1 अप्रैल से लागू होने वाले इनकम टैक्स एक्ट 2025 से पहले आयकर विभाग ने ड्राफ्ट नियम जारी कर टैक्स फॉर्म्स की नंबरिंग पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद आइटीआर फाइलिंग को आसान बनाना, कन्फ्यूजन घटाना और कंप्लायंस को ज्यादा व्यवस्थित करना है। नए एक्ट में टैक्स फाइल करने का तरीका पहले से ज्यादा डिजिटल, ज्यादा डिटेल्ड और ज्यादा डिसिप्लिन्ड होने वाला है। इसमें आइटीआर फॉर्म्स को भी नए सिरे से बनाया गया है।
क्या-क्या होंगे बदलाव?
- टैक्स ऑडिट रिपोर्टः अभी के फॉर्म उसीए, उसीबी, उसीडी मिलकर फॉर्म 26 बनेंगे।
- ट्रांसफर प्राइसिंग ऑडिट: फॉर्म 3 सीईबी अब फॉर्म 48 बनेगा।
- मैट सर्टिफिकेशन: फॉर्म 29बी फॉर्म 66 के नाम से जाना जाएगा।
- टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेटः फॉर्म 10 एफए बदलकर फॉर्म 42 बनेगा।
- डीटीएए डिस्क्लोजरः फॉर्म 10 एफ फॉर्म 41 हो जाएगा।
टीडीएस-टीसीएस फॉर्म किस नाम से बदलेंगे?
- कम या शून्य टीडीएस आवेदनः फॉर्म 128 बन जाएंगे।
- सैलरी टीडीएस सर्टिफिकेटः फॉर्म 130 बनेंगे।
तिमाही टीडीएस रिटर्न
- 24 क्यू होगा फॉर्म 138 (सैलरी)
- 26 क्यू होगा फॉर्म 140 (रेजिडेंट्स)
- 27क्यू होगा फॉर्म 144 (नॉन-रेजिडेंट्स)
- टीसीएस रिटर्न: 27 ईक्यू फॉर्म हो जाएगा फॉर्म 143
आइटीआर फॉर्म्स में क्या बदलाव होगा?
- आइटीआर-1 उन लोगों के लिए है जो सैलरी, एक घर की प्रॉपर्टी और इंटरेस्ट जैसी दूसरी इनकम से कमाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग डिफॉल्ट है। पेपर फाइलिंग सिर्फ सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए है।
- आइटीआर-2 उन लोगों और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिलीज (एचयूएफ) के लिए है जिनके पास बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम नहीं है। इसमें कैपिटल गेन, कई घरों की प्रॉपर्टी या विदेश से आय वाले लोग आते हैं। डिस्क्लोजर्स (खुलासा) ज्यादा डिटेल्ड होने वाले हैं। जो लोग निवेश करते हैं या विदेश से कमाते हैं, उन्हें अब ज्यादा जानकारी देनी पड़ेगी।
- आइटीआर-3 उन लोगों के लिए जिनकी कमाई बिजनेस या प्रोफेशन से होती है। अगर कोई टैक्सपेयर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन या आसान रिटर्न के दायरे में नहीं आता, तो उसे आइटीआप-3 ही भरना होगा।
- आइटीआर-4 (सुगम) प्रेसम्प्टिव टैक्सेशन वाले मामलों के लिए रहेगा। विदेश में कोई एसेट या इनकम है, किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, अनलिस्टेड शेयर रखते हैं, सालाना कमाई 50 लाख से ज्यादा है, दो से अधिक घर है, पिछला नुकसान आगे बढ़ाया गया है या खेती से कमाई 5,000 रुपए से ऊपर है, तो आइटीआर-4 नहीं भर पाएंगे।
- आइटीआर 5,6,7: कंप्लायंस, ऑडिट जानकारी और रिपोर्टिंग की शर्तों को सख्त किया है। कंपनियों के लिए डिजिटल सिग्नेचर से रिटर्न फाइल करना जरूरी रहेगा। आइटीआर 7 में अब संस्थाओं को डोनेशन की जानकारी, फंड्स के इस्तेमाल को सीधे रिटर्न से जोड़ा गया है।


