रसूखदारों के दर्जनों ट्रैक्टर रात-दिन खनन कर पहाड़ों को कर रहे खोखला, पर्यावरण और प्राकृतिक सौंदर्य को खतरा

रसूखदारों के दर्जनों ट्रैक्टर रात-दिन खनन कर पहाड़ों को कर रहे खोखला, पर्यावरण और प्राकृतिक सौंदर्य को खतरा

खेरली. क्षेत्र के सोंखरी, छीतर सिंह का नंगला, गालाखेड़ा के पहाड़ों में अवैध खनन निरंतर जारी है। आरोप है कि जिम्मेदार विभाग के अधिकारी इस ओर से आंख बंद किए हुए हैं। अवैध खनन के कारण जहां प्रकृति का अनुचित दोहन हो रहा है, वही प्राकृतिक सुंदरता का भी हनन हो रहा है।

पहाड़ों में अवैध खनन से पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है। अवैध खनन करने वालों ने पहाड़ को जगह-जगह से काट दिया। पहाड़ों में कई गहरी खाइयां बन गई। कई पहाड़ों के तो कुछ भग्नावशेष शिखर दिखाई देते हैं। कारण है कि अवैध खनन करने वाले उस स्थान पर खुदाई करते हैं, जहां उन्हें अच्छा खनन मिलता है। अन्यथा उस स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर खनन करने लग जाते हैं।भनक लगते ही हो जाते हैं फरार

वन विभाग की ओर से नियुक्त सुरक्षा गार्ड जितेंद्र चौधरी ने बताया कि गालाखेड़ा में एक स्थान पर ट्रैक्टर पत्थर भरता हुआ मिला। उनको भनक लगते ही चालक ट्रैक्टर को भगा ले गया। पत्थर तोड़ने वाले श्रमिक पहाड़ पर चढ़कर भाग गए। उनकी ओर से सूचना करने पर अन्य स्थानों से सभी अवैध खनन करने वाले भी ट्रैक्टर लेकर भाग गए, जबकि इन स्थानों पर परात, फावडे, रस्से, पानी की बोतल आदि मिले। अवैध खनन के ये वाहन विशेष कर ट्रैक्टर-ट्रॉली रात्रि के समय अधिक चलते हैं, जो ट्रॉली को हरे त्रिपाल जैसे कुछ मेट आदि से ढके रहते हैं। यही स्थिति बजरी की ट्रॉली की होती है।बना लिए नए रास्ते

सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर वन विभाग ने खाइयां खोदी है, लेकिन अवैध खनन करने वालों ने खाइयों को छोड़कर वन विभाग की बाउंड्री को तोड़कर नए रास्ते बना लिए। आरोप है कि एक कर्मचारी को विस्तृत क्षेत्र सौंपा हुआ है। इससे पूरी तरह से मॉनिटरिंग नहीं हो पाती। इधर अवैध खनन के साथ लीज से पत्थर डस्ट ला रहे वाहन क्षमता से अधिक भरकर चलते हैं। दस्तावेज के नाम पर उनके पास एक पर्ची होती है। जिसमें न तो कोई रजिस्ट्रेशन क्रमांक होता है और न ही किसी फर्म का नाम। इस तरह अवैध खनन और अवैध वसूली का खेल बेरोकटोक चल रहा है। लोगों का आरोप है कि उक्त मामलों में खनिज विभाग, वन विभाग, पुलिस कार्रवाई नहीं कर रहे।

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नए रास्ते बना लेते हैंकई खाइयां वन विभाग ने खोदी है, लेकिन अवैध खनन करने वाले वन विभाग की बाउंड्री तोड़कर नए रास्ते बना लेते हैं। लीज से पत्थर और डस्ट वाहन क्षमता से अधिक भरकर ले जाते हैं। उनके पास दस्तावेज केवल एक पर्ची के रूप में होती है, जिसमें न तो रजिस्ट्रेशन नंबर है और न ही किसी फर्म का नाम, जिससे अवैध वसूली और खनन का खेल चल रहा है।

जतेंद्र चौधरी, सुरक्षा गार्ड, वन विभाग।

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कई बार कार्रवाई की गई है। सूचना मिलते ही पूरा प्रयास किया जाता है। नाका प्रभारी भी निगरानी रखते हैं, लेकिन खनन करने वाले भाग जाते हैं। फिर भी मौका निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।पुष्पेंद्र सिंह, एसीएफ।

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