सरकारी अस्पतालों में बेड-ओटी और डॉक्टरों की कमी:ऑपरेशन के लिए भी करना पड़ रहा इंतजार, वेटिंग लिस्ट होती जा रही लंबी

सरकारी अस्पतालों में बेड-ओटी और डॉक्टरों की कमी:ऑपरेशन के लिए भी करना पड़ रहा इंतजार, वेटिंग लिस्ट होती जा रही लंबी

पटना के प्रमुख सरकारी अस्पताल पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और एलएनजेपी (हड्डी अस्पताल) में मरीजों को ऑपरेशन के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। राज्य भर से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे मरीजों के लिए ऑपरेशन कराना एक बड़ी चुनौती है। न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक और जनरल सर्जरी विभागों में स्थिति सबसे खराब है। आर्थिक तंगी के कारण गरीब मरीज निजी अस्पतालों का महंगा खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा। इससे जान पर जोखिम में पड़ जाती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीजों की अधिक संख्या के मुकाबले बेड-ऑपरेशन थिएटर (ओटी) का अभाव है। इसके अलावा, मरीजों के अनुपात में डॉक्टरों की भी कमी है। पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद, संसाधनों की कमी के कारण समय पर ऑपरेशन संभव नहीं हो पा रहे हैं। एलएनजेपी हड्डी अस्पताल के निदेशक राकेश चौधरी ने बताया कि मरीजों की संख्या के अनुपात में ऑपरेशन थिएटर कम हैं। 24 घंटे ओटी संचालित न हो पाने के कारण वेटिंग लिस्ट लंबी हो रही है। उम्मीद है कि नए भवन के निर्माण के बाद 400 एक्स्ट्रा बेड और अधिक ओटी उपलब्ध होने पर स्थिति में सुधार होगी। लोगों ने बताई अपनी-अपनी समस्याएं

1. मैनपुरा राजापुर निवासी पिंकी देवी कहतीं हैं कि हाथ टूटने के बाद एलएनजेपी में कच्चा प्लास्टर चढ़ा। एक सप्ताह बाद ऑपरेशन की बात हुई, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी तारीख नहीं मिली।

2. आरा के गढ़नी निवासी मुन्ना कुमार ने कहा कि दुर्घटना में मां का कुल्हा टूट गया। 6,000 रुपए देकर निजी एंबुलेंस से लंबी दूरी कर शहर के प्रमुख अस्पताल एलएनजेपी (हड्डी अस्पताल) पहुंचे, लेकिन बेड नहीं मिला। अब मां बेटे को लेकर दूसरे अस्पताल जा रहा हूं।

3. पीएमसीएच में न्यूरो सर्जरी का हाल, छपरा के जितेंद्र कुमार अपनी मां की पोस्टेरियर फोसा डिकम्प्रेशन (ब्रेन सर्जरी) के लिए 2 महीने से भटक रहे हैं। 4 बार भर्ती, हर बार 2–3 दिन बाद ओटी वेटिंग का हवाला देकर डिस्चार्ज।

4. आईजीआईएमएस की लंबी कतार, किडनी स्टोन के ऑपरेशन के लिए आफरीना तबस्सुम को 25 दिन बाद की तारीख मिली। दशरथ पासवान अपने 18 वर्षीय बेटे के इलाज के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

5. ब्रेन कैंसर के बाद भी इंतजार, वैशाली के संतोष कुमार 17 वर्षीय बेटे को लेकर 14 दिनों से आईजीआईएमएस के चक्कर काट रहे हैं। बेड नहीं मिलने से ऑपरेशन 15 दिन आगे बढ़ा दिया गया। फिलहाल बच्चे के ऑपरेशन के लिए अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। विशेषज्ञ क्या कहते हैं ?

