सारंडा के जंगलों में लगे‎ कैमरे में तेंदुआ कैद‎:ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन के तहत हुआ सर्वे, रिपोर्ट पलामू के बेतला भेजी जाएगी

सारंडा के जंगलों में लगे‎ कैमरे में तेंदुआ कैद‎:ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन के तहत हुआ सर्वे, रिपोर्ट पलामू के बेतला भेजी जाएगी

ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमे शन-2026 के तहत‎पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा, पोड़ाहाट व कोल्हान‎ के वन क्षेत्र में भी बाघों की तलाश में सर्वे किया गया।‎ इस दौरान तीनों रेंज के अधिकारियों पर केवल बाघ ही ‎नहीं, बल्कि तेंदुआ, हाथी, हिरण समेत अन्य जीवों की‎भी गिनती की जिम्मेवारी सौंपी गई थी। 15 दिसंबर से ‎22 दिसंबर तक चले इस सर्वे में सबसे पहले साइन ‎सर्वे के जरिए जंगल में लगे कैमरा के माध्यम से जंगली‎ जानवरों का मल मूत्र, सींग को कवर किया। इसके बाद ‎ट्रजेंट्म सर्वे के दौरान 2 किमी तक जंगल में पैदल‎ चलकर जंगली जानवरों के पग मार्क का सर्वें किया‎ गया। वन विभाग द्वारा छोटानागरा के जंगलों में लगाए‎ गए कैमरे में तेंदुआ समेत हिरण की प्रजाति चीतल, ‎कोटरा, हाथी, जंगली खरगोश और विभिन्न प्रजाति के‎ जहरीले सांप भी कैद हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, ‎छोटानागरा के जंगलों में जनवरी माह में दिन के उजाले‎ में तेंदुआ विचरण करते हुए कैमरे में कैद हुआ है। इसकी‎ रिपोर्ट पलामू के बेतला राष्ट्रीय उद्यान बाघ आरक्षण‎ केंद्र को भेजी जाएगी। उसके बाद डाटा को नेशनल‎ टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के माध्यम से‎ वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून को भेजा जाएगा। 29‎ जुलाई को टाइगर डे पर टाइगर एस्टीमेशन की रिपोर्ट‎ जारी की जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया ‎कि देशभर में यह सर्वे प्रत्येक चार साल में एक बार ‎होता है। सारंडा-पोड़ाहाट के घने जंगलों में तेंदुआ,‎ जंगली हाथी, सियार, कोटरा, चितल, बड़ी गिलहरी ,‎हनी बैजर, जहरीले सांप आदि जीव जंतु पाए जाते हैं।‎ पूर्व में सारंडा में भी बाघों का रहा है कॉरिडोर‎
800 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में फैले सारंडा ‎के जंगलों में कहीं-कहीं कभी बाघों का‎ भी कॉरिडोर रहा है। विभागीय रिपोर्ट की‎मानें तो सारंडा पोड़ाहाट में आजादी के‎ पहले बाघों की उपस्थिति रही है।‎ खासकर सारंडा वनक्षेत्र में पूर्व में बाघों ‎की मौजूदगी को लेकर सारंडा के ग्रामीणों‎ के बीच भी यह चर्चा बनी रहती है।‎ हालंकि विभाग इसकी पुष्टि नहीं करता‎ है। सूचना है कि टाइगर कॉरिडोर‎ सिमलीपाल पार्क से पलामू, छत्तीसगढ़ ‎होते हुए वर्ष 2012 में सारंडा में एक‎बाघ घुसा था। बाघ के पगमार्क भी मिले‎ थे। एटीआर 2022 में हुए सर्वे के‎ मुताबिक पूरे भारत में बाघों की आबादी‎ में प्रभावशाली वृद्धि हुई है। अनुमानित‎ संख्या 3,682 तक पहुंच गई। वहीं इस‎ सर्वे में पाया गया है कि झारखंड,‎ ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे‎ राज्यों में बाघों की संख्या कम हुई है।‎ सर्वे में सारंडा-पोड़ाहाट व‎कोल्हान में लगे थे 250 से‎ ज्यादा वनकर्मी‎
‎15 से 22 दिसंबर तक हुए ऑल इंडिया‎टाइगर एस्टीमेशन सर्वे में‎ सारंडा-पोड़ाहाट व कोल्हान वन रेंज‎क्षेत्र में 250 से ज्यादा वनपाल और‎ वनकर्मियों को लगाया गया था। इसके‎ लिए वनकर्मियों को ट्रेनिंग दी गई है।‎ इसके अलावा कोल्हान यूनिवर्सिटी से ‎जुड़े जूलॉजी के छात्र-छात्राओं को भी‎ इस सर्वे में जोड़ा गया था, जहां एक ‎सप्ताह तक जंगल में प्रोसेस सर्वे किया‎ गया। जंगल में सर्वे शुरू करने से पहले ‎कर्मियों द्वारा एम स्ट्राइप्स नामक एप‎ऑन किया था, ताकि सर्वे की सारी ‎रिपोर्ट को ऐप के माध्यम से फीड किया‎ जा सके। देश भर में आयोजित टाइगर ‎एस्टीमेशन (गिनती) सर्वे को लेकर‎ झारखंड के नोडल सीसीएफ वाइल्ड ‎लाइफ के निदेशक एसआर नटेश को ‎जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं, पश्चिमी‎ सिंहभूम के पोड़ाहाट वन क्षेत्र में इस‎ सर्वे के लिए 200 प्वाइंट्स सेटेलाइट ‎इस सर्वे की निगरानी देहरादून स्थित‎ भारतीय वन्यजीव संस्थान कर रहा है। ‎डेटा विश्लेषण और रिमोट सेंसिंग‎(सैटेलाइट इमेजिंग) भेज रहा है।