बड़ी संख्या में पुलिस के जवान। सांसद को उतारने के लिए वैन का पिछला दरवाजा खोला गया। अब तक बेंच पर बैठकर खिड़की पर लगी जाली से झांककर बाहर की स्थिति का अंदाजा लगा रहे पप्पू यादव धीरे-धीरे खड़ा हुए। एक पुलिसकर्मी उनके बेहद पास मौजूद थे। वैन से उतरने से पहले सांसद ने हाथ जोड़ लिए। उन्होंने झुककर सामने मौजूद लोगों को प्रणाम किया। इसके बाद पुलिस सांसद को व्हीलचेयर पर बैठाकर कोर्ट के अंदर ले गई। पेशी के दौरान फूट-फूटकर रोने लगे पप्पू यादव MP/MLA कोर्ट के ACJM 1 की अदालत में पप्पू यादव के मामले की सुनवाई हुई। अपनी बारी आने से पहले सांसद कोर्ट के बाहर व्हीलचेयर पर बैठकर इंतजार करते रहे। वहां उनके समर्थकों की भीड़ लगी रही। कोई लिट्टी तो कोई मिल्क शेक लेकर पहुंचा। एक छोटा बच्चा भी आया था, जिसकी पढ़ाई का खर्च सांसद उठाते हैं। लंच के बाद दोपहर 2 बजे जज अपनी सीट पर पहुंचे। इसके साथ ही पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। आगे पढ़िए, कोर्ट में क्या हुआ…(जैसा कोर्ट रूम में मौजूद वकील ऋषिकेश नारायण सिन्हा ने बताया) सरकारी वकील: हुजूर बुद्धा कॉलनी थाने से जुड़े केस में रिमांड दी जाए। जज: पप्पू यादव कहां हैं? पप्पू यादव: अपना नाम सुनकर व्हीलचेयर से लड़खड़ाते हुए खड़े हुए। पैर कांप रहे थे। आंखें भरी हुईं। उठते ही जज के सामने दोनों हाथ जोड़ लिए। बोले हुजूर मैं हूं। जज: आपको कांड संख्या 72/26 में रिमांड किया जा रहा है। पप्पू यादव: इतना सुनते ही फूट-फूटकर रोने लगे। हाथ जोड़े हुए अपनी आपबीती सुनाई। कहा, ‘हुजूर मैं सांसद हूं। मुझे बहुत से काम होते हैं। मैं कभी कोर्ट से भागा नहीं हूं। सरेंडर करने वाला था। मेरे घर पर बहुत सारी पुलिस आ गई। विरोध भी मैंने नहीं किया। साथ चलने के लिए तैयार था।’ ‘सादे लिबास में आए दीपक कुमार नाम के शख्स ने पिस्टल दिखाते हुए मुझे धमकी दी। उनके साथ और भी लोग सादे लिबास में थे। SP और अन्य लोग नहीं आते तो पता नहीं मेरे साथ उस दिन क्या होता। कुछ कह नहीं सकता। मेरे साथ बहुत दुर्व्यवहार किया गया है।’ ‘हुजूर आपके आदेश पर मुझे PMCH इलाज के लिए ले जाया गया। वहां लावारिस छोड़ दिया गया। वार्ड के बाहर एक गलत सुई लगाई गई। जिससे मुझे अब परेशानी हो रही है। इसे अपने रिकॉर्ड पर रखा जाए। सरकार मेरी हत्या करा सकती है। ऐसे में मेरे साथ कुछ भी अनहोनी होती है। इस पर संज्ञान लिया जाए।’ इस दौरान पप्पू यादव अपने हाथ में 3-4 पन्ने का आवेदन लिए हुए थे। यह आवेदन सांसद ने जेल में लिखा था। जज: डॉक्यूमेंट लाइए। यह सुनकर कोर्ट के कर्मचारी सांसद के पास आए और आवेदन लेकर जज के सामने रख दिया। पप्पू यादव के वकील: हुजूर बेल दी जाए। सरकारी वकील: हुजूर लंबे समय से फरार हैं। बार-बार बुलाने के बाद भी ना इनके वकील आये और ना खुद। इन्हें बेल नहीं दी जाए। पप्पू यादव के वकील: हुजूर इसमें प्रॉसिक्यूशन की गलती है। इसके बारे में बताया नहीं गया। मामला मिस यूज का है। प्रत्येक डेट पर आने के लिए तैयार हैं। बेल मिलनी चाहिए। जज ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पप्पू यादव को बेल दे दी। बेल मिलने के बाद भी जेल गए पप्पू यादव पप्पू यादव जमानत मिलने के बाद भी जेल में हैं। ऐसा उनके खिलाफ बुद्धा कॉलनी और कोतवाली थाना में दर्ज मामलों के चलते हुआ है। इनपर आज सुनवाई होगी। वकील ऋषिकेश नारायण सिन्हा ने बताया कि सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने सांसद को जमानत दिए जाने का विरोध किया। इस पर कुछ पॉइंट्स को लेकर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। इन दोनों केस में रिमांड पर हैं पप्पू यादव अब पढ़िए मुख्यमंत्री को पप्पू यादव की चिट्ठी सांसद पप्पू यादव ने सरकार, अधिकारियों और भाजपा नेताओं का नाम लेते हुए पत्र जारी किया है। इसमें लिखा… ‘माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दीपक बाबू, प्रत्यय अमृत, सम्राट बाबू, डीजीपी साहब, कुंदन कृष्णन साहब, ललन बाबू, संजय बाबू आपको हृदय से आभार और सम्मान!’ ‘मुझे नहीं पता कि सरकार आज कौन चला रहे हैं? मुझे यह पता था कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार चल रही है। लेकिन अब लगता है कि जिस नीतीश कुमार का सम्मान मैंने हमेशा किया, उनके साथ खड़ा रहा, पहली बार जब सरकार बन रही थी तब भी हम उनके साथ सगे भाई की तरह जीने मरने को तैयार थे, उस नीतीश कुमार की सरकार नहीं है।’ कभी व्यक्तिगत तौर पर नीतीश की आलोचना नहीं की जदयू के लिए किए गए काम गिनाते हुए सांसद ने लिखा, ‘याद कीजिये, उस वक्त भी हम पाटलिपुत्रा में लालू यादव और शहाबुद्दीन की गोली खाने को तैयार थे। जहां आज जदयू का कार्यालय है, वहां पर विधायक महाबली और बसपा विधायक जो आज जीवित हैं वे जानते हैं कि मैं नीतीश के लिए किस हद तक गया था।’ ‘ये मेरा नीतीश के लिए समर्पण था। जैसे मैं लालू यादव का सम्मान करता रहा हूं, उसी तरह नीतीश कुमार के हर अच्छे काम में उनके साथ रहा। व्यक्तिगत तौर पर उनकी आलोचना कभी नहीं की।’ ‘उनके सकारात्मक काम की प्रशंसा की। जब नीतीश कुमार की आलोचना बीजेपी और राजद ने की, तब भी हम उनके साथ रहे। फिर भी पता नहीं, नीतीश मुझसे किस बात का बदला लेना चाह रहे हैं, जबकि मैंने उनसे उनके 20 साल के कार्यकाल में कोई मदद तक नहीं मांगी। ना ही मैंने कभी शकुनी चौधरी और सम्राट चौधरी की व्यक्तिगत आलोचना की।’ CM बताएं-मेरा गुनाह क्या है? CM पर आरोप लगाते हुए पप्पू यादव ने कहा, ‘मैं जानना चाहता हूं कि क्या वैचारिक लड़ाई को निजी बनाया जाना सही है? क्या कथनी और करनी में फर्क नहीं है? आप कहते हैं, ना किसी को फंसाते हैं और ना किसी को बचाते हैं। मुझे और बिहार की जनता को बताएं कि मेरा गुनाह क्या है?’ ‘साल 2017 में भी आपने मुझे छात्रों की आवाज उठाने के चलते गिरफ्तार किया था। क्या मिला आपको, तंग करने के अलावा। सुकून मिल गया था कि आप सरकार में हैं, कुछ भी कर सकते हैं।’ लोकतंत्र में जनता और न्यायालय सर्वोच्च है, ना कि सरकार। फिर 5 साल बाद कोरोना के समय आपकी सरकार की कमियों को वैचारिक रूप से उजागर कर रहा था, तब भी जबरदस्ती केस बना कर गिरफ्तार किया था। निजी दुश्मनी और सत्ता के अहंकार की हनक मुझ पर निकाली। 5 साल बाद अब 2026 में निजी दुश्मनी मेरे साथ निभाई। समझ नहीं पा रहा हूं कि महाभारत का धृतराष्ट्र कौन है? बिहार सरकार के बड़े अधिकारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘NEET की छात्रा और हर घर की मां, बेटियों एवं बहनों की सुरक्षा के लिए संघर्ष के परिणाम स्वरूप आपने अहंकार दिखाई। मेरा गुनाह क्या था? मैं तो आपकी साख के लिए सवाल उठा रहा था, जबकि आपका प्रशासन उस पर लगातार कालिख पोत रहा था। डीजी साहब और कुंदन कृष्णन साहब, मुझे नहीं पता कि आप दोनों में कौन बादशाह हैं और कौन गुलाम! लेकिन पब्लिक है, सब जानती है।’ ‘समय बदलता है। सबका समय एक जैसा नहीं रहता है। परिस्थितियों के गुलाम सब लोग हैं। आप दोनों से हमारा व्यक्तिगत रिश्ता रहा है। दीपक बाबू, याद कीजिए, कभी आप पूर्णिया के डीडीसी थे। फिर डीएम और फिर जसवंत सिन्हा के ओएसडी। मेरा आपसे पारिवारिक रिश्ता रहा है। घर का और बच्चे का। मैंने आपसे कभी मदद नहीं ली, लेकिन आपको न्याय करनी चाहिए थी।’ मैं महाभारत का अभिमन्यु नहीं हूं। आज की परिस्थितियों में अगर महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद भी होते तो कब के खत्म हो गए होते। 1985 से लेकर आज तक संघर्ष और सच्चाई के रास्ते चला हूं। मेरी आवाज कभी रुकी नहीं, लेकिन ये नहीं समझ पा रहा हूं कि महाभारत का धृतराष्ट्र कौन है? जो सरकार चलाने या बचाने के लिए सच्चाई और नैतिकता को कुचलना चाहता है। जो मौत से नहीं डरा, वो आपकी पुलिस से कितना डरेगा 31 साल पुराने केस में हुई गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए सांसद ने लिखा, ‘मेरी उम्र 59 में प्रवेश कर रही है। 