महावीर वात्सल्य संस्थान के निदेशक सह पूर्व अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद कहते हैं कि किसी बड़े सरकारी अस्पताल की क्षमता उसके ओटी की संख्या और टर्नओवर पर निर्भर करती है। आदर्श मानक के अनुसार हर 50 सर्जिकल बेड पर 1 डेडिकेटेड ओटी होना चाहिए। पीएमसीएच जैसे अस्पताल में ऑर्थोपेडिक के 200 मरीज हों, तो रोज 4–5 नहीं बल्कि 20 से ज्यादा बड़े ऑपरेशन होने चाहिए। डॉक्टरों की भी भारी कमी है, पटना के मेडिकल कॉलेजों में 30–40 पद खाली हैं। न्यूरोसर्जन की कमी तो 70 तक है। ऐसे में वेटिंग लिस्ट महीनों लंबी होना तय है। पटना के प्रमुख सरकारी अस्पताल पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और एलएनजेपी (हड्डी अस्पताल) में मरीजों को ऑपरेशन के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। राज्य भर से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे मरीजों के लिए ऑपरेशन कराना एक बड़ी चुनौती है। न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक और जनरल सर्जरी विभागों में स्थिति सबसे खराब है। आर्थिक तंगी के कारण गरीब मरीज निजी अस्पतालों का महंगा खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा। इससे जान पर जोखिम में पड़ जाती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीजों की अधिक संख्या के मुकाबले बेड-ऑपरेशन थिएटर (ओटी) का अभाव है। इसके अलावा, मरीजों के अनुपात में डॉक्टरों की भी कमी है। पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद, संसाधनों की कमी के कारण समय पर ऑपरेशन संभव नहीं हो पा रहे हैं। एलएनजेपी हड्डी अस्पताल के निदेशक राकेश चौधरी ने बताया कि मरीजों की संख्या के अनुपात में ऑपरेशन थिएटर कम हैं। 24 घंटे ओटी संचालित न हो पाने के कारण वेटिंग लिस्ट लंबी हो रही है। उम्मीद है कि नए भवन के निर्माण के बाद 400 एक्स्ट्रा बेड और अधिक ओटी उपलब्ध होने पर स्थिति में सुधार होगी। लोगों ने बताई अपनी-अपनी समस्याएं

1. मैनपुरा राजापुर निवासी पिंकी देवी कहतीं हैं कि हाथ टूटने के बाद एलएनजेपी में कच्चा प्लास्टर चढ़ा। एक सप्ताह बाद ऑपरेशन की बात हुई, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी तारीख नहीं मिली।

2. आरा के गढ़नी निवासी मुन्ना कुमार ने कहा कि दुर्घटना में मां का कुल्हा टूट गया। 6,000 रुपए देकर निजी एंबुलेंस से लंबी दूरी कर शहर के प्रमुख अस्पताल एलएनजेपी (हड्डी अस्पताल) पहुंचे, लेकिन बेड नहीं मिला। अब मां बेटे को लेकर दूसरे अस्पताल जा रहा हूं।

3. पीएमसीएच में न्यूरो सर्जरी का हाल, छपरा के जितेंद्र कुमार अपनी मां की पोस्टेरियर फोसा डिकम्प्रेशन (ब्रेन सर्जरी) के लिए 2 महीने से भटक रहे हैं। 4 बार भर्ती, हर बार 2–3 दिन बाद ओटी वेटिंग का हवाला देकर डिस्चार्ज।

4. आईजीआईएमएस की लंबी कतार, किडनी स्टोन के ऑपरेशन के लिए आफरीना तबस्सुम को 25 दिन बाद की तारीख मिली। दशरथ पासवान अपने 18 वर्षीय बेटे के इलाज के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

5. ब्रेन कैंसर के बाद भी इंतजार, वैशाली के संतोष कुमार 17 वर्षीय बेटे को लेकर 14 दिनों से आईजीआईएमएस के चक्कर काट रहे हैं। बेड नहीं मिलने से ऑपरेशन 15 दिन आगे बढ़ा दिया गया। फिलहाल बच्चे के ऑपरेशन के लिए अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। विशेषज्ञ क्या कहते हैं ?

महावीर वात्सल्य संस्थान के निदेशक सह पूर्व अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद कहते हैं कि किसी बड़े सरकारी अस्पताल की क्षमता उसके ओटी की संख्या और टर्नओवर पर निर्भर करती है। आदर्श मानक के अनुसार हर 50 सर्जिकल बेड पर 1 डेडिकेटेड ओटी होना चाहिए। पीएमसीएच जैसे अस्पताल में ऑर्थोपेडिक के 200 मरीज हों, तो रोज 4–5 नहीं बल्कि 20 से ज्यादा बड़े ऑपरेशन होने चाहिए। डॉक्टरों की भी भारी कमी है, पटना के मेडिकल कॉलेजों में 30–40 पद खाली हैं। न्यूरोसर्जन की कमी तो 70 तक है। ऐसे में वेटिंग लिस्ट महीनों लंबी होना तय है।  

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