‎ ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमे शन-2026 के तहत‎पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा, पोड़ाहाट व कोल्हान‎ के वन क्षेत्र में भी बाघों की तलाश में सर्वे किया गया।‎ इस दौरान तीनों रेंज के अधिकारियों पर केवल बाघ ही ‎नहीं, बल्कि तेंदुआ, हाथी, हिरण समेत अन्य जीवों की‎भी गिनती की जिम्मेवारी सौंपी गई थी। 15 दिसंबर से ‎22 दिसंबर तक चले इस सर्वे में सबसे पहले साइन ‎सर्वे के जरिए जंगल में लगे कैमरा के माध्यम से जंगली‎ जानवरों का मल मूत्र, सींग को कवर किया। इसके बाद ‎ट्रजेंट्म सर्वे के दौरान 2 किमी तक जंगल में पैदल‎ चलकर जंगली जानवरों के पग मार्क का सर्वें किया‎ गया। वन विभाग द्वारा छोटानागरा के जंगलों में लगाए‎ गए कैमरे में तेंदुआ समेत हिरण की प्रजाति चीतल, ‎कोटरा, हाथी, जंगली खरगोश और विभिन्न प्रजाति के‎ जहरीले सांप भी कैद हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, ‎छोटानागरा के जंगलों में जनवरी माह में दिन के उजाले‎ में तेंदुआ विचरण करते हुए कैमरे में कैद हुआ है। इसकी‎ रिपोर्ट पलामू के बेतला राष्ट्रीय उद्यान बाघ आरक्षण‎ केंद्र को भेजी जाएगी। उसके बाद डाटा को नेशनल‎ टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के माध्यम से‎ वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून को भेजा जाएगा। 29‎ जुलाई को टाइगर डे पर टाइगर एस्टीमेशन की रिपोर्ट‎ जारी की जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया ‎कि देशभर में यह सर्वे प्रत्येक चार साल में एक बार ‎होता है। सारंडा-पोड़ाहाट के घने जंगलों में तेंदुआ,‎ जंगली हाथी, सियार, कोटरा, चितल, बड़ी गिलहरी ,‎हनी बैजर, जहरीले सांप आदि जीव जंतु पाए जाते हैं।‎ पूर्व में सारंडा में भी बाघों का रहा है कॉरिडोर‎
800 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में फैले सारंडा ‎के जंगलों में कहीं-कहीं कभी बाघों का‎ भी कॉरिडोर रहा है। विभागीय रिपोर्ट की‎मानें तो सारंडा पोड़ाहाट में आजादी के‎ पहले बाघों की उपस्थिति रही है।‎ खासकर सारंडा वनक्षेत्र में पूर्व में बाघों ‎की मौजूदगी को लेकर सारंडा के ग्रामीणों‎ के बीच भी यह चर्चा बनी रहती है।‎ हालंकि विभाग इसकी पुष्टि नहीं करता‎ है। सूचना है कि टाइगर कॉरिडोर‎ सिमलीपाल पार्क से पलामू, छत्तीसगढ़ ‎होते हुए वर्ष 2012 में सारंडा में एक‎बाघ घुसा था। बाघ के पगमार्क भी मिले‎ थे। एटीआर 2022 में हुए सर्वे के‎ मुताबिक पूरे भारत में बाघों की आबादी‎ में प्रभावशाली वृद्धि हुई है। अनुमानित‎ संख्या 3,682 तक पहुंच गई। वहीं इस‎ सर्वे में पाया गया है कि झारखंड,‎ ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे‎ राज्यों में बाघों की संख्या कम हुई है।‎ सर्वे में सारंडा-पोड़ाहाट व‎कोल्हान में लगे थे 250 से‎ ज्यादा वनकर्मी‎
‎15 से 22 दिसंबर तक हुए ऑल इंडिया‎टाइगर एस्टीमेशन सर्वे में‎ सारंडा-पोड़ाहाट व कोल्हान वन रेंज‎क्षेत्र में 250 से ज्यादा वनपाल और‎ वनकर्मियों को लगाया गया था। इसके‎ लिए वनकर्मियों को ट्रेनिंग दी गई है।‎ इसके अलावा कोल्हान यूनिवर्सिटी से ‎जुड़े जूलॉजी के छात्र-छात्राओं को भी‎ इस सर्वे में जोड़ा गया था, जहां एक ‎सप्ताह तक जंगल में प्रोसेस सर्वे किया‎ गया। जंगल में सर्वे शुरू करने से पहले ‎कर्मियों द्वारा एम स्ट्राइप्स नामक एप‎ऑन किया था, ताकि सर्वे की सारी ‎रिपोर्ट को ऐप के माध्यम से फीड किया‎ जा सके। देश भर में आयोजित टाइगर ‎एस्टीमेशन (गिनती) सर्वे को लेकर‎ झारखंड के नोडल सीसीएफ वाइल्ड ‎लाइफ के निदेशक एसआर नटेश को ‎जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं, पश्चिमी‎ सिंहभूम के पोड़ाहाट वन क्षेत्र में इस‎ सर्वे के लिए 200 प्वाइंट्स सेटेलाइट ‎इस सर्वे की निगरानी देहरादून स्थित‎ भारतीय वन्यजीव संस्थान कर रहा है। ‎डेटा विश्लेषण और रिमोट सेंसिंग‎(सैटेलाइट इमेजिंग) भेज रहा है।‎  

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