चंडिहा के छात्र-छात्राएं पटना भ्रमण पर रवाना:गोलघर, चिड़ियाघर और अशोक स्तंभ का करेंगे दौरा, बिहार दर्शन योजना से मिलेगा लाभ

चंडिहा के छात्र-छात्राएं पटना भ्रमण पर रवाना:गोलघर, चिड़ियाघर और अशोक स्तंभ का करेंगे दौरा, बिहार दर्शन योजना से मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत राजकीय मध्य विद्यालय चंडिहा (बालक) के छात्र-छात्राएं ने मंगलवार को पटना भ्रमण के लिए रवाना हुए। प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार के नेतृत्व में यह दल पटना के ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन करेगा। इस परिभ्रमण योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को ऐतिहासिक, पर्यटक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों से परिचित कराना है। इससे बच्चों की मानसिक और बौद्धिक क्षमता का विकास होता है, साथ ही उन्हें बाहरी दुनिया का ज्ञान भी मिलता है। भ्रमण के दौरान छात्र गोलघर, चिड़ियाघर और अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा करेंगे। यह योजना विशेष रूप से विद्यालय के कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सत्येंद्र कुमार झा ने इस योजना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का भौतिक रूप से भ्रमण करने से बच्चों को स्थायी ज्ञान प्राप्त होता है और उनकी समझने की क्षमता बढ़ती है। झा ने कहा कि यह बच्चों को उत्साह और उमंग के साथ नई चीजें सीखने का अवसर देता है। इस तरह का प्रत्यक्ष ज्ञान स्थायी होता है, जिससे बच्चे इतिहास और अन्य विषयों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और अपने जीवन में इसे चरितार्थ कर सकते हैं। मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत राजकीय मध्य विद्यालय चंडिहा (बालक) के छात्र-छात्राएं ने मंगलवार को पटना भ्रमण के लिए रवाना हुए। प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार के नेतृत्व में यह दल पटना के ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन करेगा। इस परिभ्रमण योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को ऐतिहासिक, पर्यटक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों से परिचित कराना है। इससे बच्चों की मानसिक और बौद्धिक क्षमता का विकास होता है, साथ ही उन्हें बाहरी दुनिया का ज्ञान भी मिलता है। भ्रमण के दौरान छात्र गोलघर, चिड़ियाघर और अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का दौरा करेंगे। यह योजना विशेष रूप से विद्यालय के कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सत्येंद्र कुमार झा ने इस योजना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का भौतिक रूप से भ्रमण करने से बच्चों को स्थायी ज्ञान प्राप्त होता है और उनकी समझने की क्षमता बढ़ती है। झा ने कहा कि यह बच्चों को उत्साह और उमंग के साथ नई चीजें सीखने का अवसर देता है। इस तरह का प्रत्यक्ष ज्ञान स्थायी होता है, जिससे बच्चे इतिहास और अन्य विषयों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और अपने जीवन में इसे चरितार्थ कर सकते हैं।  

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