60 का पड़ाव बहुत खतरनाक होता है। धर्म और अधर्म की लड़ाई शुरू हो चुकी है। मुझे नहीं पता कि धर्म और अधर्म की इस लड़ाई में जीत किसकी होगी, लेकिन इतना जरूर पता है कि बिहार और बिहार की बेटियों की रक्षा के लिए हमेशा सच की लड़ाई लड़ता रहूंगा। जो आदमी कभी मौत से नहीं डरा, वो आपकी पुलिस से कितना डरेगा।’ ‘मुख्यमंत्री जी, 2024 में जनता ने मुझे सांसद चुना। 2 साल आपके साथ काम करता रहा। आपकी मीटिंग अटेंड की। आपको कभी नहीं लगा कि मुझपर केस हैं। अचानक से ये केस कहां से आने लगे, जबकि ये सभी आचार संहिता और आंदोलन के केस हैं। एक भी केस मुझ पर क्रिमिनल नहीं है। बेल टूटने में ऐसा क्या हो गया कि ये नौबत आई?’ पटना SSP की कथा कहने लगूं तो.. पटना के SSP पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने लिखा, ‘मैंने आपका सहयोग किया, फिर भी दीपक नाम के आदमी को (जो खुद को रंगदारी सेल का इंस्पेक्टर बताता है) आपके एसएसपी साहब ने भेजा था। मैं आपके एसएसपी साहब की कथा कहने लगूं तो शायद आप सोच नहीं सकते क्या होगा?’ ‘उनकी पूर्णिया से लेकर पटना तक की पूरी कहानी और कथा मेरे पास है। उनके फोटो और वीडियो सबूत के रूप में मेरे पास हैं। मगर मैं अपनी मर्यादा जानता हूं। मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा। आपके एसएसपी साहब ने पहले भी लॉरेंस बिश्नोई केस में गलत और निर्दोष लोगों को मेरे खिलाफ खड़ा किया था।’ ‘ये लड़ाई कोर्ट तक जाएगी। मुझे न्यायालय, जनता और ईश्वर पर पूरा भरोसा है। जब तक न्यायालय और जनता है, तब तक मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं है।’ मैं अपनी बातों पर कायम हूं। NEET की छात्रा को न्याय मिलकर रहेगा। रविवार के दिन कौन सा भारत-पाकिस्तान युद्ध हो रहा था, जिसमें आपने हमको बिना जांच पूरे हुए अस्पताल से जेल भेज दिया। आखिर कब आपको ठंडक मिलेगी और कब पप्पू यादव को तंग कर आपके अहंकार को संतुष्टि मिलेगी? तभी तो पूर्णिया समेत अन्य जगहों पर पूछने लगे कि और किस-किस केस में वारंट है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन देखें, सरकार क्या कर रही है पप्पू यादव ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से गुहार लगाई, कहा, ‘मुझ पर आंदोलन और आचार संहिता के अलावा कोई केस आपके पूरे बिहार में नहीं है, जिसकी धारा मुझे रोक पाए। ये केस विपक्ष को तंग करने के लिए सत्ता का हथकंडा जरूर हैं, लेकिन विचलित करने के लिए नहीं।’ ‘किसी की आलोचना किए बगैर मैं यही कहूंगा कि सदन में सरकर के बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनपर दर्जनों केस होने के बावजूद वो आपके साथ बैठते हैं। मेरा ये संदेश अगर नीतीश, सम्राट, संजय, ललन तक पहुंचे तो उनसे यही कहूंगा कि आप हमेशा से वैचारिक रूप से लड़े हैं।’ ‘भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बधाई कि आप कम उम्र में एक बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। आपको ये जरूर देखना चाहिए कि आपकी सरकार जबरन किस विचार और आवाज को दबाना चाहती है।’ ‘नित्यानंद राय, आपसे पारिवारिक संबंध रहा है। परिवार के सदस्य के रूप में आपको देखा है। कभी आपकी आलोचना नहीं की। आप करिए, लेकिन रिश्ते का कद्र भी कर लिया कीजिए।’ ‘अंत में ये जरूर कहूंगा कि अगर मैं सही मामले में गलत हूं तो बेहतर है कि एक बार में ही मरवा दीजिए। लेकिन वैचारिक और सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए इस तरह से तंग मत कीजिये। आपकी छवि तंग करने की नहीं रही है। अगर और भी कोई केस बचा है तो वो भी लगा दीजिए।’


