कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के अनुसार फाइनेंस कंपनियाँ चोरी हुए सोने को ऋण के बहाने छिपा नहीं सकतीं, जब पुलिस जांच के लिए मामले में दखल देती हैं। यह फैसला मुथूट फाइनेंस लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें कंपनी ने पुलिस द्वारा गिरवी रखे सोने की जब्ती पर रोक लगाने की मांग की थी।
मालिक को सोने के इस्तेमाल से वंचित नहीं रखा जा सकता
जस्टिस सूरज गोविंदराज ने इस मामले में कहा कि अगर सोना चोरी का साबित होता है, तो असली मालिक को उसके इस्तेमाल से वंचित नहीं किया जा सकता, सिर्फ इसलिए कि वह किसी फाइनेंस कंपनी के पास गिरवी रखा गया है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि फाइनेंस कंपनी के अधिकार सिर्फ गिरवी रखने वाले व्यक्ति के अधिकारों तक सीमित हैं। अगर सोना चोरी का है, तो कंपनी का दावा असली मालिक के हक से ऊपर नहीं हो सकता।
उचित जांच और सत्यापन की ज़िम्मेदारी
कर्नाटक हाईकोर्ट के अनुसार कंपनी की ज़िम्मेदारी है कि सोना गिरवी लेने से पहले उचित जांच और सत्यापन किया जाए। पुलिस को चोरी के सोने को जब्त करने का अधिकार है, लेकिन उसे पुलिस के पास अनिश्चित काल तक नहीं रखा जा सकता; बल्कि संबंधित अदालत में जमा करना होगा। वहीं आगे की कार्यवाही हो सकती है।


