मोतिहारी में चुनावी हार के बाद प्रशांत किशोर की पहली बैठक हंगामेदार रही। शहर के एक निजी होटल में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आयोजित इस बैठक में नाराज कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। बैठक के दौरान कुछ पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया, जिससे उनमें आक्रोश फैल गया। नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाए। ”प्रशांत किशोर दलालों और चापलूस लोगों से घिरे” कार्यकर्ताओं का कहना था कि प्रशांत किशोर दलालों और चापलूस लोगों से घिरे हुए हैं, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की सही बात उन तक नहीं पहुंच पा रही है। कार्यकर्ताओं ने इसे हालिया चुनाव में पार्टी की हार का मुख्य कारण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग लगातार संगठन के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि बाहरी और प्रभावशाली लोगों को तरजीह दी जा रही है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच बैठक स्थल पर शोर-शराबा बढ़ गया और कुछ देर के लिए बैठक बाधित हो गई। प्रशांत किशोर ने खुद मामले में बीच-बचाव किया स्थिति बिगड़ती देख प्रशांत किशोर ने स्वयं हस्तक्षेप किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांत रहने की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि संगठन में हर कार्यकर्ता की बात सुनी जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। इसके बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे और नाराज कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक मान-मनौव्वल के बाद कार्यकर्ता शांत हुए, जिसके बाद बैठक दोबारा शुरू हो सकी। संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष उजागर इस घटना ने चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशांत किशोर इन आरोपों और नाराजगी को किस तरह दूर कर संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश करते हैं। मोतिहारी में चुनावी हार के बाद प्रशांत किशोर की पहली बैठक हंगामेदार रही। शहर के एक निजी होटल में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आयोजित इस बैठक में नाराज कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। बैठक के दौरान कुछ पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया, जिससे उनमें आक्रोश फैल गया। नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाए। ”प्रशांत किशोर दलालों और चापलूस लोगों से घिरे” कार्यकर्ताओं का कहना था कि प्रशांत किशोर दलालों और चापलूस लोगों से घिरे हुए हैं, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की सही बात उन तक नहीं पहुंच पा रही है। कार्यकर्ताओं ने इसे हालिया चुनाव में पार्टी की हार का मुख्य कारण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग लगातार संगठन के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि बाहरी और प्रभावशाली लोगों को तरजीह दी जा रही है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच बैठक स्थल पर शोर-शराबा बढ़ गया और कुछ देर के लिए बैठक बाधित हो गई। प्रशांत किशोर ने खुद मामले में बीच-बचाव किया स्थिति बिगड़ती देख प्रशांत किशोर ने स्वयं हस्तक्षेप किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांत रहने की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि संगठन में हर कार्यकर्ता की बात सुनी जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। इसके बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे और नाराज कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक मान-मनौव्वल के बाद कार्यकर्ता शांत हुए, जिसके बाद बैठक दोबारा शुरू हो सकी। संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष उजागर इस घटना ने चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशांत किशोर इन आरोपों और नाराजगी को किस तरह दूर कर संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश करते हैं।


