सालाना उर्स प्रत्येक वर्ष फरवरी में , दूर-दूर से अकीदतमंद होते है शामिल

सालाना उर्स प्रत्येक वर्ष फरवरी में , दूर-दूर से अकीदतमंद होते है शामिल

भास्कर न्यूज । सालमारी तेघड़ा पंचायत के हरलगा गांव में स्थित हजरत सैयद महमूद शाह उर्फ बुढ़ापीर मजार का सालाना उर्स पूरे अकीदत और शान-ओ-शौकत के साथ 9 फरवरी से शुरू हो गया है। यह धार्मिक आयोजन 11 फरवरी की शाम लंगर के वितरण के साथ संपन्न होगा। उर्स की शुरुआत सोमवार की रात कमेटी सदस्यों द्वारा फीता काटकर कव्वाली और उर्स के शुभारंभ के साथ की गई। उर्स के पहले दिन मजार शरीफ पर चादरपोशी की गई, जिसके बाद कुल शरीफ और फातेहा खानी का आयोजन हुआ। इस पाक मौके पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी। कमेटी सदस्यों ने बताया कि बुढ़ापीर मजार का यह सालाना उर्स प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में आयोजित किया जाता है, जिसमें दूर-दराज के इलाकों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और अकीदतमंद पहुंचते हैं। उर्स कमेटी के नकीब आलम और तकी असगर ने बताया कि हरलगा में उर्स के कव्वाली का भी विशेष आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में सोमवार की रात कव्वाली मुकाबले का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदुस्तान के जाने-माने कव्वाल अरशद कमाली (उत्तर प्रदेश) और अमन अफजल साबरी (मुंबई) ने अपनी सूफियाना कव्वालियों से समा बांध दिया। कव्वाली की गूंज से पूरा मजार परिसर भक्तिरस में डूबा नजर आया और देर रात तक अकीदतमंद झूमते रहे। कमेटी की ओर से उर्स में शामिल अकीदतमंदों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मजार परिसर और आसपास के इलाके में विशेष बिजली व्यवस्था, पीने के स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। सच्चे दिल से मांगी गई दुआ जरूर कबूल होती कमेटी सदस्यों का कहना है कि मान्यता है कि बुढ़ापीर मजार पर सच्चे दिल से मांगी गई दुआ जरूर कबूल होती है, इसी विश्वास के साथ हर साल हजारों लोग यहां हाजिरी लगाते हैं। उर्स के सफल आयोजन में नकीब आलम, तकी असगर, सबी असगर, रुस्तुम अली, महताब आलम, अयाज, इकराम, अंजार आलम, अबु नसर, रब्बानी, नवेद, जावेद, रफी, राजू, तबरेज अंसारी सहित अन्य सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। हरलगा में कव्वाली का शुभारंभ करते कमेटी के सदस्य। भास्कर न्यूज । सालमारी तेघड़ा पंचायत के हरलगा गांव में स्थित हजरत सैयद महमूद शाह उर्फ बुढ़ापीर मजार का सालाना उर्स पूरे अकीदत और शान-ओ-शौकत के साथ 9 फरवरी से शुरू हो गया है। यह धार्मिक आयोजन 11 फरवरी की शाम लंगर के वितरण के साथ संपन्न होगा। उर्स की शुरुआत सोमवार की रात कमेटी सदस्यों द्वारा फीता काटकर कव्वाली और उर्स के शुभारंभ के साथ की गई। उर्स के पहले दिन मजार शरीफ पर चादरपोशी की गई, जिसके बाद कुल शरीफ और फातेहा खानी का आयोजन हुआ। इस पाक मौके पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी। कमेटी सदस्यों ने बताया कि बुढ़ापीर मजार का यह सालाना उर्स प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में आयोजित किया जाता है, जिसमें दूर-दराज के इलाकों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और अकीदतमंद पहुंचते हैं। उर्स कमेटी के नकीब आलम और तकी असगर ने बताया कि हरलगा में उर्स के कव्वाली का भी विशेष आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में सोमवार की रात कव्वाली मुकाबले का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदुस्तान के जाने-माने कव्वाल अरशद कमाली (उत्तर प्रदेश) और अमन अफजल साबरी (मुंबई) ने अपनी सूफियाना कव्वालियों से समा बांध दिया। कव्वाली की गूंज से पूरा मजार परिसर भक्तिरस में डूबा नजर आया और देर रात तक अकीदतमंद झूमते रहे। कमेटी की ओर से उर्स में शामिल अकीदतमंदों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मजार परिसर और आसपास के इलाके में विशेष बिजली व्यवस्था, पीने के स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। सच्चे दिल से मांगी गई दुआ जरूर कबूल होती कमेटी सदस्यों का कहना है कि मान्यता है कि बुढ़ापीर मजार पर सच्चे दिल से मांगी गई दुआ जरूर कबूल होती है, इसी विश्वास के साथ हर साल हजारों लोग यहां हाजिरी लगाते हैं। उर्स के सफल आयोजन में नकीब आलम, तकी असगर, सबी असगर, रुस्तुम अली, महताब आलम, अयाज, इकराम, अंजार आलम, अबु नसर, रब्बानी, नवेद, जावेद, रफी, राजू, तबरेज अंसारी सहित अन्य सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। हरलगा में कव्वाली का शुभारंभ करते कमेटी के सदस्य।  

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